दिल्ली पुलिस की कांस्टेबल ने गर्भावस्था के दौरान उठाया 145 किलो वजन

दिल्ली पुलिस की सिपाही सोनिका यादव ने सात माह की गर्भावस्था में भी वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर कांस्य पदक जीता, साबित किया कि महिला शक्ति किसी भी चुनौती से बड़ी है।

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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की सिपाही सोनिका यादव (Sonika Yadav) ने यह साबित कर दिया है कि महिला शक्ति के आगे कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। सात महीने की गर्भवती (Pregnant Weightlifter) होने के बावजूद उन्होंने वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता (Powerlifting Championship) में भाग लेकर कांस्य पदक जीता और पूरे देश की महिलाओं के लिए नई मिसाल पेश की।

ऑल इंडिया पुलिस वेटलिफ्टिंग क्लस्टर में दिखाई ताकत

आंध्र प्रदेश में 13 से 17 अक्टूबर तक आयोजित ऑल इंडिया पुलिस वेटलिफ्टिंग क्लस्टर 2025-26 में जब सोनिका मंच पर उतरीं, तो किसी ने नहीं सोचा था कि वह गर्भवती हैं। लेकिन जब उन्होंने 125 किलो स्क्वाट्स, 80 किलो बेंच प्रेस और 145 किलो डेडलिफ्ट पूरा किया, तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। यह प्रदर्शन किसी भी एथलीट के लिए गर्व की बात थी, और जब लोगों को पता चला कि वह सात महीने की गर्भवती हैं, तो सभी उनके जज़्बे को सलाम करने लगे।

जुनून और समर्पण से मिली सफलता

सोनिका की यह सफलता वर्षों की मेहनत और खेल के प्रति उनकी निष्ठा का नतीजा है। 2014 बैच की कांस्टेबल सोनिका का पुलिसिंग करियर मजनूं का टीला से शुरू हुआ था, जहां उन्होंने नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान में अहम भूमिका निभाई। वर्तमान में वह कम्युनिटी पुलिसिंग सेल में तैनात हैं।

उनके पति अंकुर बाना ने बताया कि जब मई में सोनिका को अपनी गर्भावस्था का पता चला, तो परिवार ने सोचा कि शायद अब उन्हें खेल से विराम लेना पड़ेगा। लेकिन सोनिका ने साफ कहा कि “रुकना नहीं है, बस सुरक्षित रहना है।” उन्होंने डॉक्टरों की सलाह और सुरक्षा नियमों के तहत ट्रेनिंग जारी रखी।

कबड्डी से पावरलिफ्टिंग तक का सफर

सोनिका का खेल जीवन कबड्डी से शुरू हुआ था। धीरे-धीरे जिम में उनकी दिलचस्पी बढ़ी और वजन उठाने का जुनून उन्हें पावरलिफ्टिंग तक ले आया। 2023 में उन्होंने दिल्ली स्टेट पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपने करियर को नई दिशा दी।

गर्भावस्था के दौरान भी सोनिका ने प्रेरक कहानियां पढ़ीं और अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर लूसी मार्टिंस से प्रेरणा ली, जिन्होंने मातृत्व के साथ खेल को संतुलित किया था। सोनिका ने कहा, “गर्भावस्था कमजोरी नहीं, बल्कि नई शक्ति का जन्म है।

महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं सोनिका

सोनिका की कहानी उन महिलाओं के लिए संदेश है जो मातृत्व और करियर के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में हैं। उन्होंने यह साबित किया कि अगर इरादा मजबूत हो, तो परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, सफलता संभव है।

आज सोनिका यादव न सिर्फ दिल्ली पुलिस बल्कि पूरे देश के लिए महिला सशक्तिकरण की प्रतीक बन चुकी हैं। उनका कहना है कि वह आगे भी अपने सपनों को पूरा करेंगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए यह संदेश देंगी कि “शक्ति हमारे भीतर ही है, बस उसे पहचानने की जरूरत है।”

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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