नई दिल्ली। उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को लोक निवास में जुलाई के दौरान मनाए जा रहे बाल संरक्षण माह के अंतर्गत चल रहे विभिन्न कार्यक्रमों, अभियानों और सुरक्षा उपायों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। बैठक में बच्चों की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग, दिल्ली पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों का विस्तृत आकलन किया गया और सभी विभागों को तय समयसीमा के भीतर प्रभावी ढंग से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए।
इस समीक्षा बैठक में दिल्ली के मुख्य सचिव, पुलिस आयुक्त, शिक्षा सचिव, महिला एवं बाल विकास सचिव, शिक्षा निदेशालय और महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक, डीसीपी (एसपीयूडब्ल्यूएसी) और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में बताया गया कि उपराज्यपाल की अध्यक्षता में 17 जून 2026 को आयोजित समीक्षा बैठक में जुलाई माह को बाल संरक्षण माह के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया था। उसी के अनुरूप शिक्षा विभाग, दिल्ली पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
दिल्ली के सभी 5,633 स्कूलों में विस्तृत सुरक्षा जांच सूची लागू की जा रही है
उपराज्यापल और मुख्यमंत्री के समक्ष शिक्षा विभाग ने जानकारी दी कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग और पॉक्सो अधिनियम के दिशा-निर्देशों के अनुरूप दिल्ली के सभी 5,633 स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत सुरक्षा जांच सूची (चेक लिस्ट) लागू की जा रही है। इनमें 1,077 दिल्ली सरकार के स्कूल, 198 सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल, 2,612 एमसीडी, एनडीएमसी और दिल्ली छावनी बोर्ड के स्कूल और 1,746 प्राइवेट स्कूल शामिल हैं। विभाग शिक्षकों, स्कूल कर्मचारियों और मुख्य प्रशिक्षकों को पॉक्सो अधिनियम के तहत प्रशिक्षण दे रहा है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की सुरक्षा के लिए भी विशेष व्यवस्था की जा रही है। साथ ही शिक्षा एवं व्यावसायिक मार्गदर्शन परामर्शदाता विद्यार्थियों को सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श, लैंगिक संवेदनशीलता और व्यक्तिगत सीमाओं के प्रति जागरूक कर रहे हैं। स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण भी कराया जा रहा है।
बैठक में दिल्ली पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि स्कूल के बच्चों, लापता बच्चों, पार्कों एवं खेल परिसरों में आने वाले बच्चों, बेघर बच्चों, झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में रहने वाले बच्चों, बाल भवन, अनाथालयों और बाल देखभाल संस्थानों में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके साथ ही स्कूलों में पॉक्सो अधिनियम, विद्यालय सुरक्षा दिशा-निर्देश, साइबर सुरक्षा, बुलिंग, नशे से बचाव और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों से संबंधित जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की प्रभावी निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में एक अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो महिला सुरक्षा एवं बाल सुरक्षा प्रकोष्ठ के पुलिस उपायुक्त को रिपोर्ट करेंगे।
दिल्ली के सभी बाल देखभाल संस्थानों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे
महिला एवं बाल विकास विभाग ने उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के समक्ष पॉक्सो अधिनियम, 2012 के संबंध में व्यापक जन-जागरूकता अभियान की रणनीति प्रस्तुत की। इसके तहत आंगनवाड़ी-सह-पालना केंद्रों, उनसे जुड़े अन्य केंद्रों और दिल्ली के सभी बाल देखभाल संस्थानों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। यह अभियान आंगनवाड़ी एवं पालना केंद्रों के बच्चों, उनके अभिभावकों, बाल देखभाल संस्थानों में रहने वाले बच्चों और समुदाय को केंद्र में रखकर संचालित किया जाएगा। जागरूकता फैलाने के लिए वीडियो, मोबाइल जागरूकता वाहन, मुद्रित प्रचार सामग्री तथा अन्य संचार माध्यमों का उपयोग किया जाएगा।
समीक्षा के दौरान उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सभी कार्यक्रम केवल जुलाई माह तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें सभी संस्थानों की नियमित और स्थायी व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाए। बैठक में यह भी बताया गया कि दिल्ली सरकार के सभी विद्यालयों में पॉक्सो अधिनियम के अनुरूप बाल संरक्षण समितियों का गठन किया जा चुका है। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जुलाई माह के अंत तक दिल्ली के सभी 5,633 विद्यालयों में ऐसी समितियों का गठन सुनिश्चित किया जाए। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि लगभग एक हजार शिक्षा एवं व्यावसायिक मार्गदर्शन परामर्शदाता दिल्ली सरकार के विद्यालयों में बच्चों को सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श, लैंगिक संवेदनशीलता तथा व्यक्तिगत सीमाओं के बारे में जागरूक कर रहे हैं। इस पर निर्देश दिए गए कि राजधानी के प्रत्येक विद्यालय में ऐसे परामर्शदाताओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
सभी विद्यालयों में मुख्य प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण तथा क्षमता निर्माण पूरा किया जाएगा

उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने निर्देश दिए कि जुलाई माह के भीतर सभी विद्यालयों में मुख्य प्रशिक्षकों और अन्य प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण तथा क्षमता निर्माण पूरा किया जाए। विद्यार्थियों की सुरक्षा संबंधी जांच सूची के अनुपालन का प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया जाए। सभी विद्यालयों में पॉक्सो मामलों के निस्तारण के लिए विस्तृत मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) लागू की जाए। अभिभावकों के प्रतिनिधियों, शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, दिल्ली पुलिस और विद्यालय प्रमुखों को शामिल करते हुए संयुक्त निरीक्षण दल गठित कर सभी स्कूलों का निरीक्षण कराया जाए। माता-पिता और बच्चों के लिए अभिभावक-शिक्षक बैठकों (पीटीएम), ऑडियो-विजुअल मीडियम, मुद्रित प्रचार सामग्री और अन्य माध्यमों से व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए। दिल्ली पुलिस पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज प्रत्येक मामले में त्वरित, प्रभावी और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करे। साथ ही पहली बार अपराध करने वाले किशोरों को परामर्श और पुनर्वास का अवसर देकर उन्हें समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक वापस लाने के प्रयास किए जाएं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सभी कार्यक्रमों और गतिविधियों का प्रभावी तथा समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ये प्रयास केवल एक माह तक सीमित न रहकर सभी संस्थानों की नियमित कार्यप्रणाली का हिस्सा बनें ताकि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित और संवेदनशील वातावरण मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी विभागों के बीच प्रभावी समन्वय के साथ प्रत्येक निर्देश का समयबद्ध पालन सुनिश्चित करेगी। सरकार का उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा के लिए ऐसी मजबूत और स्थायी व्यवस्था विकसित करना है, जिससे राजधानी का प्रत्येक बच्चा सुरक्षित, सम्मानजनक और भरोसेमंद वातावरण में आगे बढ़ सके।



