गयाजी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रवार को बिहार के गयाजी जिले का दौरा सियासी रूप से बेहद अहम है। एनडीए की मगध की 26 विधानसभा सीटों पर नजरें टिकी हैं, जहां एनडीए को बीते चुनावों में मुंह की खानी पड़ी थी। 13 हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगत और गयाजी की धरती से गूंजने वाला पीएम का संदेश न सिर्फ कार्यकर्ताओं में जोश भर रहा है, बल्कि विपक्ष के लिए भी खतरे की घंटी बजा रहा है। क्या पीएम का यह दौरा मगध में एनडीए को खोई सियासी जमीन वापस दिला पाएगा, या विपक्ष की जवाबी रणनीति इसे नाकाम कर देगी!
विकास परियोजनाएं
प्रधानमंत्री मगध विश्विवद्यालय में एक जनसभा को संबोधित करने के दौरान बिहार और पश्चिम बंगाल के लिए विकास की कई सौगात दी। इनमें मुख्य रूप से एशिया के सबसे चौड़े पुल (बिहार का पहला छह लेन वाला पुल), नई ट्रेन, बिजली, स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी और जनकल्याण से जुड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इनमें दो अमृत भारत ट्रेन, (दिल्ली-गया और बिहार-झारखंड) को झंडी दिखाकर रवाना किया। पीएम का यह दौरा पटना, गया और बेगूसराय तक फैला हुआ है लेकिन फोकस मगध क्षेत्र पर है। यह कदम विपक्षी नेता राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की मतदाता अधिकार यात्रा के जवाब में देखा जा रहा है, जो एनडीए के पक्ष में सकारात्मक राजनीतिक माहौल बनाने का प्रयास है।
मगध क्षेत्र की राजनीतक समीक्षा
मगध संभाग जो औररंगाबाद, गया, जहानाबाद, अरवल और नवादा जिलों को मिलाकर बनता है, बिहार की राजनीति में महत्वर्पूण भूमिता निभाता है। यहां कुल 26 विधानसभा सीटें है जो चार लोकसभा क्षेत्रों में फैली हैं। एनडीए के लिए यह क्षेत्र हमेश चुनौतीपूर्ण रहा है।
पिछले चुनाव में एनडीए को यहां 6 सीटें मिलीं थी
वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए को यहां मात्र 6 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था जबकि महागठबंधन को 20 सीटें मिली थी। इससे पहले के विस चुनाव में भी एनडीए को यहां सिर्फ 5 सीटें पर ही जीत मिली थी। तब महागठबंधन ने यहां की 21 सीटों पर कब्जा जमाया था। हालांकि 2010 में जेडीयू-भाजपा गठबंधन ने यहां 24 सीटें जीतकर अपना दबदबा बनाया था। 2020 में जेडीयू को मगध की किसी भी सीट पर जीत नहीं मिली थी, जबिक हम (एस) ने 10 में से 3 सीटें जीतीं। हम के संस्थापक जीतन राम मांझी इमामगंज से जीते थे लेकिन मखदुमपुर से हार गए थे। 2024 के लोकसभा चुनावों में भी एनडीए का प्रदर्शन यहां कमजोर रहा। अब पीएम मोदी का गया जी का दौरा एनडीए कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार करने और विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने का माध्यम बनेगा।
कमजोर किले को मजबूत करने की कोशिश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा भाजपा के कमजोर किले को मजबूत करने की रणनित का हिस्सा है जहां जीतन राम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा और चिराग पासवान जैसे सहयोगियों के साथ साझेदारी की जा रही है। कुल मिलाकर, पीएम का यह दौरा मगध की राजनीत को एनडीए के पक्ष में मोड़ सकता है। खासकर विकास परियोजनाओं के जरिए मतदाताओं को आकर्षित करके।
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प्रभावित होने वाली सीटें 6
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से मगध की 26 सीटों पर सियासी असर पड़ने की उम्मीद है, जहां एनडीए अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेगा। गोह, ओबरा, नवीनगर, कुटुम्बा (एससी), औरंगाबाद, रफीगंज, गुरुआ, शेरघाटी, इमामगंज (एससी), बाराचट्टी (एससी), बोध गया (एससी), गया टाऊन, टिकारी, बेलागंज, अत्री, वजीरगंज, जहानाबाद, घोसी, मखदुमपुर (एससी), अरवल, कुर्था, राजौली (एससी), हिसुआ, नवादा, गोबिंदपुर और वारसलीगंज। ये सीटें मगध संभाग की राजनीतिक दिशा तय करती हैं और पीएम का दौरा यहां एनडीए को नई ताकत दे सकता है। हालांकि, विपक्ष भी इसे अपने खिलाफ साजिश बाताकर जवाबी हमला कर सकता है। कुल मिलाकर प्रधानमंत्री का यह दौरा बिहार चुनाव की दिशा बदलने वाला साबित हो सकता है।



