पटना: बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 में NDA और महागठबंधन के बीच सीट शेयरिंग को लेकर लुढ़कते मौसमी मिज़ाज के बीच सियासी पारा चरम पर है. इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह क्षेत्र हरनौत विधानसभा से 84 वर्ष की उम्र में 58 वर्षों का लंबा राजनीतिक अनुभव प्राप्त किए विधायक हरि नारायण सिंह ने मंगलवार को 10वीं बार फिर चुनावी मैदान में ताल ठोक दिए हैं.
चुनाव लड़ने से किया था इंकार
उन्होंने हजारों समर्थकों, सांसद कौशलेंद्र कुमार और पार्टी के अन्य नेताओं के साथ समाहरणालय पहुंचकर अपना नामांकन पत्र दाखिल किया. इसके बाद उन्होंने कहा कि अपनी बढ़ती उम्र (84 वर्ष) के कारण चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे, और इसकी घोषणा भी कर चुके थे, लेकिन पार्टी और नेता (नीतीश कुमार) के आदेश के आगे उन्हें झुकना पड़ा है. उन्होंने कहा, “यह बात सही है, मैंने बयान दिया था कि मेरी उम्र 84 साल हो गई है, मैं थक गया हूँ और 2025 का चुनाव नहीं लडूंगा. मुझे पूरी उम्मीद थी कि इस बार रिटायरमेंट मिल जाएगा. लेकिन जब पार्टी के नेता ने आदेश जारी कर दिया, तो जनता के दबाव और नेता के आदेश का पालन करना ही पड़ा है.”
सीट शेयरिंग पर क्या बोले
एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर चल रही खींचतान की खबरों पर उन्होंने विराम लगाते हुए कहा कि सीटों का बंटवारा तय हो गया है. उन्होंने बताया, “जदयू और भाजपा 101-101 सीटों पर, लोजपा (रामविलास) 29, हम 6 और रालोसपा 6 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.” उन्होंने माना कि कुछ सीटों पर थोड़ी-बहुत खींचतान है, जो जल्द ही सुलझा ली जाएगी. हरि नारायण सिंह ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि एनडीए गठबंधन ने यह तय कर लिया है कि 2025 के चुनाव के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही होंगे.
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गिनाईं उपलब्धियां
इस दौरान उन्होंने नीतीश कुमार के 20 वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि उन्होंने बिना किसी जाति-धर्म का भेदभाव किए हर गांव-टोले तक सड़क, बिजली और विकास पहुंचाया है. इस नामांकन के साथ ही हरनौत विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है. हरि नारायण सिंह, जो छह बार चंडी और तीन बार हरनौत से विधायक रह चुके हैं, एक बार फिर अपने नेता नीतीश कुमार के काम और अपने लंबे राजनीतिक अनुभव के दम पर जनता के बीच हैं।



