पटना: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में गुरुवार को छिटपुट घटनाओं के बावजूद शांतिपूर्ण मतदान संपन्न हो गया। पिछले27 वर्षों बाद सबसे अधिक 64.69% मतदाताओं अपने मताधिकार का प्रयोग किया। भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, यह वर्ष 1952 के बाद का सर्वाधिक मतदान प्रतिशत है, जो 2020 विधानसभा (57.29%) और 2024 लोकसभा चुनाव (56.28%) से क्रमशः सात और आठ प्रतिशत अधिक है। सबसे कम मतदान कुम्हरार (39.57%), बांकीपुर (40.97%) और दीघा (41.4%) में हुआ। ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाताओं में उत्साह तो शहरी इलाकों के मतदाताओं में उदासीनता देखन बरकरार रही। प्रमुख रही। 18 जिलों की 121 सीटों पर 1314 उम्मीदवारों का भाग्य ईवीएम में कैद हो गया, जिसमें लखीसराय जैसे क्षेत्रों में पक्ष-विपक्ष की हल्की झड़पें भी दर्ज हुईं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल ने संवाददाता सम्मेलन में बताया आयोग के आंकड़ों से तुलना करें तो 1998 लोकसभा चुनाव में 64.66% और 2000 विधानसभा चुनाव में 62.57% मतदान हुआ था। इस बार का आंकड़ा इन दोनों को पीछे छोड़ता है। गुंजियाल ने कहा, “यह मतदाताओं की परिपक्वता और चुनाव प्रक्रिया में विश्वास का प्रमाण है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के कारण कहीं कोई बड़ी अनहोनी नहीं हुई। लखीसराय में उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा (भाजपा) और राजद एमएलसी अजय सिंह के बीच हल्की नोकझोंक हुई, लेकिन प्रशासन ने तुरंत स्थिति संभाल ली। हलसी प्रखंड के खुरिहारी बूथ पर पोलिंग एजेंट को लेकर विवाद उठा, पर मतदान प्रभावित नहीं हुआ।
ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत 70 के पार पहुंचा
ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत 70 के पार पहुंचा, जहां महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही। कई बूथों पर पहली बार वोट डालने वाले युवाओं ने सेल्फी पॉइंट्स पर उत्सव मनाया। आयोग ने विशेष रूप से दिव्यांग और वरिष्ठ मतदाताओं के लिए व्हीलचेयर व पिक-एंड-ड्रॉप सुविधाएं सुनिश्चित कीं, जिससे उनकी सहभागिता बढ़ी। ईवीएम और वीवीपैट की पारदर्शिता ने भी विश्वास जगाया।यह मतदान केवल आंकड़ों की जीत नहीं, बल्कि बिहार के बदलते चेहरे का संकेत है। जहां एक ओर शहरी मतदाता व्यस्तता के नाम पर पीछे रहे, वहीं गांवों ने साबित किया कि लोकतंत्र की जड़ें अभी भी मजबूत हैं। दूसरे चरण की तैयारियां जोरों पर हैं, और यह रिकॉर्ड नई उम्मीद जगाता है कि बिहार पूरे चुनाव में नया कीर्तिमान स्थापित करेगा।



