नई दिल्ली: बिहार में विधानसभा चुनाव, और उधर दिल्ली में छठ के बहाने बिहारियों को साधने की कोशिश यह कोई संयोग नहीं, बल्कि भाजपा की पूर्व-नियोजित रणनीति का हिस्सा है। यमुना को स्वच्छ रखने में असफल रही अरविंद केजरीवाल सरकार को संदेश देने के साथ ही भाजपा ने छठ पर्व पर अपनी आस्था दिखाकर बिहार के लोगों से अपनी निकटता का संकेत दिया है।
यह कहा जा सकता है कि भाजपा ने दिल्ली से चुनावी ‘छठ स्पेशल ट्रेन’ चला दी है। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यमुना को स्वच्छ रखना उसकी प्राथमिकता में सबसे ऊपर है। कई वर्षों बाद दिल्ली में यमुना किनारा कार्यक्रमों के योग्य बना है, जिससे बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रवासी समुदाय में खुशी का माहौल है।
बिहार समाज से जुड़ने की कोशिश
भाजपा इस मौके को भुनाने में पीछे नहीं है। हाल ही में बिहार चुनाव प्रचार में पहुंचीं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने भाषणों में यमुना किनारे भव्य छठ पूजा की व्यवस्था कराने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बिहार समाज के लोगों के साथ अपने रिश्ते को जोड़ने की कोशिश करते हुए कहा कि दिल्ली में रहने वाले बिहारियों की हर सुविधा का ध्यान रखा जाएगा।
पचास लाख प्रवासियों पर नजर
एक अनुमान के अनुसार, दिल्ली में करीब 50 लाख बिहारी प्रवासी रहते हैं। जहां आस्था का विषय आता है, वहां एक व्यक्ति के प्रभावित होने पर उसके माध्यम से कई लोग प्रभावित होते हैं। दिल्ली में बड़ी संख्या में मजदूर, रिक्शा चालक, छोटे व्यापारी, नौकरीपेशा लोग और छात्र रहते हैं। ये लोग बिहार चुनाव के समय बड़ी संख्या में मतदान करने अपने गृह जिलों की ओर रवाना होते हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि चुनाव के दौरान इंडियन रेलवे विशेष ट्रेनों का संचालन करती है, जिससे प्रवासी मतदाता अपने गृह नगर जाकर मतदान कर सकें।
ट्रेनों पर विशेष नजर
इस वर्ष सरकार ने छठ पर्व को ध्यान में रखते हुए दिल्ली से बिहार के लिए पहले की तुलना में अधिक ट्रेनों की व्यवस्था की है। साथ ही रेलवे विभाग भीड़ पर लगातार नजर बनाए हुए है। यह भी उल्लेखनीय है कि सीमांचल, कोसी, मिथिला और भोजपुर क्षेत्र के मतदाता सबसे अधिक हैं। यही वजह है कि जब भी बिहार में चुनाव होता है, दिल्ली में भी उसकी राजनीतिक सरगर्मी महसूस की जाती है। विभिन्न सियासी दल यहां रह रहे बिहार के अलग-अलग समुदायों से संपर्क साधते हैं। भाजपा, राजद और जदयू के नेता बिहार के साथ-साथ दिल्ली में भी प्रचार अभियान चलाते हैं।
यह भी पढ़ेंः समस्तीपुर: PM मोदी का प्रहार, बोले – विपक्ष के पास बस ‘छर्रा-कट्टा-दुनाली’
साइलेंट पावर हैं प्रवासी
समाजशास्त्री डॉ. विकास कुमार का कहना है कि किसी भी प्रदेश के प्रवासी “साइलेंट पावर” होते हैं। यदि उनके प्रवास स्थल पर वहां की सरकार बेहतर व्यवस्था करती है, तो वे अपने राज्य लौटकर उसकी चर्चा करते हैं, जिसका प्रभाव मतदाताओं पर पड़ता है। दिल्ली में रहने वाले बिहारी प्रवासी बिहार की राजनीति में एक साइलेंट पावर की तरह काम कर रहे हैं। उनकी संख्या और वोटिंग पैटर्न कई विधानसभा और लोकसभा सीटों का समीकरण बदल सकते हैं।
दिल्ली में दो सौ घाटों पर होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम
यही कारण है कि दिल्ली सरकार इस वर्ष छठ पर्व को दिव्यता और भव्यता के साथ मनाने जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता स्वयं इसकी तैयारियों की निगरानी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि छठ पूजा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि दिल्ली की आस्था और संस्कृति का उत्सव है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्षों से यमुना नदी पर छठ पूजा पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया गया है और अब सरकार श्रद्धालुओं के लिए सभी सुविधाओं के साथ घाटों का निर्माण कर रही है। राजधानी में एक हजार से अधिक छठ घाट बनाए जा रहे हैं, जिनमें यमुना किनारे 17 विशेष और भव्य मॉडल घाट तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा, इस बार लगभग 200 घाटों पर भोजपुरी और मैथिली भाषाओं में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।



