नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) की प्राकृतिक संपदा, विशेष रूप से इसकी आद्रभूमियां (वेटलैंड्स), पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने हाल ही में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को दी गई अपनी रिपोर्ट में बताया कि जम्मू-कश्मीर में कुल 404 आद्रभूमियों में से 342 का सत्यापन और 82 की सीमा निर्धारण का कार्य पूरा हो चुका है। यह कदम क्षेत्र की जैव-विविधता को संरक्षित करने और अवैध अतिक्रमण को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही, पुलवामा में अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई की गई है, जिसके तहत सैकड़ों वाहन और मशीनरी जब्त की गई हैं।
वूलर और होकेरा: रामसर साइट्स का महत्व
जम्मू-कश्मीर की वूलर झील को 23 मार्च 1990 को रामसर साइट के रूप में मान्यता दी गई थी। यह भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है, जो जलप्लवक, सिंघाड़ा और अन्य वनस्पतियों का समृद्ध स्रोत है। ये वनस्पतियां न केवल स्थानीय मवेशियों के लिए चारा प्रदान करती हैं, बल्कि राज्य सरकार के लिए आय का महत्वपूर्ण स्रोत भी हैं। वूलर झील मछली पालन, सिंचाई और स्थानीय समुदायों की घरेलू जल आवश्यकताओं को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इसी तरह, होकेरा (होकरसर) झील, जिसे 8 नवंबर 2005 को रामसर साइट घोषित किया गया, झेलम बेसिन के पास स्थित एक स्थाई प्राकृतिक आद्रभूमि है। यह 68 जलपक्षी प्रजातियों का आश्रय स्थल है और कश्मीर में रीडबेड्स की उपस्थिति के लिए प्रसिद्ध है। इन आद्रभूमियों का संरक्षण जैव-विविधता और पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
वूलर झील के लिए संरक्षण योजना
पर्यावरण मंत्रालय ने वूलर झील के संरक्षण के लिए एक एकीकृत प्रबंधन योजना (इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट प्लान) को वित्तीय वर्ष 2022-23 में मंजूरी दी थी। इस योजना के तहत राष्ट्रीय जल पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण योजना (एनपीसीए) के अंतर्गत 31 मार्च 2023 को 9 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया। यह कदम वूलर, होकेरा और क्रेंचू चंदारा जैसी प्रमुख आद्रभूमियों में अवैध अतिक्रमण और ठोस कचरे के अनुचित निपटान की समस्याओं से निपटने के लिए उठाया गया है।
पुलवामा में अवैध खनन पर सख्ती
पुलवामा जिला प्रशासन ने अवैध खनन को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। जिला मजिस्ट्रेट ने 8 सितंबर 2025 को एनजीटी में दाखिल अपनी रिपोर्ट में बताया कि जनवरी 2024 से जुलाई 2025 के बीच 224 वाहन और मशीनरी जब्त की गईं, जिससे 46.85 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। यह कार्रवाई एनजीटी के 12 अगस्त 2025 के आदेश के जवाब में की गई थी।
पंपोर के खानकाह बाग और आसपास के क्षेत्रों (सिंधगिर, बडगाम और पुलवामा) में मिट्टी और रेत के अवैध उत्खनन की शिकायतें मिली थीं। भू-विज्ञान और खनन विभाग की टीम ने 1 जुलाई 2024 को मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। स्थानीय समुदाय के विरोध और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के कारण अवैध खनन को पूरी तरह रोका गया, और कोई भी ट्रक मिट्टी या रेत ले जाने में सफल नहीं हुआ।
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पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम
जम्मू-कश्मीर की आद्रभूमियां और प्राकृतिक संसाधन न केवल स्थानीय समुदायों के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वैश्विक जैव-विविधता के लिए भी अमूल्य हैं। मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम, जैसे आद्रभूमियों का सत्यापन, संरक्षण योजनाओं को लागू करना और अवैध खनन पर रोक, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक प्रयास हैं। हालांकि, इन प्रयासों को और प्रभावी बनाने के लिए स्थानीय समुदायों, गैर-सरकारी संगठनों और सरकार के बीच सहयोग जरूरी है।
भविष्य के लिए संकल्प
वूलर और होकेरा जैसी आद्रभूमियां न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक हैं, बल्कि ये जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और जैव-विविधता को संरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अवैध खनन और अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीर है। हमें इन प्रयासों को और मजबूत करने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी लेनी होगी, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इन प्राकृतिक धरोहरों का आनंद ले सकें।



