नई दिल्ली: कृषि क्षेत्र में वैश्विक बदलावों का असर भारत पर भी पड़ रहा है। लेबनान सरकार ने हाल ही में एक बड़ा कदम उठाते हुए ऑक्सामिल नामक जहरीले तत्व वाले कीटनाशकों के इस्तेमाल पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है। यह खबर भारत के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने एक आधिकारिक सर्कुलर के जरिए देशभर के किसानों, कंपनियों और व्यापारियों तक पहुंचाई है। लेबनान के दूतावास ने इसकी जानकारी साझा की, जो 22 सितंबर को वहां जारी हुए रिजॉल्यूशन नंबर 516/1 पर आधारित है। मंत्रालय के मुताबिक, यह प्रतिबंध लोगों की सेहत, पर्यावरण की रक्षा और लंबे समय तक चलने वाली खेती-बाड़ी को मजबूत बनाने के मकसद से लिया गया है। ऑक्सामिल एक ऐसा केमिकल है, जो कार्बामेट परिवार का हिस्सा है और इसके गंभीर नुकसान कई मुल्कों में चर्चा का विषय बना हुआ है। जानवरों से लेकर इंसानों तक पर इसके बुरे असर की वजह से दुनियाभर में सतर्कता बरती जा रही है।
क्या कहता है लेबनान का नया नियम?
लेबनान के कृषि विभाग ने साफ कर दिया है कि अब ऑक्सामिल युक्त कोई भी कीटनाशक वहां रजिस्टर नहीं होगा। साथ ही, इनके आयात पर भी फौरन रोक लग गई है। हां, कुछ अपवाद हैं। अगर कोई खेप पहले से ही रवाना हो चुकी हो या बैंक से लेटर ऑफ क्रेडिट जारी हो चुका हो, तो प्रमाण-पत्र दिखाकर छूट मिल सकती है। जो कंपनियां पहले से लाइसेंस्ड हैं, वे अपने स्टॉक को सिर्फ एक्सपायरी डेट तक ही बेच पाएंगी। उसके बाद दो महीने के अंदर खत्म हुई मात्रा का हिसाब प्लांट प्रोटेक्शन डिपार्टमेंट को देना होगा। बाकी बचा सामान? उसकी डिटेल्स तुरंत जमा करनी पड़ेंगी। यह सब सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी होगी।
भारत पर क्या असर?
भारत सरकार ने इसकी सूचना केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड (CIB&RC) के जरिए सभी रजिस्टर्ड फर्म्स, ट्रेड बॉडीज और स्टेकहोल्डर्स तक पहुंचा दी है। मकसद साफ है कि निर्यात करने वाले व्यापारी इन बदलावों से वाकिफ रहें, खासकर उन देशों के साथ जहां हमारा एग्रीकेमिकल बिजनेस जुड़ा है। लेबनान जैसी कार्रवाई वैश्विक स्तर पर हानिकारक पेस्टिसाइड्स के खिलाफ बढ़ती सख्ती का संकेत देती है। फिलहाल, भारत की पब्लिक लिस्ट में ऑक्सामिल को रजिस्टर्ड कीटनाशकों में जगह नहीं दिख रही। लेकिन सरकार ने अपनी पॉलिसी पर कोई नया बयान इस नोटिस में नहीं दिया। क्या भारत भी ऐसे केमिकल्स पर नजर रखेगा? यह सवाल किसानों और इंडस्ट्री में गूंज रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न सिर्फ लेबनान बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट में सस्टेनेबल फार्मिंग को बढ़ावा देगा। भारत जैसे कृषि-प्रधान देश के लिए यह एक सबक है। नए बाजारों में घुसने से पहले रेगुलेटरी अपडेट्स पर नजर रखना जरूरी। क्या आपके पास भी कोई एक्सपोर्ट कनेक्शन है? तो सतर्क रहें, क्योंकि ऐसे बदलाव रातोंरात आ सकते हैं।



