नई दिल्ली: भारत एशियाई शेरों का घर है। इसमें भी गुजरात के गिर वन में शेरों की आबादी को 2015 में लगभग 523 से बढ़ाकर 2020 में लगभग 674 तक पहुंच गई। नई रिपोर्ट में संख्या 891 पाई गई है। 2020 की तुलना में यह 32.2 फीसदी ज्यादा है। गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल की X पोस्ट का साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात सरकार की कोशिशों की तारीफ की है। इसे काफी उत्साहवर्धक माना जा रहा है। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे प्रोजेक्ट लायन की कामयाबी के तौर पर पेश किया है।
असल में, प्रोजेक्ट लायन का मकसद दीर्घकालिक संरक्षण प्रयासों से एशियाई शेरों के भविष्य को सुरक्षित करना है। प्रोजेक्ट के तहत इस तरफ का परिवेश तैयार किया जाता है, जहां शेर पल-बढ़ सकें। इस पहल के प्रमुख घटकों में आवास सुधार, रेडियो-कॉलरिंग और कैमरा ट्रैप जैसी उन्नत तकनीकों से निगरानी होती है। साथ में मानव-वन्यजीव संघर्ष भी खत्म होता है।
गुजरात सरकार के अनुसार, गुजरात वन विभाग इनके संरक्षण प्रयासों में खास भूमिका निभाता है। शेरों की संख्या और स्वास्थ्य की निगरानी के लिए नियमित रूप से उनकी जनगणना होती है। वहीं, आग प्रबंधन, बाढ़ की तैयारी और निरंतर वन्यजीव निगरानी जैसे तरीके अपनाए जाते हैं। इसमें यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि शेरों के पास सुरक्षित आवास हों और किसी भी आपात स्थिति का तुरंत समाधान किया जाए।
शेरों के संरक्षण का प्रभाव
शेर अपनी शिकार करने की क्षमता से पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। शाकाहारी जानवरों की आबादी को नियंत्रित करके वह जंगलों और घास के मैदानों के स्वास्थ्य और पुनर्जनन को सुनिश्चित करते हैं। यह संतुलन जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण है।
वैसे, भारत में शेरों का संरक्षण सांस्कृतिक और पारिस्थितिक रूप से खास है। राष्ट्रीय प्रतीक का एक अभिन्न अंग होने के अलावा शेर शक्ति और ताकत का भी प्रतीक है। यह प्रतीक सभी भारतीय मुद्रा और आधिकारिक दस्तावेजों पर दिखाई देता है, जो भारतीय विरासत में शेर के महत्व को रेखांकित करता है।
इन तरीकों से भी होता एशियाई शेरों का संरक्षण
ग्रेटर गिर अवधारणा: इसमें पारंपरिक गिर राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य से परे शेरों के लिए अतिरिक्त उपयुक्त आवास विकसित किया जाता है। संरक्षित क्षेत्र के नेटवर्क का विस्तार करने के लिए गिरनार, पनिया और मिटियाला जैसे अभयारण्यों को अधिसूचित किया गया है।
आवास सुधार उपाय: इसमें अतिरिक्त जल बिंदुओं की स्थापना और रखरखाव शामिल है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि शेरों की आवश्यक संसाधन तक पहुंच प्राप्त हो।
सुदृढ़ संरक्षण तंत्र: राज्य स्तर पर वन्यजीव अपराध प्रकोष्ठ और ग्रेटर गिर क्षेत्र के लिए एक टास्क फोर्स का गठन, अवैध शिकार और अन्य खतरों के खिलाफ सुरक्षा को बढ़ाता है।
सुरक्षा संवर्धन: जंगली जानवरों की आकस्मिक मृत्यु को रोकने के लिए खुले कुओं को पैरापेट दीवारों से ढका जा रहा है। वहीं, बेहतर खुफिया प्रणालियां संरक्षण प्रयासों में मददगार होती हैं।
इस तरह से बढ़ती गई शावकों की संख्या
गुजरात सरकार के अधिकारियों के अनुसार, 2001 में शेरों की संख्या 327 थी। इसमें इजाफा हुआ और बढ़कर 2005 में 359 हो गई। इसके बाद 2010 में यह संख्या 411 पर पहुंची। फिर, 2015 में 523 हुई। 2020 में 674 तक हो गई थी। 2020 में प्रोजेक्ट लायन लांच किया गया इसके तहत शेरों की संख्या में आशातीत वृद्धि देखने को मिली है। नई गणना में 2025 के शुरू में ही यह संख्या बढ़कर 891 हो गई है।
प्रधानमंत्री ने की तारीफ
एशियाई शेर गणना रिपोर्ट पर गुजरात के सीएम ने बुधवार, 22 मई को एक्स पर लिखा कि गुजरात में शेरों की संख्या 891 हो गई है। भारत की शान सामान एशियाई शेरों का एकमात्र प्राकृतिक आवास गुजरात है। पीएम के मार्गदर्शन में ढाई दशक में गुजरात में शेरों सहित वन्यजीवों के संरक्षण व संवर्धन के कई प्रयास किये गए हैं। शेरों की अनुमानित संख्या, जो वर्ष 2020 में 674 थी, वह 5 सालों में बढ़कर 891 हो गई है। शेर अब गुजरात के 58 तालुका व 11 जिलों में पाए जाते हैं।
बहुत उत्साहित करने वाली जानकारी! यह देखकर बेहद खुशी हो रही है कि ‘प्रोजेक्ट लॉयन’ के तहत किए जा रहे प्रयासों से गुजरात में शेरों को अनुकूल माहौल मिलने के साथ ही उनका संरक्षण भी सुनिश्चित हो रहा है। https://t.co/YFUVBKVtF3
— Narendra Modi (@narendramodi) May 21, 2025
इस पोस्ट का साझा करते हुए पीएम ने लिखा कि यह देखकर खुशी हो रही है कि प्रोजेक्ट लॉयन के तहत किए जा रहे प्रयासों से गुजरात में शेरों को अनुकूल माहौल मिला है। साथ ही उनका संरक्षण भी सुनिश्चित हो रहा है। यह प्रयास गुजरात में शेरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ उन्हें अनुकूल वातावरण भी प्रदान कर रहे हैं।
मुझे यह बताते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि गुजरात में शेरों की आबादी बढ़कर 891 हो चुकी है।
— Bhupendra Patel (@Bhupendrapbjp) May 21, 2025
भारत की शान सामान एशियाई शेरों का एकमात्र प्राकृतिक आवास गुजरात है।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @NarendraModi जी के मार्गदर्शन में पिछले ढाई दशक में गुजरात में शेर सहित वन्यजीवों के… pic.twitter.com/16B3Fk2KPt



