कर्नाटक में SC आरक्षण में बदलाव

कर्नाटक सरकार ने अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण नीति में बदलाव किया है। राज्य में SC समुदाय के कुल आरक्षण को तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा।

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बैंगलोर: कर्नाटक सरकार ने अनुसूचित जातियों (SC) के आरक्षण में एक ऐतिहासिक बदलाव करते हुए इसे तीन श्रेणियों में बांटने का फैसला किया है। यह कदम हरियाणा की तर्ज पर ‘कोटे में कोटा’ लागू करने जैसा है। इस निर्णय का उद्देश्य SC समुदायों के भीतर लंबे समय से चली आ रही असमानता को दूर करना है। यह निर्णय वर्षों पुरानी सामाजिक मांगों और असमानता को दूर करने के उद्देश्य से लिया गया है, जिसके तहत सबसे पिछड़े समुदायों को आरक्षण का उचित लाभ मिल पाएगा। इस फैसले से राज्य में दशकों से चले आ रहे सामाजिक आंदोलनों को एक नई दिशा मिली है।

क्या है नया फॉर्मूला

नए फॉर्मूले के तहत, अनुसूचित जातियों के लिए निर्धारित कुल 17 प्रतिशत आरक्षण को तीन भागों में विभाजित किया गया है।
SC लेफ्ट (मदिगा समुदाय): 6 प्रतिशत आरक्षण, SC राइट (होलेया समुदाय): 6 प्रतिशत आरक्षण और अन्य उप-जातियां: 5 प्रतिशत आरक्षण है। इसमें लंबानी, भोवी, कोरमा, और कोरचा जैसी जातियां शामिल हैं।
यह निर्णय जस्टिस एच. एन. नागमोहन दास आयोग की सिफारिशों पर आधारित है। हालांकि, सरकार ने आयोग द्वारा सुझाई गई कुछ श्रेणियों में बदलाव किया है।

इस बदलाव की ज़रूरत क्यों पड़ी?

कर्नाटक में अनुसूचित जातियों की कुल 101 उप-जातियां हैं। इनमें से मदिगा (SC लेफ्ट) समुदाय का लंबे समय से तर्क रहा है कि उन्हें मौजूदा आरक्षण का पर्याप्त लाभ नहीं मिल पा रहा है। उनका मानना है कि अधिकांश लाभ होलेया (SC राइट) और अन्य ‘स्पृश्य’ जातियों को मिल रहा है, जिससे वे सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े रह गए हैं।
यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के 1 अगस्त 2024 के उस फैसले के बाद संभव हुआ है, जिसमें राज्यों को अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण करने का अधिकार दिया गया था।

आयोग की रिपोर्ट और सरकार का फैसला

जस्टिस नागमोहन दास आयोग ने मई से जुलाई 2025 तक एक व्यापक सर्वेक्षण किया था, जिसमें 1.16 करोड़ SC आबादी में से 93% को शामिल किया गया। आयोग ने 4 अगस्त को अपनी 1,766 पृष्ठों की रिपोर्ट मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को सौंपी। मंत्रिमंडल ने इस रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए इसमें कुछ संशोधन किए।

आयोग की सिफारिशें

  • SC लेफ्ट: 6%
  • SC राइट: 5%
  • स्पृश्य जातियां (लंबानी, भोवी आदि): 4%
  • खानाबदोश समुदाय (आदि कर्नाटक, आदि द्रविड़ आदि): 1%

मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकार किया गया फॉर्मूला:

  • SC लेफ्ट: 6%
  • SC राइट: 6%
  • अन्य (स्पृश्य जातियां और खानाबदोश): 5%
  • सरकार ने आयोग की सिफारिशों से थोड़ा हटकर खानाबदोश समुदायों के लिए अलग से 1% आरक्षण को हटाकर उन्हें ‘अन्य’ श्रेणी में शामिल कर दिया है।

फैसले का विरोध और प्रतिक्रियाएं

इस फैसले का कुछ समुदायों ने विरोध भी किया है। लंबानी और भोवी जैसे ‘स्पृश्य’ समुदायों का कहना है कि उनके लिए 5% आरक्षण पर्याप्त नहीं है और वे इसे बढ़ाकर 6% करने की मांग कर रहे हैं। वहीं, खानाबदोश समुदायों ने अलग 1% आरक्षण हटाने पर अपनी नाराजगी जताई है।
कैबिनेट की बैठक के बाद विधि एवं संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल और पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री शिवराज तंगदागी ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया है। उनका कहना है कि यह निर्णय सभी SC समुदायों के लिए न्याय सुनिश्चित करेगा।

दशकों पुरानी मांग

अंदरूनी असमानता: कर्नाटक में अनुसूचित जातियों में 101 उप-जातियां शामिल हैं। इनमें से मदिगा (SC लेफ्ट) और होलेया (SC राइट) प्रमुख समूह हैं। मदिगा समुदाय का लंबे समय से यह आरोप रहा है कि मौजूदा आरक्षण प्रणाली का लाभ मुख्य रूप से होलेया और अन्य ‘स्पृश्य’ (अछूत नहीं मानी जाने वाली) जातियों को मिलता है, जिससे वे सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े रह गए हैं।
सामाजिक आंदोलन: मदिगा समुदाय ने इस असमानता को दूर करने के लिए कई दशकों से राज्यव्यापी आंदोलन चलाए हैं। उनका मानना है कि जब तक आरक्षण को उप-जातियों के बीच विभाजित नहीं किया जाएगा, तब तक उन्हें उनका उचित हिस्सा नहीं मिल पाएगा।

राजनीतिक और सामाजिक परिणाम

राजनीतिक सहमति: कर्नाटक सरकार ने इस फैसले को “ऐतिहासिक” बताया है और दावा किया है कि इस पर सभी SC समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले मंत्रियों की सहमति थी।
हरियाणा का मॉडल: कर्नाटक का यह कदम हरियाणा द्वारा पहले से ही लागू किए गए ‘कोटे में कोटा’ मॉडल के समान है, जहाँ SC/ST के 20% आरक्षण को दो हिस्सों में बांटा गया है। यह दिखाता है कि यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर देश के अन्य राज्य भी विचार कर रहे हैं।
यह निर्णय दशकों की मांगों, एक विस्तृत सर्वेक्षण और एक निर्णायक कानूनी फैसले का परिणाम है, जिसका उद्देश्य SC समुदायों के भीतर सामाजिक न्याय को बेहतर ढंग से सुनिश्चित करना है।

Usha Mehta

ushamehta0013@gmail.com

NewG India का सबसे युवा चेहरा, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद IGNOU और ABP न्यूज़ नेटवर्क जैसे संस्थानों में इंटर्नशिप की। सोशल और कॉमर्स विषयों की गहरी समझ हैं कलम के साथ आवाज में भी धार हैं। NewG India में बतौर कंटेंट डेवलपर व एंकर अपनी जिम्मेदारी उषा मेहता बखूबी निभा रही हैं ।

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