‘घुड़चढ़ी’ नहीं, यहां होती ‘नावचढ़ी’.. बाढ़ में बंधी शादी की डोर

गंगा नदी में बाढ़ से भागलपुर में बारात नाव पर निकालनी पड़ी। किसी तरह लड़के वाले दुल्हन के घर पहुंचे और शादी की रस्म के बाद दुल्हन को नाव पर ही लेकर वापस आए।

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भागलपुर: जब नदियां किनारों को लांघने लगती हैं, खेत-खलिहान समुंदर बन जाते हैं, तब जिंदगी नाव पर सवार हो जाती है। बिहार में बाढ़ कोई नई बात नहीं, बल्कि हर साल लौट आने वाली एक कड़वी सच्चाई है। इसी सच्चाई ने लोगों को जीने का नया तरीका सिखा दिया है। शादी हो या अंतिम संस्कार, प्रसव हो या स्कूल जाना हर रास्ता तब पानी के रास्ते तय होता है। सड़कें जब डूब जाती हैं, तब नावे ही सहारा बनती है। ऐसा ही एक मामला भागलपुर में सामने आया है, जहां गंगा नदी में आई बाढ़ के पानी से बाकरपुर पंचायत बुरी तरह से प्रभावित है। ऐसे में, सोमवार को इस गांव के देवमुनी कुमार सजधज कर दूल्हा बने तो 35 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए लग्जरी कार की जगह नाव की सवारी करनी पड़ी।
दरअसल, बिहार और नेपाल में हो रही मूसलाधार बारिश के बाद प्रदेश की नदियां उफान पर हैं। गंगा और कोसी नदी कुछ स्थानों पर खतरे के निशान से उपर बह रही है। कई जिलों के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है। लड़के के पिता रामदेव मंडल ने बताया की शादी की तारीख एक महीने तय हुई थी। इसी बीच गंगा नदी में भीषण बाढ़ आ गई। बाखरपुर गांव भी बाढ़ के पानी से चारों तरफ से घिर गया, गांव से निकलने का रास्ता नहीं बचा तो कटिहार जिले के मनिहारी प्रखंड के कटाकोष गांव निवासी रामचंद्र चौधरी के यहां बारात नाव से गया। शादी कर दुल्हन को मंगलवार को नाव से लेकर वापस भी आ गया।
दूल्हे राजा देवमुनी कुमार ने बताया की गंगा नदी में बाढ़ आने के कारण लड़की के घर जाने के लिए सड़क मार्ग से नहीं पहुंचा जा सकता है। ऐसे में कुछ दूर तो स्कॉर्पियो से गए इसके बाद वहां से पैदल गंगा किनारे पहुंचे। फिर नाव में सवार होकर बाराती लड़की के घर कटिहार पहुंचे। घर से जब निकले तो आसमान साफ था लेकिन जब नाव पर सवार हुए तो झमाझम बारिश में भीगते हुए लड़की के घर पहुंचे।
देवमुनी कुमार ने बताया घर से बारात दोपहर 12 बजे के करीब निकले और लड़की के घर रात करीब 8 बजे पहुंची, लड़की का घर जाने के लिए सीधा रास्ता 35 किलोमीटर का है, लेकर गंगा नदी से होकर गए जिस कारण अधिक समय लगा। इस दौरान न कोई बैंड़ था और न ही कोइर तामझाम। मेरा शौक धरा का धरा रह गया। दिल में कसक रह गई शादी धूमधाम से करना था लेकिन बाढ़ के कारण सारा चौपट हो गया। नाव से ही ससुराल में मिला सारा सामान पलंग,तकिया, गद्दा, कुर्सी-टेबल, गोदरेज आदि लेकर अपने घर पहुंचा। इस दौरान नाव पर सवार बारात और दूल्हा -दुल्हन को देखाने लोगों की भारी भीड़ जमा थी। लोग मजे से बारात को नाव पर जाते हुए देख रहे थे।

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