पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से ठीक पहले एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के चिराग पासवान और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के जीतन राम मांझी की नाराजगी के बाद अब राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। शनिवार सुबह उनके फेसबुक पोस्ट ने राजनीतिक हलकों में हड़कंप मचा दिया, जिसमें उन्होंने मीडिया में चल रही खबरों को ‘छल’ और ‘धोखा’ करार दिया।

‘इंतजार कीजिए, सजग रहिए’
उपेंद्र कुशवाहा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ‘इधर-उधर की खबरों पर मत जाइए। वार्ता अभी पूरी नहीं हुई है। इंतजार कीजिए…! मीडिया में जो खबर चल रही है, मुझे नहीं पता। अगर कोई खबर प्लांट कर रहा है तो यह छल है, धोखा है। आप लोग ऐसे ही सजग रहिए।’ कुशवाहा के पोस्ट से साफ जाहिर हो रहा है कि एनडीए के सहयोगियों के बीच अभी खींचतान चल रही है। कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि दिल्ली में भाजपा नेतृत्व के साथ उनकी बैठक होनी है, जहां सीट बंटवारे पर अंतिम चर्चा होगी।
कुशवाहा की सीटें बदली गईं!
सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि कुशवाहा ने बाजपट्टी, शेखपुरा, उजियारपुर, दिनारा, सासाराम, मधुबनी और ओबरा जैसी सीटों की मांग की थी। हालांकि, एनडीए के प्रस्तावित फॉर्मूले में इनमें से कुछ सीटें बदल दी गई हैं, जिससे वे असंतुष्ट हैं। हालांकि, बिहार बीजेपी प्रमुख दिलीप जायसवाल ने शुक्रवार को दावा किया था कि सीटों का बंटवारा तय हो गया है और शनिवार-रविवार को उम्मीदवारों की घोषणा किए जाने की संभावना है।
एनडीए में खींचतान के संकेत
एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर पहले ही तनाव चरम पर था। चिराग पासवान मटिहानी और गोविंदगंज सीटों पर अड़े हुए थे, जबकि जीतन राम मांझी सात सीटों से कम मिलने पर नाराज थे। मांझी ने शनिवार को दिल्ली रवाना होते समय कहा था कि वे ‘अनुशासित’ रहेंगे, लेकिन कुशवाहा का यह खुला बयान गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है। सूत्र बता रहे हैं कि भाजपा और जेडीयू मिलकर 200 से अधिक सीटों पर लड़ेंगे, जबकि सहयोगी दलों को 40-42 सीटें दी जा सकती हैं। इस बीच कुशवाहा का कहना है कि यह फॉर्मूला अभी ‘अधूरा’ है। वे दिल्ली में प्रदेश प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान और विनोद तावड़े से मुलाकात करेंगे, जहां इन मुद्दों पर फैसला होगा।
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महागठबंधन की ओर नजरें?
कुशवाहा की नाराजगी ने विपक्षी महागठबंधन को भी मौका दे दिया है। आरजेडी और कांग्रेस ने पहले ही अपनी सीट शेयरिंग पर सहमति जता दी है। एनडीए नेतृत्व पर अब दबाव है कि कुशवाहा को जल्द मनाया जाए, वरना बिहार में ‘खेला’ हो सकता है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर कुशवाहा जैसे सहयोगी अलग-थलग पड़े, तो एनडीए के जीत की सीढ़ी चढ़ पाना थोड़ा मुश्किल हो जाएगी।



