शिक्षा क्रांति या चुनावी दांव? नीतीश सरकार ने फिर खाेला पिटारा!

नीतीश सरकार ने एक बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए शिक्षा विभाग के रात्रि प्रहरियों, शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य के मानदेय को दोगुना करने का ऐलान किया है।

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पटना: नवंबर 2005 में सत्ता में आने के बाद से ही सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार का दावा कर रही है। अब, आगामी चुनावों से ठीक पहले नीतीश सरकार ने एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत रसोइयों, रात्रि प्रहरियों, शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों के मानदेय को दोगुना करने का ऐलान किया है। इस कदम को विपक्ष ने चुनावी लॉलीपॉप करार दिया है। जबकि सत्ताधारी दल इसे शिक्षा सुधार और कर्मचारियों के कल्याण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रहा है।

शिक्षा बजट में भारी वृद्धि का दावा
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि नवम्बर 2005 में सरकार बनने के बाद से ही हमलोग शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए लगातार काम कर रहे हैं। वर्ष 2005 में शिक्षा का कुल बजट 4366 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 77,690 करोड़ रुपये हो गया है। बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति, नए विद्यालय भवनों के निर्माण एवं आधारभूत संरचनाओं के विकास से शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार हुआ है।

मानदेय दोगुना: कितना असर, कितनी सियासत?
शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में रसोइयों, रात्रि प्रहरियों तथा शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसे ध्यान में रखते हुए हम लोगों ने इन कर्मियों की मानदेय राशि में सम्मानजनक वृद्धि करते हुए इसे दोगुना करने का निर्णय लिया है।
शिक्षा विभाग के अंतर्गत मध्याह्न भोजन में कार्यरत रसोइयों के मानदेय में दोगुनी वृद्धि करते हुए 1,650 रूपए से 3,300 रुपये करने का निर्णय लिया गया है। वहीं, माध्यमिक/उच्च शिक्षा विद्यालय में कार्यरत रात्रि प्रहरी का मानदेय 5,000 रुपये से दोगुना करते हुए इसे अब 10,000 रुपये करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों का मानदेय 8,000 रुपये से दोगुना करते हुए अब 16 हजार रूपए करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही इनकी वार्षिक वेतन वृद्धि 200 रुपये के स्थान पर 400 रुपये करने का निर्णय लिया गया है। इससे कार्यरत कर्मियों के मनोबल में वृद्धि होगी और वे अधिक उत्साह एवं लगन से अपने कार्यों का निष्पादन करेंगे।

चुनावी माहौल में कितना असरदार होगा यह फैसला?
राजनीतिक के जानकारों का मानना है कि यह घोषणा ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत लाखों रसोइयों, रात्रि प्रहरियों, और अनुदेशकों के परिवारों को सीधे प्रभावित कर सकती है, जो सत्ताधारी दल के लिए फायदेमंद हो सकता है। खासकर, मध्याह्न भोजन योजना से जुड़े कर्मचारी और स्कूलों में कार्यरत रात्रि प्रहरी ग्रामीण मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा हैं।

चुनावी माहौल में कितना असरदार होगा यह फैसला?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घोषणा ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत लाखों रसोइयों, रात्रि प्रहरियों, और अनुदेशकों के परिवारों को सीधे प्रभावित कर सकती है, जो सत्ताधारी दल के लिए फायदेमंद हो सकता है। खासकर, मध्याह्न भोजन योजना से जुड़े कर्मचारी और स्कूलों में कार्यरत रात्रि प्रहरी ग्रामीण मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा हैं।
चुनावी मौसम में सरकार का यह कदम शिक्षा सुधार की दिशा में एक सकारात्मक पहल हो सकता है, लेकिन इसका समय और संदर्भ इसे सियासी रंग दे रहा है। क्या यह फैसला वास्तव में कर्मचारियों के जीवन में बदलाव लाएगा, या यह केवल वोटों को लुभाने का एक हथियार बनकर रह जाएगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल, यह घोषणा चुनावी मैदान में सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच एक नई जंग का आगाज कर सकता है।

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