वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाए गए एआई-जनित और भ्रामक दावों के बाद आठ एफआईआर दर्ज की गई हैं। पुलिस अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
कांग्रेस द्वारा AI जनरेटेड वीडियो बनाकर मंदिर को तोड़ने का दुष्प्रचार फैलाया जा रहा है,
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) January 17, 2026
जबकि हर व्यक्ति जानता है कि मणिकर्णिका में जो मंदिर हैं, वे वहां पर वैसे ही मौजूद हैं… pic.twitter.com/DhUwMbJC1l
पुलिस के अनुसार, ये मामले आठ व्यक्तियों और कुछ X (पूर्व ट्विटर) हैंडल्स के खिलाफ दर्ज किए गए हैं, जिन्होंने घाट के सौंदर्यीकरण कार्य के बारे में झूठी और भ्रामक तस्वीरें साझा की थीं। डीसीपी गौरव बंसल ने बताया कि साझा की गई इमेजें “वास्तविक तथ्यों के विपरीत” थीं और उनका उद्देश्य धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना, गलत सूचना फैलाना और सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ना था।
अधिकारियों ने कहा कि कुछ पोस्टों में हिंदू देवी-देवताओं से जुड़े दृश्य शामिल थे, जिन्हें धार्मिक भावनाओं को आहत करने और जनता में गुस्सा भड़काने के इरादे से साझा किया गया। पुलिस ने बताया कि इन भ्रामक पोस्टों पर न केवल मूल पोस्ट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, बल्कि जिन लोगों ने इन्हें साझा या टिप्पणी की, उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विपक्ष ने भी इस मुद्दे को उठाया। कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक X हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट किया गया, जिसमें कहा गया कि “मणिकर्णिका घाट को नष्ट करना केवल घाट को नहीं, बल्कि भारत की पहचान, संस्कृति और विरासत को मिटाना है।” वहीं, NCP सांसद सुप्रिया सुळे ने मणिकर्णिका घाट के निर्माण कार्य से जुड़े कथित बदलावों की चिंता जताई और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आरोपों को “झूठी प्रचार सामग्री” बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि काशी आज अभूतपूर्व विकास देख रही है, और कांग्रेस एवं उसके समर्थक जनता को Mislead करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मणिकर्णिका घाट में पुनर्निर्माण और विकास कार्य जारी है और किसी को भी सोशल मीडिया पर जनता को Mislead करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
एफआईआर उस समय दर्ज की गई जब तमिलनाडु निवासी मनो द्वारा शिकायत की गई, जिनकी कंपनी 15 नवंबर, 2025 से घाट में शवदाह संबंधी सुविधाओं को मजबूत करने और सौंदर्यीकरण कार्य कर रही थी। पुलिस ने कहा कि 16 जनवरी की रात साझा की गई AI-जनित पोस्टों ने तथ्य को तोड़ा-मरोड़ा पेश किया और हिंदू भक्तों में नाराजगी पैदा की।



