Bihar Election: क्या चिराग होंगे बिहार में NDA के भविष्य?

लोजपा (रा) के सुप्रीमो व केंद्र सरकार में मंत्री चिराग पासवान आगामी बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। चर्चा है कि वह इस बार किसी आरक्षित सीट से नहीं, सामान्य सीट से दो-दो हाथ करेंगे।

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पटना: चिराग पासवान के सामान्य सीट से चुनाव लड़ने की कोई अधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन इसकी चर्चा फिलवक्त तेज है। इसका मकसद है कि जनता तक यह संदेश जाये कि चिराग पासवान किसी जात-जमात के, बल्कि पूरे बिहार के नेता हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं को बड़ा तबका भी इस रणनीति का हामी है। चिराग पासवान को वह बिहार की उम्मीद मान रहे हैं।

लोजपा (रामविलास) के बिहार प्रदेश प्रभारी और जमुई सांसद अरुण भारती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर बड़ा संकेत देते हुए कहा, जब नेता पूरे बिहार का है, तो सीट का दायरा क्यों सीमित हो? इससे साफ सियासी संकते मिल रहा है कि बेशक अभी कोई अधिकारिक घोषणा नहीं की गयी है, चिराग किसी सामान्य सीट से बिहार 2025 का विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं।

चुनाव लड़ने के पीछे की कहानी

बिहार में अभी जो छवि चिराग पासवान की उभरी हुई है, वो केंद्रीय नेता के तौर पर है। जबकि चिराग पासवान खुद को बिहार में स्थापित करना चाहते हैं। तभी वह अपनी बनी-बनाई छवि से इतर बिहार विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। बिहार में अपनी पार्टी के भविष्य को देखते हुए चिराग पासवान अब जमीन पर उतरने और खुद को एक बड़ा नेता साबित करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। उनका बिहार चुनाव में सक्रियता से उतरने का फैसला सिर्फ रणनीतिक नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक भविष्य की मजबूती की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

तेजस्वी के लिए चिंताजनक हो सकते है चिराग पासवान

अगर चिराग पासवान बिहार विधानसभा चुनाव लड़ते हैं तो भविष्य के लिए नेता प्रतिपक्ष राजद नेता तेजस्वी यादव के लिए चिंताजनक हो सकता है। वह इसलिए कि चिराग की छवि बिहार में उभरते युवा नेता के तौर पर है। हालांकि, इधर के दिनों में चिराग और सीएम नीतीश की मुलाक़ात भी हो रही है। एक तबका चिराग को भविष्य में नीतीश का विकल्प के रूप में देखती है।

क्या NDA में नीतीश की जगह चिराग हो सकते है विकल्प?

NDA के पास फिलहाल नीतीश कुमार के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। इसकी तलाश NDA कर रही है। इस मामले में चिराग फिट बैठते हैं। हालांकि, विकल्प बनने की सूरत में पहली बाधा नीतीश कुमार ही हो सकते हैं।

चिराग के नेतृत्व पार्टी ने लोकसभा में जीता सभी सीट

इससे पहले 2024 के लोकसभा चुनाव में पांचों सीटें जीतकर 100% स्ट्राइक रेट हासिल किया। अब वह विधानसभा चुनाव में इस प्रदर्शन को दोहरा कर पार्टी को बूथ स्तर तक मजबूत करना चाहते हैं। उनकी रणनीति दलित वोटों, खासकर पासवान समुदाय को एकजुट करने की है।

बिहार के राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह भी है कि चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति पारस में विरासत को लेकर कई वर्षो से टकराव चल रहा है। एक-दूसरे पर कई आरोप-प्रत्यारोप का राजनीति चलती रही है।

2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने चिराग को समर्थन दिया था। इससे पारस की राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी हाशिए पर चली गई। ऐसे में चिराग के बिहार राजनीति में प्रवेश करना और 2025 में चुनाव लड़ने के पीछे एक मकसद यह भी हो सकता है कि वह अपने चाचा के राजनीतिक पारी को समाप्त कर दें।

Suman

santshukla1976@gmail.com http://www.newgindia.com

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