बिहार में Liquor smugglers का हमला, जवान की मौत

गोपालगंज में Liquor smugglers ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया, जिसमें होमगार्ड के एम जवान की माैत हो गई। हमले में एक अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हुआ है।

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गोपालगंज: बिहार में शराब माफिया ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था को चुनौती दी है। गोपालगंज में Liquor smugglers ने उत्पाद विभाग की टीम पर जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में होमगार्ड के जवान की मौत हो गई। मृतक की पहचान अभिषेक पाठक के रूप में हुई है। यह दुखद घटना विशम्भरपुर थाना क्षेत्र के सिपाया इंजीनियरिंग कॉलेज के पास शनिवार तड़के हुई। हमले में एक अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हुआ है।

क्या है पूरा मामला

सुबह करीब 4:30 बजे, उत्पाद विभाग को उत्तर प्रदेश से शराब की एक बड़ी खेप आने की गुप्त सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही बलथरी चेकपोस्ट से एक टीम छापेमारी के लिए निकली। टीम ने सिपाया इंजीनियरिंग कॉलेज के पास Liquor smugglers के वाहन का पीछा करना शुरू किया। इसी दौरान, तस्करों ने टीम पर अचानक हमला कर दिया। हमले में होमगार्ड जवान अभिषेक कुमार पाठक गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके सिर पर गहरी चोट लगी, जिससे वह मौके पर ही गिर पड़े। साथी जवानों ने तुरंत उन्हें सदर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जवान की मौत से उनके परिवार में मातम छा गया है, और उत्पाद विभाग के कर्मी भी सदमे में हैं।

पुलिस की कार्रवाई और जांच

हमले के बाद शराब तस्कर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने उनकी तलाश शुरू कर दी है। गोपालगंज के एसपी अवधेश दीक्षित ने इस घटना पर दुख व्यक्त किया है और कहा है कि सभी आरोपियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। यह घटना एक बार फिर बिहार में शराबबंदी कानून (जो 2016 से लागू है) को लागू करने में आ रही चुनौतियों को उजागर करती है। यह दिखाता है कि शराब माफिया का नेटवर्क कितना मजबूत और हिंसक हो चुका है

बिहार में शराबबंदी (2016)

कानून का इतिहास: बिहार में अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है। तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसे लागू किया था।

उद्देश्य: इस कानून का मुख्य उद्देश्य समाज में अपराध कम करना, घरेलू हिंसा पर लगाम लगाना और गरीबों के जीवन स्तर को सुधारना था, क्योंकि शराब पर खर्च होने वाला पैसा अब परिवारों की जरूरतों पर खर्च हो सकेगा।
चुनौतियां: कानून लागू होने के बाद से ही इसे लागू करने में कई तरह की चुनौतियां सामने आईं। शराब की मांग खत्म नहीं हुई, बल्कि इसकी तस्करी और अवैध कारोबार बढ़ गया।

शराब तस्करी और माफिया का उदय

नए रास्ते: शराबबंदी के बाद, माफिया ने शराब की तस्करी के लिए नए-नए रास्ते खोज लिए। बिहार की सीमा से सटे राज्यों, खासकर उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल से अवैध रूप से शराब लाई जाने लगी।
माफिया का नेटवर्क: इस तस्करी को अंजाम देने के लिए एक संगठित शराब माफिया नेटवर्क बन गया। ये लोग न सिर्फ शराब की सप्लाई करते हैं, बल्कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के लिए भी हिंसक तरीके अपनाते हैं।
पुलिस पर हमले: तस्करी रोकने के लिए जब भी पुलिस या उत्पाद विभाग की टीम कार्रवाई करती है, तो उन पर हमले की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। यह घटना उसी कड़ी का हिस्सा है, जहां तस्करों ने टीम पर हमला किया और एक जवान की जान चली गई।

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कानून की प्रभावशीलता पर सवाल

विपक्ष की आलोचना: शराबबंदी कानून को लेकर समय-समय पर इसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठते रहे हैं। विपक्षी दल अक्सर कहते हैं कि यह कानून पूरी तरह से सफल नहीं हुआ है और इससे अवैध कारोबार बढ़ा है।
सरकार की प्रतिक्रिया: सरकार का दावा है कि कानून से समाज में सकारात्मक बदलाव आए हैं, लेकिन अवैध कारोबार को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इस प्रकार, गोपालगंज में हुआ हमला केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह बिहार में शराबबंदी को लागू करने में आ रही चुनौतियों और शराब माफिया के बढ़ते दुस्साहस का एक दुखद उदाहरण है।

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

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