आयोध्या। राम नगरी अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले ने शुक्रवार को नया मोड़ ले लिया। इस प्रकरण की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर गुरुवार को आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद शुक्रवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। दिल्ली में राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने दोनों के इस्तीफों की पुष्टि की।
एफआईआर की गई दर्ज
राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले में दर्ज एफआईआर में ट्रस्ट महासचिव चंपत राय के चालक टिन्नू यादव समेत आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। करीब 18 दिनों बाद ट्रस्ट की ओर से इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई। योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा गठित एसआईटी की प्रारंभिक जांच में दान और चढ़ावे के प्रबंधन, हिसाब-किताब तथा निगरानी में कथित अनियमितताओं की बात सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई।
एसआईटी की सिफारिशों के आधार पर दर्ज की गई इस एफआईआर की शिकायत श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने कराई है। उन्हें पूर्व ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद सितंबर 2025 में ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया था।
चंपत राय ने दिया इस्तीफा
इस घटनाक्रम के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कुछ लोगों का कहना है कि जब तक चंपत राय अपने पद पर बने रहते, तब तक जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठते रहते। उनका तर्क है कि यदि कोई पदाधिकारी जांच के दायरे में आए विवाद के दौरान स्वयं पद छोड़ देता है, तो इससे जांच की निष्पक्षता पर जनता का विश्वास मजबूत होता है।
इसी संदर्भ में कुछ लोग पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी द्वारा जैन हवाला कांड के दौरान नैतिक आधार पर दिए गए इस्तीफे का उदाहरण भी दे रहे हैं। हालांकि, यह एक सार्वजनिक और राजनीतिक राय है। किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।



