नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया दौरे पर मिली करारी हार के बाद भारतीय टेस्ट क्रिकेट में बदलाव की आहट सुनाई दे रही थी, और अब वो पूरी तरह सामने आ चुकी है। भारत के दो बड़े क्रिकेट सितारे—विराट कोहली और रोहित शर्मा—के बल्ले वहां खामोश रहे, और इसके बाद उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। इस फैसले के बाद इंग्लैंड दौरे के लिए पूरी तरह युवा चेहरों पर भरोसा जताया गया है। पांच मैचों की इस प्रतिष्ठित श्रृंखला की शुरुआत हो चुकी है और इस बार कई अनोखे संयोग सामने आए हैं।
अब ‘पटौदी ट्रॉफी’ नहीं, ‘एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी’
जहां पहले भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जाने वाली टेस्ट श्रृंखला ‘पटौदी ट्रॉफी’ के नाम से जानी जाती थी, वहीं इस बार बीसीसीआई और इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने इसका नाम बदल दिया है। अब इस प्रतियोगिता को महान क्रिकेटर्स जेम्स एंडरसन और सचिन तेंदुलकर के नाम पर ‘एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी’ कहा जाएगा। हालांकि, विजेता खिलाड़ियों को पहले की तरह ‘पटौदी मेडल’ ही प्रदान किए जाएंगे।
शुभमन गिल को सौंपी गई जिम्मेदारी
रोहित शर्मा के टेस्ट से हटने के बाद टीम की कमान युवा बल्लेबाज शुभमन गिल को दी गई है। गिल को भारत का 37वां टेस्ट कप्तान नियुक्त किया गया है। हालांकि, उनके पास टेस्ट फॉर्मेट में कप्तानी का कोई अनुभव नहीं था, लेकिन उन्होंने टी20 अंतरराष्ट्रीय और आईपीएल में पहले कप्तानी की भूमिका निभा रखी है।
गिल की नई भूमिका, नया स्थान
कोहली के जाने के बाद मिडिल ऑर्डर में नंबर चार की पोजीशन खाली हो गई थी, जिसे लेकर काफी चर्चा थी। आमतौर पर गिल ओपनर या तीसरे नंबर पर खेलते आए हैं, लेकिन इस बार उन्हें चौथे स्थान पर मौका दिया गया। पहली बार इस पोजीशन पर खेलते हुए उन्होंने अपने प्रदर्शन से सबको प्रभावित किया। 227 गेंदों में 147 रनों की बेहतरीन पारी खेली, हालांकि बड़ा शॉट लगाने की कोशिश में वह आउट हो गए।
इस सीरीज ने साफ कर दिया है कि भारतीय टेस्ट टीम अब एक नई दिशा की ओर बढ़ चुकी है। सीनियर खिलाड़ियों के संन्यास और युवा खिलाड़ियों की अगुआई में टीम नए इतिहास की नींव रख रही है। कप्तानी से लेकर ट्रॉफी के नाम तक—हर बदलाव भारतीय क्रिकेट के भविष्य की ओर इशारा कर रहा है।



