नई दिल्ली: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में 5 अगस्त 2025 को धराली गांव (Dharali tragedy) में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन को एक महीना पूरा हो चुका है। इस त्रासदी ने गांव को मलबे के ढेर में बदल दिया, जिसमें कई घर, होटल, दुकानें, और आजीविका के साधन तबाह हो गए। शुक्रवार, 5 सितंबर 2025 को देहरादून में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने स्वीकार किया कि अब धराली में किसी के जीवित मिलने की संभावना नहीं बची है। इस बीच, राज्य सरकार ने केंद्र से मॉनसून से हुए नुकसान और आपदा प्रभावितों की मदद के लिए 5702.15 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मांगी है।
आपदा का दुखद आंकड़ा
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, धराली त्रासदी में अब तक दो शव बरामद किए गए हैं, जिनमें से एक की पहचान नहीं हो पाई है। अज्ञात शव की पहचान के लिए डीएनए जांच की जा रही है। शुरुआती रिपोर्टों में 68 लोग लापता बताए गए थे, लेकिन बाद में पांच लोगों को गलत गणना के कारण सूची से हटाया गया। वर्तमान में 62 लोग लापता हैं, और प्रशासन का मानना है कि मलबे की मोटी परतों के नीचे दबे होने के कारण अब जीवित बचे लोगों की संभावना नगण्य है। सचिव सुमन ने बताया कि 1 अप्रैल से 31 अगस्त 2025 तक मॉनसून से संबंधित आपदाओं में उत्तराखंड में कुल 79 लोगों की मौत हुई, 115 लोग घायल हुए, और 90 लोग लापता हैं। इसके अलावा, 3,953 छोटे-बड़े पशु मारे गए। धराली त्रासदी के बाद बचाव कार्यों को तेज करने के लिए भारी मशीनें अब क्षेत्र में पहुंच चुकी हैं, और मलबे से शवों को निकालने का प्रयास जारी है।
केंद्र से मांगी गई सहायता
गुरुवार को सचिव विनोद कुमार सुमन और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव आरके सुधांशु ने दिल्ली में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह और सचिव मनीष भारद्वाज को एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में मॉनसून से हुए नुकसान, विशेष रूप से सड़कों, पुलों, और अन्य अवसंरचनाओं को हुए क्षति की भरपाई के लिए 5702.15 करोड़ रुपये की मांग की गई। सचिव सुमन ने बताया कि 8 सितंबर 2025 को केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक अंतर-मंत्रालयी टीम उत्तराखंड का दौरा करेगी। यह टीम आपदाओं से हुए नुकसान का स्थलीय आकलन करेगी और केंद्र को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
अप्रत्यक्ष नुकसान और मुआवजा
धराली त्रासदी का प्रभाव केवल प्रत्यक्ष नुकसान तक सीमित नहीं है। भारी बारिश और भूस्खलन के कारण चार धाम यात्रा पर रोक लगने से स्थानीय लोगों की आजीविका पर गहरा असर पड़ा है। होटल, होमस्टे, दुकानें, और खेतों के नष्ट होने से कई परिवार बेसहारा हो गए हैं। सचिव सुमन ने कहा, “हम कोशिश कर रहे हैं कि अप्रत्यक्ष नुकसान, जैसे आजीविका का नुकसान, के लिए भी मुआवजा दिया जाए। इसके लिए केंद्र सरकार से बातचीत चल रही है।” हालांकि, राज्य सरकार के पास अभी अप्रत्यक्ष नुकसान के लिए मुआवजा देने की कोई ठोस योजना नहीं है। यदि केंद्र इस तरह के मुआवजे को मंजूरी देता है, तो यह देश में पहली बार होगा, और भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं के बाद मुआवजे की राशि में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
धराली में अंतिम संस्कार की तैयारी
उत्तरकाशी आपदा प्रबंधन जन मंच के अध्यक्ष द्वारिका प्रसाद सेमवाल ने बताया कि धराली के 10-15 स्थानीय लोग लापता हैं। स्थानीय समुदाय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 45 दिनों तक इंतजार कर रहा है, जिसके बाद लापता लोगों को मृत मानकर उनके अंतिम संस्कार की रस्में पूरी की जाएंगी। सेमवाल ने कहा, “गांव में मलबा इतना गहरा है कि शवों को निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण है। फिर भी, प्रशासन और स्थानीय लोग पूरी कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अब लोग मानसिक रूप से इस हकीकत को स्वीकार कर रहे हैं कि उनके प्रियजन अब नहीं रहे।
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राहत और बचाव कार्यों का हाल
धराली में बचाव कार्यों को शुरूआत में भारी बारिश और क्षतिग्रस्त सड़कों ने बाधित किया था। 25 अगस्त 2025 के बाद आपदा प्रबंधन विभाग ने बचाव कार्यों से संबंधित नियमित अपडेट देना बंद कर दिया था। हालांकि, अब रास्ते खुलने और भारी मशीनों के पहुंचने से मलबा हटाने का काम तेज हो गया है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, और सेना की टीमें दिन-रात राहत कार्यों में जुटी हैं।



