पटना: गंगा के तट पर स्थित बाढ़ विधानसभा पटना जिला के मुंगेर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। बाढ़ विधानसभा की पृष्ठभूमि ऐतिहासिक है। यहां से 17 बार सियासी दंगल सजा है। इसमें कांग्रेस ने छह बार जीत हासिल की है। आखिरी विक्ट्री 1985 में मिली। जबकि जेडीयू यहां चार बार जीती। जनता दल और भाजपा ने दो-दो बार, जबकि जनक्रांति दल, जनता पार्टी और एक निर्दलीय प्रत्याशी ने एक-एक बार विजयी रही है।
2025 विधानसभा चुनाव ने फिर से दस्तक दी है। बाढ़ विधान सभा भी इससे अछूती नहीं है। इस सीट से कई दिग्गज अपना सियासी चप्पू चलाने को तैयार हैं। लेकिन सेहरा किसके सिर बंधेगा, यह मतदाता की पसंदगी व नापंसदगी से तय होगा। उससे भी पहले अभी सियासी धुरंधरों को अपनी पार्टी को भी रिझाना बाकी है।
1951 में अस्तित्व में विधानसभा
मुंगेर लोकसभा क्षेत्र में आने वाली बाढ़ विधानसभा का गठन 1951 में हुआ। कभी कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाला बाढ़ क्षेत्र पर पकड़ अब भाजपा की है। कांग्रेस को यहां से आखिरी जीत 1985 में मिली थी। जेडीयू ने यहां चार बार जीत दर्ज की है। इसमें से एक समता पार्टी के टिकट पर थी। जनता दल और भाजपा ने दो-दो बार, जबकि जनक्रांति दल, जनता पार्टी और एक निर्दलीय प्रत्याशी ने एक-एक बार जीत का परचम फहराया।
ज्ञानेंद्र पर लगातार चार बार जताया भरोसा
चार विधानसभा चुनावोंं में ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ने अलग-अलग पार्टियों से जीत दर्ज करते रहे हैं। 2005 और 2010 में जेडीयू के टिकट पर विधायक बने। जबकि 2015 तथा 2020 में भाजपा से जीत दर्ज की। 2014 में जेडीयू और राजद का गठबंधन होने के बाद भाजपा का दामन थाम लिया। हाल ही में उन्होंने भाजपा नेतृत्व की आलोचना कर नीतीश कुमार के प्रति नरम रुख अपनाया है। इससे उनका राजनीतिक भविष्य असमंजस में दिखता है।
बाढ़ का सिकंदर
- 1952 राणा शिवलाखपति सिंह, ( कांग्रेस)
- 1957 रामयतन, ( कांग्रेस)
- 1962 राणा शिव लाखपति सिंह, ( कांग्रेस)
- 1967 तारणी प्रसाद सिंह, ( जेकेडी)
- 1969 राणा शिव लाखपति सिंह, ( कांग्रेस)
- 1972 द्वारिका नारायण सिंह, ( कांग्रेस)
- 1977 राणा शिव लाखपति सिंह, ( जेएनपी)
- 1980 विश्वमोहन, ( निर्दलीय)
- 1985 भुनेश्वर सिंह पप्पू, ( कांग्रेस)
- 1990 विजय कृष्ण, ( जनता दल)
- 1995 विजय कृष्ण, जनता दल
- 2000 भुवनेश्वर सिंह, ( एसएपी)
- 2005 (फरवरी) लवली आनंद, ( जदयू)
- 2005 (फरवरी) ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ज्ञानू, ( जदयू)
- 2010 ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ज्ञानू, ( जदयू)
- 2015 ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ज्ञानू, ( भाजपा)
- 2020 ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ज्ञानू, ( भाजपा)
जातीय समीकरण
यह राजपूत बाहुल्य क्षेत्र है। इसको बिहार का मिनी चितौड़गढ़ भी कहा जाता है। यहां से 16 बार राजपूत विधायक बने है। राजपूत के अलावा यादव और पासवान जाति भी प्रभावी है। हालांकि, मुस्लिम, ब्राह्मण, रविदास और भूमिहार की संख्या भी अच्छी खासी है।
कुल मतदाता
- कुल मतदाता : 2.76 लाख
- मतदाता: 1.45 लाख (52.19%)
- महिला मतदाता : 1.29 लाख (47.32%)
- ट्रांसजेंडर वोटरः 3 (0.001%)
बाढ़ को अलग जिला बनाने की मांग
बाढ़ क्षेत्र पटना जिले के अंतर्गत आता है। इसको जिला बनाने की मांग सालों से लंबित है। अगस्त 2024 में वर्तमान विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू ने भरोसा दिलाया था कि जनता दरबार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस विषय पर बातचीत हुई है। जल्द ही इसको जिला बना दिया जाएगा। लोगों का कहना है कि बावजूद इस भरोसे के, जमीनी हकीकत में कोई बदलाव नहीं आया है।
रोचक बात, खूब मजेदार
बाढ़ विधानसभा के नाम को लेकर भी कई मत हैं। बाढ़ शब्द फ्लड से प्रेरित है। क्षेत्र में रहने वाले जानकारों का कहना है कि इस विधानसभा का नाम के पीछे एक रोचक घटना है। कहा जाता है कि बाढ़ शब्द ( फ्लड ) से है। गंगा के दक्षिण छोर पर स्थित इस विधानसभा में बाढ़ प्रभावी है। नाम के पीछे दूसरा मत यह है कि बाढ़ शब्द बारह (12) अंक से मेल खाता है। वह यूं कि कोलकाता से आने वाले जहाजों का 12वां ठिकाना हुआ करता था। तीसरी तरह के लोग यह मानते हैं कि 1934 में आयोजित पहले बार अधिवेशन से जुड़ा है। इसमें भारतीय और ब्रिटिश वकीलों और न्यायविदों नेग लिया था। हालांकि, इसकी कहीं अधिकारिक पुष्टि नहीं होती है।
1928 ने हुआ था सती कांड
1928 में बाढ़ में एक दु:खद घटना घटी, जिसको सती कांड भी कहा जाता है। 1928 में एक युवा विधवा संपति कुवेर ने अपने पति की मृत्यु के बाद चिता पर आत्मदाह कर लिया। यह उस समय की चौंकाने वाली घटना थी। सती प्रथा पहले ही गैरकानूनी घोषित हो चुकी थी। ब्रिटिश सरकार ने इस मामले में उसके भाई सहित 10 लोगों को गिरफ्तार किया था। हालांकि, ग्रामीणों ने इस घटना को चमत्कारी के रूप में देखा और बाढ़ में उमानाथ मंदिर में सती स्थल नामक एक विशेष पूजा स्थल के रूप में मनाया जाता है।
कई राज्यों को मिलती बिजली
एक समय पूरी तरह कृषि पर निर्भर रहने वाली बाढ़ विधानसभा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को अब NTPC बाढ़ सुपर थर्मल पावर स्टेशन से नई ताकत मिली है। NTPC बाढ़ संयंत्र 3300 मेगावाट की क्षमता में से वर्तमान में 2640 मेगावाट बिजली उत्पादन कर रहा है। यहां से बिहार, झारखंड, सिक्किम, तेलंगाना और ओडिशा जैसे राज्यों को आपूर्ति की जाती है।



