नई दिल्ली। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) के 20वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। उन्होंने एनआईटी कुरुक्षेत्र की समृद्ध विरासत और देश में तकनीकी शिक्षा में इसके योगदान की सराहना की। उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल एक समारोह नहीं, बल्कि वर्षों के समर्पण का प्रतीक है, जो नई शुरुआत और अवसरों से भरा होता है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि मैकाले युग की औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागकर भारत वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारत की संस्कृति, परंपरा और लोकाचार में निहित है। उन्होंने कहा कि अनुसंधान को ग्रामीण भारत को सशक्त बनाना चाहिए, शहरी-ग्रामीण विभाजन को पाटना चाहिए और एमएसएमई को मजबूत करना चाहिए।
विद्यार्थियों से जिम्मेदारी के साथ नवाचार करने का आग्रह
राधाकृष्णन ने वैश्विक तकनीकी बदलाव और नवाचार की गति पर ध्यान आकर्षित करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवीकरणीय ऊर्जा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने विद्यार्थियों से जिम्मेदारी के साथ नवाचार करने का आग्रह किया और कहा कि प्रौद्योगिकी का उद्देश्य केवल प्रगति नहीं, बल्कि उद्देश्यपूर्ण प्रगति होना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने छात्रों को अनुसंधान, नवाचार और भारत-विशिष्ट समस्या-समाधान में गहराई से उतरने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने युवा नवप्रवर्तकों से टिकाऊ विनिर्माण, स्मार्ट मोबिलिटी, क्वांटम प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा प्रौद्योगिकी, कृषि नवाचार और हरित बुनियादी ढाँचे जैसे क्षेत्रों में शोध करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारत अब प्रौद्योगिकी का केवल उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि वैश्विक समाधान निर्माता बनने की ओर अग्रसर है।
राधाकृष्णन ने डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलों की सराहना की और छात्रों से अपने विचारों को उद्यमों में बदलने का आग्रह किया, जो रोजगार का सृजन करें और राष्ट्रीय विकास में योगदान दें। उन्होंने समकालीन वैश्विक चुनौतियों जैसे जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा खतरे और एआई के नैतिक उपयोग पर ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 की सराहना की और कहा कि यह बहु-विषयक शिक्षा के अवसर प्रदान करती है और भारत की संस्कृति, विरासत और नैतिक मूल्यों में गहराई से निहित है। उन्होंने एनआईटी कुरुक्षेत्र के समग्र शिक्षा पर फोकस और बौद्धिक, भावनात्मक एवं नैतिक विकास को बढ़ावा देने वाले समग्र व्यक्तित्व विकास केंद्र (सीएचपीडी) की प्रशंसा की।
उन्होंने डीआरडीओ और इसरो के सहयोग से संस्थान के योगदान, एआई आधारित युद्ध, अंतरिक्ष मिशनों, कम लागत आधारित अनुसंधान और स्वदेशी तकनीक के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के प्रयासों की भी सराहना की। श्री राधाकृष्णन ने विद्यार्थियों से अनुसंधान को शहरी-ग्रामीण खाई को पाटने, एमएसएमई को सशक्त बनाने, कृषि को आधुनिक बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में योगदान देने के लिए उपयोग करने का आग्रह किया।
इस अवसर पर हरियाणा के राज्यपाल प्रो. आशिम कुमार घोष, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, एनआईटी कुरुक्षेत्र के निदेशक प्रो. बीवी रमना रेड्डी, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की अध्यक्ष डॉ. तेजस्विनी अनंत कुमार और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।



