पौधारोपण से जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मिलती मदद

बिहार और झारखंड के सीमावर्ती जंगलों में वन महोत्सव मनाया गया। 2025-26 में 5 करोड़ पौधे लगाने योजना है। साथ ही हरित क्षेत्र को 15.05 प्रतिशत से बढ़ाकर 2028 तक 17 प्रतिशत किया जाए। 

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गया जी: कार्बन डाइऑक्साइड सोखकर ऑक्सीजन छोड़ने की अपनी प्रकृति से पौधे हवा को साफ रखते हैं। जलवायु परिवर्तन से लड़ने में भी इनसे मदद मिलती है। तापमान प्रबंधन भी इनसे होता है। इसके अलावा पेड़ों की जड़ें मिट्टी को बांधे रखती हैं, जिससे भू-क्षरण रुकता है और मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए गुरपा वन प्रक्षेत्र के फतेहपुर प्रखंड अंतर्गत कांटी (लोधवे) स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में प्रखंड स्तरीय वन महोत्सव का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर वन क्षेत्र पदाधिकारी रजनीश कुमार ने कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री का अभियान एक पेड़ मां के नाम के तहत एक सामूहिक प्रयास है जो हमें पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराता है। हमें एक बेहतर और स्वस्थ पर्यावरण बनाने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों विद्यार्थियों, अधीनस्थ वनकर्मी एवं शिक्षकों के साथ शपथ लिया और अनुरोध किया कि अपनी भाग दौड़ भरी जिंदगी से कुछ समय निकालकर प्रतिदिन एक पौधा अवश्य लगाए एवं उसके पेड़ बनने तक देखभाल करें। वृक्ष रक्षति रक्षित के संतुलन को बनाए रखने की भी अपील की। 
फतेहपुर थानाध्यक्ष प्रशांत कुमार सिंह ने कहा, जितना सम्मान हम अपनी जन्म देने वाली माता को देते है उतना ही सम्मान हमें हमारा पालन पोषण करने वाली माता समान वृक्ष को भी देने की जरूरत है। इससे मां का सम्मान तो होता ही है। साथ ही धरती मां की भी रक्षा होती है। गुरपा वन प्रक्षेत्र जिला गया जी का सबसे बड़ा वन आच्छादित क्षेत्र है और यहां पर 90 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग भी अभी तंदुरुस्त है और उन्हें ऐसा स्वास्थ्य देने के लिए वे प्रकृति का गुणगान करते है।
एसटीएफ थानाध्यक्ष गुरपा राकेश कुमार ने भी लोगों से इस महोत्सव में शामिल होकर अधिक से अधिक पौधा लगाकर इस अभियान को सफल बनाने का आग्रह किया। उन्होंने अश्वत (पीपल) वृक्ष की चर्चा की, जिसका उल्लेख हिंदू धर्म के पवित्र ग्रन्थ गीता में मिलता है और इसी वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।
उत्तरी लोधवे पंचायत के जन प्रतिनिधि श्री अभय कुमार ने ऐसे आयोजन को बहुत सराहा और सभी का आभार प्रकट किया और आग्रह किया कि ऐसे आयोजन नियमित रूप से होने चाहिए जिससे जन मानस के अंदर प्रकृति से प्रेम और सजगता की भावना उत्पन्न हो।
वन महोत्सव 3 माह तक चलने वाला राजव्यापी अभियान है जिसके तहत वर्ष 2025-26 में 5 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। लक्ष्य है कि हरित आच्छादन को 15.05 प्रतिशत से बढ़ाकर 2028 तक 17 प्रतिशत किया जाए। कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और जलवायु परिवर्तन से निपटना है।
इस प्रकृति प्रेम के सुंदर उत्सव में कस्तूरबा गांधी बालिका एवं राजकीय उच्च विद्यालय लोधवे के 100 से अधिक विद्यार्थियों ने चित्रकला में भाग लिया। उनके रंगों और शब्दों ने जंगल को बचाने और अधिक से अधिक पौधा लगाने एवं उसकी रक्षा करने का सशक्त संदेश दिया।

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