पटना: बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है, लेकिन अब तक महागठबंधन और NDA में सीट शेयरिंग पर सहमति नहीं बन पाई है। हालांकि राजनीतिक रणनीतिकार से राजनीति में आये प्रशांत किशोर ने अपनी पार्टी की पहली लिस्ट जारी कर दी है। जन सुराज ने पहली लिस्ट में 51 सीटों पर उम्मीदवार उतारा है। आइये जानते हैं पीके की पहली लिस्ट से NDA या INDIA किसे ज्यादा नुकसान हो सकता है-
इन लोगों को उतारा
प्रशांत किशोर ने पहली लिस्ट में भोजपुरी गायक रितेश रंजन पांडे, पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की पोती जागृति ठाकुर, पूर्व आईपीएस अफसर आर के मिश्रा को जगह दी है। इसके अलावा कई डॉक्टर हैं, जिसमें डॉक्टर शशि शेखर सिन्हा (गोपालगंज), अमित कुमार दास (मुजफ्फरपुर), डॉक्टर लाल बाबू प्रसाद (ढाका) और डॉक्टर विजय कुमार गुप्ता (आरा) शामिल हैं।
इन लोगों पर ज्यादा ध्यान
पहली लिस्ट में अति पिछड़े वर्ग से 17, पिछड़े वर्ग से 11 और 9 सीटें अल्पसंख्यंक समुदाय को दी गई है। पहले चरण में 121 सीटों पर चुनाव है, तो इसमें 51 सीट पर उम्मीदवार घोषित कर दिए गए हैं। इस 51 में से 29 सीट ऐसी है, जहाँ जीत-हार का अंतर 16 हजार से कम रहा है। 19 सीटें ऐसी हैं, जहां हार-जीत का अंतर 10 हजार से भी कम रहा है। वहीं 13 सीटें ऐसी हैं, जहां हार-जीत का अंतर 5 हजार से भी कम रहा। वहीं 3 सीट पर हार-जीत का अंतर एक हजार से भी कम रहा।
इन 3 सीटों पर कांटे का मुकाबला-
बेगूसराय की मटिहानी सीट पर चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी के उम्मीदवार को सिर्फ 333 मतों से जीत मिली थी। अनुसूचित जाति आरक्षित गोपालगंज की भोरे सीट से जदयू उम्मीदवार को 462 वोटों के अंतर से जीत मिली थी। खगड़िया के परबत्ता सीट से जदयू उम्मदीवार 951 मतों से अंतर से जीते थे।
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करीबी मुकाबलों वाली 10 सीटें-
10 ऐसी सीटें जिसमें प्राणपुर, सिमरी बख्तियारपुर, महिषी, दरभंगा ग्रामीण, बेगूसराय, खगड़िया, बेलहर, आरा, करगहर और बोधगया थी, जहां हार-जीत अंतर 5 हजार से भी कम रहा। 10 हजार से कम अंतर से जीत वाली 11 सीटों पर भाजपा और जदयू को कड़े मुकाबले के बाद जीत मिली। 51 में से जिन 19 सीटों पर जबरदस्त मुकाबला रहा था, वहां जन सुराज की वजह से NDA को नुकसान पहुंच सकता है।



