छातापुर विधानसभा: बदलाव, सियासत और विकास की जंग

छातापुर विधानसभा में एक तरफ जीत का सिलसिला बरकरार रखने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ खोई जमीन पाने की जद्दोजहद। आने वाले दिन सियासी रणनीतियों और जनता के मूड का इम्तिहान लेंगे।

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सुपौल:  सुपौल जिले का छातापुर विधानसभा क्षेत्र डेढ़ दशक में बदलाव और सियासी उलटफेर का गवाह रहा है। कभी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित यह सीट वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद सामान्य सीट बनी, और तब से यहां सियासी समीकरणों का रंग बदलता गया। वर्ष 2010 से लगातार जीत की हैट्रिक लगा चुके नीरज कुमार सिंह उर्फ बबलू की भगवा लहर के सामने विपक्ष अपनी खोई जमीन तलाश रहा है। आगामी चुनाव में विकास के वादों और क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर एनडीए और इंडिया महागठबंधन के बीच जोरदार टक्कर की उम्मीद है।

विधानसभा 1967 में अस्तित्व में आई

1967 में अस्तित्व में आई छातापुर सीट पर आरक्षित दौर में समाजवादी धड़े का दबदबा रहा, सिवाय 1972, 1980 और 1985 में कांग्रेस की जीत के। सामान्य सीट बनने के बाद 2010, 2015 और 2020 में नीरज कुमार सिंह ने क्रमशः जदयू और भाजपा के टिकट पर जीत हासिल की। 2010 में उन्होंने राजद के अकील अहमद को 23,730 वोटों से हराकर जीत का परचम पहराया। वर्ष 2015 में नीरज भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरे। उनकी जीत के साथ छातापुर सीट पर भाजपा का खाता खुला। नीरज ने राजद के जहूर आलम को और 2020 में विपिन कुमार सिंह को 20,635 वोटों से हराकर अपनी बादशाहत कायम की। वर्तमान में वह राज्य सरकार में पीएचईडी मंत्री हैं।

अब तक हुए 15 चुनावों (उपचुनाव सहित) में राजद, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, जनता दल, जदयू और भाजपा ने दो-दो बार, जनता पार्टी ने एक बार और कांग्रेस ने तीन बार जीत दर्ज की। पिछले तीन चुनावों में राजद ने अलग-अलग प्रत्याशियों के साथ एनडीए को चुनौती दी, लेकिन कामयाबी नहीं मिली।

आगामी चुनाव में सियासी सरगर्मी चरम पर है। एनडीए के नीरज सिंह ने 320 करोड़ की लागत से सभी वार्डों में सरफेस वाटर प्लांट लगाने की घोषणा कर विकास का दांव खेला है, जिससे आयरनमुक्त पानी उपलब्ध होगा।

समस्याओं को लेकर एनडीए को घेरने को कोशिश

राजद क्षेत्रीय समस्याओं को उठाकर एनडीए को घेरने में जुटा है। हाल ही में सिमराही में राजद की सभा में तेजस्वी यादव समेत कई नेता पहुंचे। जनसुराज भी सक्रिय है और प्रशांत किशोर ने महदीपुर मेला मैदान में सभा कर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। छातापुर में एक तरफ जीत का सिलसिला बरकरार रखने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ खोई जमीन पाने की जद्दोजहद। आने वाले दिन सियासी रणनीतियों और जनता के मूड का इम्तिहान लेंगे।

छातापुर की अर्थव्यवस्था कृषि पर आश्रित

किसानों को अक्सर खादबीज और सिंचाई की समस्या का सामना करना पड़ता है। सुरसर नदी की बाढ़ की मार किसानों को झेलनी पड़ती है। इसी विधानसभा क्षेत्र के बलुआ बाजार में पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र का पैतृक गांव और उनका समाधि स्थल है। यहां हर साल तीन जनवरी को उनकी पुण्यतिथि पर राजकीय समारोह का आयोजन होता है।

पांच साल में दिखा बदलाव

वीरपुर में रजिस्ट्री ऑफिस और केंद्रीय विद्यालय खुला। छोटी-बड़ी करीब 100 से ज्यादा सड़कों का निर्माण।  पंचायत स्तर पर स्वास्थ्य केंद्रों में दवा और इलाज की सुविधा बढ़ी। बाढ़ का प्रभाव रोकने को लेकर परियोजना पर काम शुरू। कुछ क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा बढ़ी।

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सर्वाधिक पांच बार जीते कुम्भ नारायण

छातापुर से सर्वाधिक 5 बार जीतने का रिकॉर्ड कुम्भ नारायण सरदार के नाम है। 1967 व 1969 में संसोपा से जीते। 1977 में हार गए। 1972, 1980 और 1985 में कांग्रेस के विधायक रहे। 1990 में वह हारे।

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

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