आपका बच्चा गर खेलता हो ऑन लाइन गेम, तो इस खबर पर दें ध्यान

खबर ऑनलाइन गेम खेलने वालों के लिए आंखें खोलने वाली है। अगर आपका बच्चा भी घंटों मोबाइल में लगा रहता है, बहाना भी खेलने का बनाता हो तो इस खबर पर आपको ध्यान देने की जरूरत है।

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भागलपुर: दो बच्चों की कहानी हैरान करने वाली है। उम्र इनकी बमुश्किल 10-11 साल की है। इनको इस कदर गेम की लत लगी कि वह अपना होश खो बैठे। टास्क पूरा करने के लिए वह भागलपुर से करीब 100 किमी दूर पश्चिम बंगाल के फरक्का जा पहुंचे। चौथी के दोनों बच्चों ने स्कूल से निकलने के लिए झूठ बोला। बहाना कापी लाने का बनाया। गनीमत यह रही कि कोई हादसा नहीं हुआ। वक्त रहते पुलिस ने इनको सकुशल परिजनों तक पहुंचा दिया है।

पूरा मामला पीरपैंती स्थित ईशीपुर बाराहाट का है। पीरपैंती हरदेवचक के दो बच्चे 28 जून को स्कूल से गायब हो गए। दोनों ने स्कूल के गेट कीपर से कॉपी लाने का बहाना बनाया। काफी देर तक वापस न लौटने से स्कूल प्रशासन ने बच्चों के परिजनों को इसकी सूचना दी। इसके बाद परिजनों ने पुलिस को इसकी शिकायत दी। हरकत में आई पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर दोनों बच्चों की तस्वीरें सोशल मीडिया व रेलवे स्टेशन पर भेज दीं। रात करीब 1:30 बजे आरपीएफ ने फरक्का में बच्चों की पहचान की और स्थानीय पुलिस को सूचना दी। आखिरकार बच्चों को आरपीएफ की मदद से रविवार देर रात फरक्का से सकुशल बरामद कर लिया गया।

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि दोनों बच्चे ऑनलाइन गेम के एक ‘लीडर’ के निर्देश पर भागलपुर के हनुमान मंदिर के पास किसी से मिलने जा रहे थे। मगर गलती से मालदा-फरक्का पैसेंजर ट्रेन में चढ़ गए और सीधे फरक्का पहुंच गए। दोनों बच्चे फरक्का पहुंचने के बाद खुद के लिए नए कपड़े लिए और वही स्कूल यूनिफॉर्म फेंक दिया फिर गेम टास्क पूरा करने के लिए भटकते रहे।

बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर पर रखें नजर
एसडीपीओ-2 डॉ. अर्जुन कुमार गुप्ता ने बताया कि 28 जून को दो बच्चे ऑनलाइन गेम पूरा करने के लिए स्कूल से निकाले और फरक्का पहुंच गए। परिजनों से शिकायत मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई की गई। पूछताछ में बच्चे के स्कूल बैग से एक मैप बनाया पेज मिला। इसके आधार पर बच्चों की बरामदगी हेतु दो टीमें लगाई गईं। एसआई विकास कुमार के नेतृत्व वाली टीम ने दोनों बच्चों को मालदा टाउन जीआरपी से प्राप्त कर थाना लाये हैं। एसडीपीओ ने कहा कि ये मामला ऑनलाइन गेम की गंभीरता को दर्शाता है। दोनों बच्चों को सोमवार को परिजनों के हवाले कर दिया गया है। यह घटना समाज के लिए एक बड़ा सबक है। बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखना अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।

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