एक जिला, एक पहचान बिहार के किसान बदलेंगे अपनी किस्मत

BAU सबौर ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक योजना शुरू की है। इसका लक्ष्य 'एक जिला, एक जीआई' नीति को अपनाना है, ताकि बिहार के हर जिले के खास उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल सके।

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भागलपुर: बिहार के किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) सबौर अब उनके उत्पादों को देश-दुनिया में पहचान दिलाने के लिए काम कर रहा है। विश्वविद्यालय ने फैसला किया है कि हर जिले के किसी खास उत्पाद को जीआई (Geographical Indication) टैग दिलाया जाएगा। यह कदम किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम दिलाएगा और उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाएगा।
बीएयू के कुलपति प्रो. दुनिया राम सिंह ने इस संबंध में वैज्ञानिकों को निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि जीआई टैग के अलावा, ज्यादा से ज्यादा बिहारी उत्पादों को ई-नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट (ई-नाम) में भी शामिल किया जाए।

ई-नाम पोर्टल और बीएयू की पहल
ई-नाम भारत सरकार का एक अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स ट्रेडिंग पोर्टल है, जिसे ‘वन नेशन, वन मार्केट’ की अवधारणा पर बनाया गया है। इसे कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के तहत लघु कृषक कृषि व्यवसाय कंसोर्टियम (एसएफएसी) द्वारा संचालित किया जाता है। इस पोर्टल की शुरुआत 14 अप्रैल 2016 को हुई थी, ताकि किसानों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार मिल सके। अभी तक इस पोर्टल पर देश के 200 से ज्यादा उत्पाद पंजीकृत हैं।
बीएयू अब नवाचार और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कुछ खास उत्पादों, जैसे सिंघाड़ा, बेबी कॉर्न और ड्रैगन फ्रूट, के मानकों को भी उच्च कोटि का बना रहा है। इन उत्पादों को व्यावसायिक रूप से तैयार किया जा रहा है, ताकि उन्हें ई-नाम पोर्टल पर शामिल किया जा सके। फिलहाल, बिहार के चार उत्पादों को इस पोर्टल पर शामिल किया गया है, और अन्य उत्पादों को भी इसमें जोड़ने की कवायद जारी है। इसकी जिम्मेदारी अनुसंधान और अन्य संबंधित विभागों को सौंपी गई है।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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