कोलकाता। भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई ने मंगलवार को सॉल्टलेक स्थित पार्टी कार्यालय में पत्रकार वार्ता कर राज्य सरकार पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और आदिवासी समाज के प्रति असम्मानजनक व्यवहार का आरोप लगाया। इस दौरान भाजपा नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस सरकार की तीखी आलोचना की और कई राजनीतिक व प्रशासनिक मुद्दे उठाए।
राष्ट्रपति और आदिवासी समाज के अपमान का आरोप
पत्रकार वार्ता की शुरुआत में भाजपा के मुख्य प्रवक्ता देवजीत सरकार ने कहा कि हाल की घटनाओं में आदिवासी समाज और देश की राष्ट्रपति के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह निंदनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि नवम संताल सम्मेलन जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम का स्थल बदला जाना और राष्ट्रपति के प्रति कथित असम्मानजनक व्यवहार आदिवासी समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है। उन्होंने यह भी कहा कि तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं और मंत्रियों द्वारा पहले भी राष्ट्रपति को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई हैं, जिससे राज्य के लोगों में आक्रोश है।
मुख्यमंत्री के बयान और व्यवहार पर सवाल
भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष तपस रॉय ने कहा कि एक संवैधानिक पद पर रहते हुए मुख्यमंत्री की हालिया टिप्पणियां और व्यवहार चिंताजनक हैं। उनके अनुसार बंगाल अपनी अतिथि-नवाज़ी और सांस्कृतिक परंपराओं के लिए जाना जाता है, लेकिन हाल की घटनाओं से उसकी प्रतिष्ठा पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब देश की राष्ट्रपति राज्य का दौरा करती हैं, तो उनके प्रति सम्मान दिखाना राज्य सरकार की जिम्मेदारी होती है।
संवैधानिक संस्थाओं पर टिप्पणियों का आरोप
तपस रॉय ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के नेताओं की ओर से संवैधानिक संस्थाओं और प्रमुख व्यक्तित्वों के खिलाफ बार-बार असम्मानजनक टिप्पणियां की जाती रही हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के खिलाफ भी इसी प्रकार की भाषा का इस्तेमाल किया गया है।
चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए सवाल
पत्रकार वार्ता में मतदाता सूची संशोधन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए। भाजपा नेताओं का आरोप है कि इन प्रक्रियाओं में सत्तारूढ़ दल का प्रभाव दिखाई देता है, जिससे आम मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति बनती है।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह सटीक मतदाता सूची तैयार करे और राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष तथा शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करे।
चुनाव आयोग को सौंपा 18 सूत्रीय मांगपत्र
भाजपा ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग के समक्ष 18 सूत्रीय मांगपत्र भी प्रस्तुत किया है। इसमें राज्य में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न कदम उठाने की मांग की गई है।
रोजगार और प्रशासनिक पारदर्शिता पर जोर
राज्य की राजनीतिक स्थिति पर बोलते हुए भाजपा नेताओं ने कहा कि बंगाल में लंबे समय से हिंसा, भ्रष्टाचार और नियुक्तियों में अनियमितताओं के आरोप सामने आते रहे हैं। उनका कहना है कि योग्य उम्मीदवारों को नौकरी नहीं मिलने से युवाओं में निराशा बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार बनने पर प्रशासनिक पारदर्शिता, रोजगार सृजन, सातवें वेतन आयोग को लागू करने और रिक्त पदों पर पारदर्शी नियुक्ति सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने के लिए बेहतर माहौल बनाने की बात भी कही।
आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों पर चर्चा
पत्रकार वार्ता में आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की गई। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में कुछ नियुक्तियां फर्जी एसटी प्रमाणपत्रों के आधार पर की गई हैं, जिससे वास्तविक आदिवासी युवाओं के अधिकार प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने संदेशनखाली जैसी घटनाओं का भी उल्लेख किया और कहा कि ऐसी घटनाओं से राज्य के लोगों में चिंता बढ़ी है।
आदिवासी मुद्दों पर पंपलेट जारी
भाजपा की ओर से आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों पर दो पृष्ठ का एक पंपलेट भी जारी किया गया। इसमें आदिवासी समाज के विकास, उनके अधिकारों और संबंधित आंकड़ों की जानकारी दी गई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह जानकारी सरकारी दस्तावेजों, न्यायालय के अभिलेखों और विभिन्न समाचार रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। भाजपा ने कहा कि आने वाले दिनों में इस विषय को लेकर राज्य के विभिन्न हिस्सों में अभियान चलाया जाएगा।
सीमावर्ती क्षेत्रों और घुसपैठ का मुद्दा भी उठा
पत्रकारों के सवालों के जवाब में भाजपा नेताओं ने राज्य की वर्तमान राजनीतिक स्थिति, चुनाव आयोग की भूमिका और सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ गंभीर विषय हैं और इस संबंध में केंद्रीय एजेंसियां निगरानी बढ़ा चुकी हैं।



