नई दिल्ली: विकसित भारत@2047 के विजन के अनुरूप मत्स्य पालन क्षेत्र में उत्पादन, उत्पादकता और निर्यात संवर्धन बढ़ाने के लिए चुनौतियों और सुधारों पर एक बैठक में मंथन हुआ। मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्य पालन विभाग (एमओएफएएचडी) के लिए सामाजिक, कल्याण और सुरक्षा क्षेत्रों पर अनौपचारिक मंत्री समूह (आईजीओएम) के अंतर्गत आज हाइब्रिड मोड में एक हितधारक परामर्श बैठक की गई। मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए आईजीओएम के चार स्तंभों (विधायी, नीतिगत, संस्थागत और प्रक्रियागत सुधार) पर सुझाव आमंत्रित करना था। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री एमओएफएएचडी और पंचायती राज राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने वर्चुअल माध्यम से की। मत्स्य पालन विभाग के सचिव अभिलक्ष लिखी ने परामर्श और फीडबैक सत्र का संचालन किया।
मत्स्य उत्पादकता बढ़ाने की अपील
राजीव रंजन सिंह ने कहा कि मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए उत्पादन, उत्पादकता और निर्यात को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने पर केंद्रित सुधार रोडमैप तैयार करने में मदद के लिए हितधारकों के सुझाव आवश्यक थे। केंद्रीय मंत्री ने देश के समुद्री खाद्य निर्यात पोर्टफोलियो में विविधता लाने और उसे मजबूत बनाने के लिए अंतर्देशीय राज्यों की अप्रयुक्त निर्यात क्षमता को अनलॉक करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने मत्स्य उत्पादकता को पांच टन प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर सात टन प्रति हेक्टेयर करने की अपील की।
आठ करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका जुड़ी है
उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन क्षेत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से देश में आठ करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका का साधन है। आईजीओएम का गठन चार प्रमुख स्तंभों विधायी, नीतिगत, संस्थागत और प्रक्रियागत सुधारों पर आधारित एक व्यापक सुधार रोडमैप विकसित करने के स्पष्ट अधिदेश के साथ किया गया है। उन्होंने कहा कि ये स्तंभ एक लचीले, समावेशी और निर्यातोन्मुखी मत्स्य पालन इकोसिस्टम के निर्माण का मार्गदर्शन करेंगे। मत्स्य विभाग के संयुक्त सचिव सागर मेहरा ने कहा कि आईजीओएम क्षेत्रीय आकलन के माध्यम से सुधारों को आगे बढ़ाएगा ताकि वैश्विक बेंचमार्किंग में आने वाली समस्याओं, चुनौतियों और क्षमता निर्माण में वर्त्तमान कमियों की पहचान की जा सके। अपनी प्रस्तुति में उन्होंने समुद्री और अंतर्देशीय जलीय कृषि के विस्तार जीआई टैगिंग के साथ उच्च मूल्य वाली प्रजातियों को बढ़ावा देने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और पीपीपी मॉडल के माध्यम से अधिक निजी निवेश को रेखांकित किया।
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बैठक की अहम बातें
राज्य-स्तरीय रणनीतियों को पीएमएमएसवाई, पीएम-एमकेएसएसवाई योजना और ब्लू इकोनॉमी पहल के साथ संरेखित करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। विभिन्न हितधारकों ने क्वारंटाइन केंद्रों के विकास, मूल्य संवर्धन के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग, प्रसंस्करण क्षमताओं में वृद्धि, एकल खिड़की मंजूरी की आवश्यकता, बढ़ी हुई ट्रेसेबिलिटी, एक समान भूमि पट्टे नीति/बिजली दरों की आवश्यकता, मजबूत बुनियादी ढांचे, आधुनिक बाजारों और परिवहन सुविधाओं के साथ कोल्ड स्टोरेज की स्थापना, गुणवत्ता वाले बीजों के लिए बीज बैंकों का विकास, किसानों के लिए ऋण की बेहतर पहुंच जैसे मुद्दों पर अपने बहुमूल्य इनपुट दिए। मूल्य संवर्धन के लिए केंद्रित प्रशिक्षण संस्थान किसान उत्पादकता बढ़ाने में मदद करेंगे और देश भर में निर्यात सुविधा काउंटरों की स्थापना से निर्यात में सुविधा होगी। चर्चा में उत्कृष्टता के क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने, उभरती नौकरी भूमिकाओं के लिए क्षमता निर्माण मॉड्यूल विकसित करने, खारे जलीय कृषि का विस्तार करने, इको-लेबलिंग को बढ़ावा देने और बाजार लचीलापन बढ़ाने के लिए उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के निर्यात में विविधता लाकर ब्रांड इंडिया को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।



