नई दिल्ली:भारतीय ग्रीको-रोमन पहलवान विश्वजीत मोरे (Vishwajeet More) ने अपने दमदार प्रदर्शन से भारत का नाम रोशन किया है। उन्होंने अंडर-23 कुश्ती विश्व चैंपियनशिप (Wrestling World Championship) में 55 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया। मोरे ने कांस्य पदक के मुकाबले में कजाकिस्तान के येरासिल ममायरबेकोव को रोमांचक अंदाज में 5-4 से मात दी। यह जीत मोरे के करियर की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है।
रेपचेज राउंड में किया कमाल
कांस्य पदक तक पहुंचने की राह में मोरे ने जॉर्जिया के जियोर्जी कोचालिड्जे को रेपचेज राउंड में तकनीकी श्रेष्ठता (9-1) से हराकर वापसी की। यह मुकाबला मोरे की रणनीति और ताकत का बेहतरीन उदाहरण रहा। शुरुआती राउंड में झटका झेलने के बावजूद उन्होंने शानदार वापसी करते हुए पदक हासिल किया।
महिला पहलवानों का संघर्ष जारी
भारत की तीन महिला पहलवानों — हन्नी कुमारी (50 किग्रा), दीक्षा मलिक (72 किग्रा) और प्रिया मलिक (76 किग्रा) — को अपने-अपने मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा। हन्नी कुमारी को यूडब्ल्यूडब्ल्यू ध्वज तले खेल रही स्वियातलाना कटेंका ने एक कड़े मुकाबले में पिन मूव से पराजित किया, जब स्कोर 4-6 था। दीक्षा मलिक क्वालीफिकेशन राउंड में चीन की युकी लियू से 3-9 से हार गईं। हालांकि लियू बाद में हार गईं, जिससे दीक्षा के लिए रेपचेज का रास्ता बंद हो गया। वहीं प्रिया मलिक को अमेरिका की काइली रेनी वेल्कर ने तकनीकी श्रेष्ठता (10-0) से हराया। यदि वेल्कर सेमीफाइनल में जीत दर्ज करती हैं, तो प्रिया को रेपचेज में वापसी का मौका मिल सकता है।
पुरुष पहलवानों में मिला-जुला प्रदर्शन
भारत के पुरुष ग्रीको-रोमन पहलवानों में कुणाल (60 किग्रा) ने दमदार शुरुआत की थी। उन्होंने पहले दौर में सर्बिया के रोलैंड वर्गा को तकनीकी श्रेष्ठता (8-0) से हराया, लेकिन क्वार्टर फाइनल में इजराइल के मेलकामु फेटेने से 2-4 से हारकर बाहर हो गए। वहीं प्रिंस (82 किग्रा) को अपने पहले ही मुकाबले में उज्बेकिस्तान के समंदर बोबोनाजारोव ने पराजित कर दिया।
भारत के लिए उम्मीद की किरण बने मोरे
जहां एक ओर महिला और अन्य पुरुष पहलवानों के अभियान में निराशा देखने को मिली, वहीं विश्वजीत मोरे ने अपने साहस और अनुभव से भारत को गौरवान्वित किया। उनकी यह जीत न सिर्फ भारत के पदक तालिका में एक नया नाम जोड़ती है, बल्कि देश के युवा पहलवानों को प्रेरित भी करती है।
अंडर-23 कुश्ती विश्व चैंपियनशिप (U23 Wrestling) में भारत के प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। जहाँ एक ओर विश्वजीत मोरे ने कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा, वहीं कई भारतीय पहलवान शुरुआती राउंड से आगे नहीं बढ़ सके। अब सबकी निगाहें आने वाले मुकाबलों पर हैं, जहां भारत के बाकी खिलाड़ी भी पदक की उम्मीदें जगाने को तैयार हैं।



