जम्मू: जम्मू क्षेत्र में भारी वर्षा, भूस्खलन और बाढ़ जैसी अभूतपूर्व प्राकृतिक आपदा ने जहां जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया, वहीं उत्तर रेलवे के जम्मू मण्डल ने अपनी दृढ़ता, समन्वित कार्रवाई और निःस्वार्थ सेवा के बल पर इस संकट का डटकर मुकाबला किया। हजारों फंसे हुए यात्रियों, विशेष रूप से माता वैष्णो देवी के तीर्थयात्रियों, को सुरक्षित निकालने और राहत कार्यों में उत्तर रेलवे ने इंसानियत और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल कायम की है।
चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में राहत कार्यों की शुरुआत
आपदा के शुरुआती दिनों में रेल यातायात ठप हो गया था, प्रमुख राजमार्ग अवरुद्ध थे और बिजली व संचार सेवाएं प्रभावित थीं। इन विषम परिस्थितियों में जम्मू मण्डल के कर्मचारियों ने अपने आराम को त्यागकर जनसेवा को प्राथमिकता दी। जम्मू तवी, श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा और पठानकोट रेलवे स्टेशनों पर राजकीय रेल पुलिस और जिला प्रशासन के सहयोग से हेल्प-डेस्क स्थापित किए गए। ये हेल्प-डेस्क यात्रियों के लिए सूचना केंद्र होने के साथ-साथ उनके लिए भोजन, पानी और अस्थायी आवास की व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे।

कर्मचारियों की मेहनत और समन्वित प्रयास
रेल कर्मचारियों ने दिन-रात मेहनत कर विशेष रेलगाड़ियों का संचालन सुनिश्चित किया, जिससे हजारों यात्रियों को उनके गंतव्यों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सका। गैर-सरकारी संगठनों और सिविल संगठनों के सहयोग से राहत सामग्री का वितरण किया गया। उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक और जम्मू मण्डल के मण्डल रेल प्रबंधक ने जमीनी स्तर पर राहत कार्यों की निगरानी की और कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाया। कर्मचारियों के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए, जिससे उनके कार्य में और तेजी आई।
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एकजुटता और करुणा की मिसाल
यह संकट न केवल एक प्राकृतिक आपदा था, बल्कि मानवीय एकजुटता और सहयोग का भी प्रतीक बना। जम्मू मण्डल ने न केवल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि अपने कर्मचारियों की भलाई को भी प्राथमिकता दी। यह प्रयास एक समुदाय के एकजुट होने और विपरीत परिस्थितियों में भी सेवा की भावना को जीवंत रखने की कहानी है।
जम्मू मण्डल का यह कार्य हमें सिखाता है कि कठिनाइयों के बीच भी करुणा, समर्पण और साझा उद्देश्य से किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है। उत्तर रेलवे ने न केवल रेल सेवाओं को बहाल किया, बल्कि मानवता के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को भी सिद्ध किया।



