पटना: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव आयोग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। आयोग ने बिहार सरकार के मुख्य सचिव एवं बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर से पिछले तीन वर्ष से अधिक समय से एक ही स्थान पर तैनात अधिकारियों के तबादले का आदेश दिया है। आयोग ने यह भी कहा है कि चुनाव कार्य से जुड़ा कोई अधिकारी अपने गृह जिला में तैनात नहीं रहेगा। कोई अधिकारी अपने गृह जिला में पदस्थापित है, तो वैसे अधिकारियों का तत्काल स्थानांतरण सुनिश्चित कराएं। साथ ही इसकी विस्तृत रिपोर्ट आयोग मुहैया कराएं। इससे साफ है कि विधानसभा चुनाव की आधिकारिक घोषणा अक्टूबर के पहले सप्ताह के बाद कभी भी हो सकती है। मुख्य चुनाव आयुक्त के नेतृत्व में चुनाव आयोग की टीम भी जल्द ही बिहार दौरे पर आ सकती है।
गृह जिले में पोस्टिंग पर रोक
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) विनोद सिंह गुंजियाल ने सभी विभागों के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, अपर मुख्य सचिव, विकास आयुक्त, प्रधान सचिव, सचिव और विभागाध्यक्षों को पत्र लिखकर साफ निर्देश दिया है कि चुनाव से सीधे जुड़े किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की पोस्टिंग उसके गृह जिले में नहीं होगी। 30 नवंबर तक या उससे पहले जिनका कार्यकाल तीन साल या उससे अधिक हो रहा है, उनका तबादला अनिवार्य रूप से किया जाएगा।
किन-किन पर लागू होंगे निर्देश!
जिलों में तैनात प्रखंड विकास पदाधिकारी, तहसीलदार, अपर समाहर्ता सहित चुनाव से जुड़े सभी अधिकारी–कर्मचारी, प्रमंडलीय आयुक्त, नगर आयुक्त और जिलों में तैनात इंस्पेक्टर स्तर तक के पुलिस अधिकारी, पुलिस विभाग के ADG और IG स्तर के अधिकारी भी इस दायरे में आएंगे। हालांकि, कंप्यूटराइजेशन, स्पेशल ब्रांच और ट्रेनिंग से जुड़े पुलिस कर्मियों पर यह निर्देश लागू नहीं होगा।
पहले भी जारी हो चुके हैं दिशा-निर्देश
चुनाव आयोग पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कर्मियों का लंबे समय तक एक ही स्थान पर बने रहना उचित नहीं है। यही वजह है कि इस बार तबादले और पदस्थापन की प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया जा रहा है। आयोग के सख्त रुख से यह तय है कि बिहार में चुनावी प्रक्रिया की घोषणा अब ज्यादा देर तक टलने वाली नहीं है। 6 अक्टूबर के बाद किसी भी दिन चुनावी बिगुल बज सकता है।



