वैशाली: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट 6 साल के लंबे इंतजार के बाद पूरा हो गया। मुख्यमंत्री ने करोड़ों रुपये की लागत से वैशाली में बने बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय को राष्ट्र को समर्पित कर दिया। इसके साथ ही यह आम लोगों के लिए भी खोल दिया गया है। इसके साथ ही वैशाली की तरक्की को चार चांद लगेगा। इस संग्रहालय में यहां खुदाई के दौरान मिले भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष को आमजन के दर्शनार्थ रखा गया है। बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय सह बुद्ध स्मृति स्तूप के बन जाने के बाद वैशाली में बौद्ध भिक्षुओं के साथ-साथ बड़ी संख्या में देश दुनिया के पर्यटक यहां आएंगे। बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय में महात्मा बुद्ध के जीवन से संबंधित घटनाओं और बौद्ध धर्म से जुड़े प्रसंगों को यहां दर्शाया गया है। पूरी तरह पत्थरों से निर्मित यह स्तूप वंशी पहाड़पुर (राजस्थान) से लाए गए 42,373 बलुआ पत्थरों से टंग एंड ग्रूव तकनीक के माध्यम से जोड़ा गया है। यह संरचना आधुनिक भूकंपरोधी तकनीकों से सुसज्जित है।
15 देशों से आए बौद्ध भिक्षु
कार्यक्रम में चीन, जापान, श्रीलंका, थाईलैंड, नेपाल, तिब्बत, म्यांमार, भूटान, वियतनाम, मलेशिया, लाओस, कंबोडिया, मंगोलिया, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे 15 बौद्ध देशों के भिक्षु भी उपस्थित थे। जिन्होंने विधिवत पूजा अर्चना की। जिसके बाद सीएम ने मुख्य स्तूप सहित पूरे परिसर का मुआयना भी किया। सीएम के साथ उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा, विजेन्द्र प्रसाद यादव, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, विधायक सिद्धार्थ पटेल, अवधेश सिंह के अलावा कई देशों से यहां पहुंचे बौद्ध धर्मावलंबी मौजूद रहे।

भगवान बुद्ध का अस्थि कलश स्थापित
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि ‘बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय सह स्मृति स्तूप’ के प्रथम तल पर भगवान बुद्ध का पावन अस्थि कलश स्थापित किया गया है जो स्मारक का प्रमुख केंद्र बिंदु है। भगवान बुद्ध का अस्थि अवशेष 6 जगहों से प्राप्त हुआ जिसमें वैशाली के मड स्तूप से जो अस्थि अवशेष मिले वह सबसे प्रामाणिक है जिसका जिक्र चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी अपनी पुस्तक में किया है। कुमार ने कहा कि वैशाली ऐतिहासिक और पौराणिक भूमि है, जिसने दुनिया को पहला गणतंत्र दिया। यह नारी सशक्तीकरण की भी भूमि रही है। बौद्ध धर्मावलंबियों के संघ में पहली बार यहां महिलाओं को शामिल किया गया। यह स्तूप बिहार की सांस्कृतिक धरोहर और वैश्विक बौद्ध विरासत का भव्य प्रतीक है। करीब 72 एकड़ भूमि पर निर्मित इस भव्य स्तूप का निर्माण राजस्थान के गुलाबी पत्थरों से किया गया है और इस स्तूप का निर्माण में 550.48 करोड़ रुपये की लागत से भवन निर्माण विभाग द्वारा कराया गया है।
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