नई दिल्ली। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा गत सप्ताह कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और सपा सहित विभिन्न विपक्षी दलों के कुटिल षड्यंत्र के चलते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार द्वारा लोकसभा में प्रस्तुत नारी शक्ति वंदन अधिनियम तीन चौथाई समर्थन ना जुटा पाने के कारण गिर गया जिसके चलते समाज के हर वर्ग की महिलाओं में रोष व्याप्त है।
वीरेन्द्र सचदेवा के साथ दिल्ली की दो वरिष्ठ शिक्षाविदों रमा शर्मा प्रिंसिपल हंसराज कॉलेज एवं रूबी मिश्रा प्रिंसिपल भगिनी निवेदिता कॉलेज ने सोमवार को संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी एवं समाजवादी पार्टी सहित विपक्षी दलों की नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रति नकारत्मक कुटिलता की निंदा की है और कहा है कि भारत की आधी आबादी इस षड्यंत्र के लिए इन राजनीतिक दलों को कभी माफ नहीं करेगी।
वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि जो कांग्रेस, समाजवादी एवं “आप” जैसे दलों के नेता संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को गिरा कर कुटिल मुस्कान दिखा रहे थे वो यह जान लें कि उनके अपने दलों की महिला कार्यकर्ता भी उनसे रूष्ट हैं और पहली सजा उन्हे वो कार्यकर्ता ही देंगी। उन्होंने कहा कि 50 फीसदी सीटे बढ़ना और उसमें मातृशक्ति को प्रतिनिधिनित्व देना कहा से गलत है। आपका निर्णय तय करता है कि आपका भविष्य क्या होगा और आज विपक्ष ने जो निर्णय लिया है, उससे साबित होता है कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और जिन पार्टी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को रोकने का प्रयास किया है, उनकी पार्टी में महिलाओं का भविष्य अंधकारमय है। दिल्ली भाजपा उपाध्यक्ष योगिता सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस का संचालन किया।
निर्णय में विलम्ब हुआ है लेकिन विपक्ष को मातृशक्ति के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि निर्णय में विलम्ब जरुर हुआ है लेकिन देश में विपक्ष को मातृशक्ति के आक्रोश का अभी और सामना करना पड़ेगा। माननीय गृहमंत्री जी ने साफ तौर पर कहा कि जो भी अमेंडमेंड हो उसको तुरंत दीजिए पास किया जाए लेकिन विपक्ष को सिर्फ इस बिल को गिराना था। उन्होंने कहा कि जिस परिसीमन की आड़ में विपक्ष नारी शक्ति वंदन अधिनियम को गिराया है, यह परिसिमन भी कांग्रेस द्वारा तय किया गया है लेकिन देश की आम घर की महिलाएं कही सशक्त ना बन जाए इस डर से विपक्ष नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल को गिराने का काम किया है।
हंसराज कॉलेज की प्रिंसिपल रमा शर्मा ने कहा कि एक महिला परिवार और समाज के साथ ही राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देती है। कॉलेज में बेटियों की उपस्थिति अधिक हो गई और साथ ही अब तो परिणाम भी बेटियां बेहतर करने लगी है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं के एक सार्थक और सफल प्रयास के बाद जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल लेकर आए तो एक बेटी बढ़ाओं की उम्मीद जगी थी लेकिन विपक्ष ने ऐसा नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि देश में सिर्फ 33 फीसदी की बात पर अगर विपक्ष नहीं तैयार हुआ तो वह 50 फीसदी पर कैसे राजी होगी।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम से लड़कियों को बहुत उम्मीद थी
भगिनी निवेदिता कॉलेज की प्रिंसिपल रूबी मिश्रा ने कहा कि मैं इस समय एक ऐसे क्षेत्र में काम कर रही हूं जो राजधानी में होते हुए भी अभी विकास की दृष्टि से बहुत पीछे है। वहाँ की बेटियाँ आज भी शिक्षा के लिए संघर्ष कर रही हैं। वे अपने घरों से लड़कर पढ़ने आती हैं। हाल ही में जब मैं कॉलेज गई, तो कई छात्राएँ मेरे पास आकर खड़ी हो गईं और एक ही सवाल पूछने लगीं “मैम, ऐसा क्यों हुआ? हमेशा हमारे साथ ऐसा ही क्यों होता है?” ये सवाल सिर्फ एक नीति का नहीं है, बल्कि उनकी उम्मीदों का है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम से इन लड़कियों को बहुत उम्मीद थी। उन्हें राजनीति की जटिलताएँ भले न पता हों, लेकिन यह जरूर समझ आता है कि अगर महिलाओं के लिए संसद में आरक्षण बढ़ेगा, तो उनकी आवाज़ भी मजबूत होगी। वे इस बात से उत्साहित थीं कि अब उन्हें भी बराबरी का प्रतिनिधित्व मिलेगा। मुझे खुद समझ नहीं आ रहा कि इसका विरोध किस आधार पर हो रहा है। अगर कुछ व्यावहारिक समस्याएँ थीं, जैसे परिसीमन, जनसंख्या या लागू करने के तरीके तो उन पर चर्चा करके समाधान निकाला जा सकता था। सभी राजनीतिक दल मिलकर इसे बेहतर बना सकते थे। लेकिन एकदम से इसे रोक देना या टाल देना यह उन लाखों लड़कियों की उम्मीदों को तोड़ने जैसा है, जो पहली बार खुद को इस प्रक्रिया का हिस्सा मान रही थीं।



