नई दिल्ली: बिहार महागठबंधन की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। पहले चरण में ही सीट शेयरिंग को लेकर जबरदस्त खींचातानी देखने को मिल रही। तमाम कोशिशों के बावजूद महागठबंधन में अव्यवस्था और आपसी तालमेल की कमी साफ नजर आ रही है। आइये आपको बताते हैं कुछ सीटों के बारे में, जहां महागठबंधन NDA से लड़ने के बजाय खुद में ही लड़ रहे हैं।
राजेश राम के सामने राजद उम्मीदवार
महागठबंधन में आपसी समझ में कितनी है, इसका अंदाजा आप लगा सकते हैं कि राजद के पूर्व मंत्री सुरेश पासवान ने कुटुंबा सीट पर अपनी दावेदारी पेश कर दी है। जबकि बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम भी इसी सीट से लड़ने जा रहे हैं। दोनों अपने क्षेत्र में वोटरों से समर्थन मांग रहे हैं। अब बात करते हैं वैशाली सीट की–यहां RJD के अजय कुशवाहा और कांग्रेस के संजीव कुमार चुनावी मैदान में उतर चुके हैं। यहां भी गठबंधन का गांठ खुल गया है। तारापुर जो कि हॉट सीट हैं, यहां से राजद ने अरुण शाह को उतारा है और उसके सहयोगी VIP ने सकलदेव सिंह को टिकट दिया है।
गौरा बौराम में आमने-सामने की टक्कर
गौरा बौराम में RJD के अफजल अली के सामने VIP के संतोष सहनी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। लालगंज में बाहुबली मुन्ना शुक्ला की बेटी शिवानी शुक्ला को चुनौती देने के लिए कांग्रेस ने आदित्य राजा को प्रत्याशी बना दिया है। इसी तरह से कहलगांव, राजापाकड़, रोसड़ा, बिहार शरीफ और वारिसलिगंज में भी महागठबंधन के उम्मीदवार एक दूसरे से ही लड़ भिड़ रहे हैं। वारिसलिगंज में राजद की अनीता देवी बनाम कांग्रेस के मंटन सिंह हैं।
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फ्रेंडली फाइट
राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो महागठबंधन के नेता एकता की जो तस्वीर दिखाने की कोशिश कर रहे थे, वो अब दरक चुकी है। “फ्रेंडली फाइट” के नाम पर वास्तव में सीटों की छीना-झपटी हो रही है। इसका सीधा फायदा एनडीए को मिल सकता है।



