पटना: बिहार में चुनावी सरगर्मियों के बीच कांग्रेस को एक करारा झटका लगा है। पार्टी के कद्दावर नेता अशोक राम, जो 6 बार विधायक और दलित समाज के एक प्रमुख चेहरे के रूप में जाने जाते हैं, ने रविवार को जनता दल यूनाइटेड (JDU) में शामिल होकर कांग्रेस को मुश्किल में डाल दिया है। इस घटना ने कांग्रेस की उस रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके तहत वह राज्य में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाना चाहती है।
अशोक राम ने रविवार को पटना स्थित जेडीयू प्रदेश कार्यालय में एक मिलन समारोह में औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। उन्हें जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा ने पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस अवसर पर बिहार सरकार के संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा भी मौजूद थे।
कांग्रेस में उपेक्षा से थे नाराज
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अशोक राम काफी समय से कांग्रेस पार्टी मे खुद को हाशिये पर महसूस कर रहे थे। बताया जा रहा है कि वे बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावरू से भी नाराज चल रहे थे। पार्टी में अपनी उपेक्षा से आहत होकर उन्होंने यह बड़ा फैसला लिया।
अशोक राम का कांग्रेस छोड़ना पार्टी के लिए कई मायनों में नुकसानदेह है। वे बिहार प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष थे। इसके अलावा, वह 6 बार विधायक, बिहार सरकार में मंत्री और कांग्रेस विधायक दल के नेता भी रह चुके हैं। राज्य में दलितों के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
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राहुल गांधी की पदयात्रा से पहले झटका
यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब कांग्रेस पार्टी बिहार में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। खबरो के मुताबिक, कांग्रेस नेता राहुल गांधी 10 अगस्त से बिहार में एक पदयात्रा शुरू करने वाले है, जिसमे वे 18 जिलों का दौरा करेगे। इस महत्वपूर्ण यात्रा से ठीक पहले अशोक राम जैसे वरिष्ठ नेता का पार्टी छोड़ना कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। यह घटना दर्शाती है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है, जिसका सीधा असर चुनाव पर पड़ सकता है।
जेडीयू मे अशोक राम के शामिल होने से जहां एक तरफ पार्टी को दलित वोट बैंक में अपनी पकड़ मजबूत करने मे मदद मिल सकती है, वहीं कांग्रेस को एक अनुभवी और प्रभावशाली नेता की कमी खलेगी। राजनीतिक गलियारो मे इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले दिनों में और भी नेता पाला बदल सकते हैं।
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