लखनऊ: शिक्षा को जनआंदोलन बनाने के उद्देश्य से योगी ने वाराणसी के कंपोजिट विद्यालय शिवपुर (वरुणापार जोन) से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ‘स्कूल चलो अभियान’ का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने शिक्षकों, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से एकजुट होकर यह सुनिश्चित करने की अपील की कि कोई भी बच्चा स्कूल जाने से वंचित न रहे।
“हर बच्चे को शिक्षा, तभी बनेगा समृद्ध समाज”
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में शिक्षा को सबसे पवित्र कार्य बताते हुए कहा कि एक शिक्षित बच्चा न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के भविष्य को बदलने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि जब कोई बच्चा पढ़-लिखकर संस्कारित बनता है, तो वह जीवनभर समाज के प्रति कृतज्ञ रहता है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि निरक्षरता गरीबी और पिछड़ेपन को जन्म देती है, जबकि शिक्षा समृद्धि का मार्ग खोलती है। इसलिए हर व्यक्ति का दायित्व है कि वह बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाए।
ड्रॉपआउट में बड़ी गिरावट, अब लक्ष्य ‘शून्य’
सीएम योगी ने शिक्षा क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में ड्रॉपआउट रेट लगभग 19 प्रतिशत था, जो अब घटकर करीब 3 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने इसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि अब लक्ष्य इसे पूरी तरह शून्य तक पहुंचाना है।

उन्होंने बताया कि पिछले 9 वर्षों में लगभग 60 लाख नए बच्चों को बेसिक शिक्षा से जोड़ा गया, जो राज्य की शिक्षा व्यवस्था में सुधार का संकेत है।
घर-घर दस्तक: अभियान को बनाएं जनआंदोलन
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को विशेष जिम्मेदारी देते हुए कहा कि 1 से 15 अप्रैल के बीच हर शिक्षक को गांव और मोहल्लों में जाकर घर-घर संपर्क करना चाहिए। अभिभावकों से संवाद कर यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी बच्चा स्कूल जाने से वंचित न रहे।
उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से बच्चों को यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, किताबें और अन्य सुविधाएं निशुल्क दी जा रही हैं, इसलिए अभिभावकों को बच्चों का नामांकन अवश्य कराना चाहिए।
स्कूलों की बदली तस्वीर: ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ की सफलता
सीएम योगी ने कहा कि राज्य में ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के तहत 1.36 लाख से अधिक विद्यालयों को बुनियादी सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। शौचालय, पेयजल, साफ-सफाई और बेहतर वातावरण ने बच्चों को स्कूल की ओर आकर्षित किया है।
उन्होंने बताया कि NITI Aayog ने भी उत्तर प्रदेश की शिक्षा सुधार पहल को देश की सफल कहानियों में शामिल किया है।
80 हजार करोड़ का शिक्षा बजट, दिखना चाहिए परिणाम
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में स्कूली शिक्षा पर 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा रहे हैं। यह राशि तभी सार्थक होगी, जब इसके परिणाम जमीनी स्तर पर दिखें।
उन्होंने शिक्षकों और अधिकारियों को आश्वस्त किया कि सरकार उनके साथ खड़ी है, लेकिन उनसे अपेक्षा भी है कि वे पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें।
बच्चों को मिल रही हैं मुफ्त सुविधाएं
सीएम योगी ने बताया कि अब हर बच्चे को:
- दो यूनिफॉर्म
- स्वेटर
- जूते-मोजे
- स्कूल बैग और किताबें
निशुल्क दी जा रही हैं। इसके लिए अभिभावकों के खाते में डीबीटी के माध्यम से धनराशि भेजी जा रही है, ताकि कोई बच्चा संसाधनों की कमी के कारण शिक्षा से दूर न रहे।
शिक्षकों की भूमिका पर जोर: “ईश्वर ने आपको जिम्मेदारी दी है”
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों का भविष्य गढ़ने की जिम्मेदारी ईश्वर ने उन्हें सौंपी है। यदि वे इस दायित्व को ईमानदारी से निभाते हैं, तो उनका जीवन भी सार्थक और यशस्वी बनेगा।
उन्होंने कहा कि शिक्षा सिर्फ डिग्री पाने का माध्यम नहीं, बल्कि बच्चों में संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण का आधार है।
प्रेरणादायक उदाहरण और नई पहल
सीएम योगी ने Chitrakoot के जिलाधिकारी की पहल की सराहना करते हुए बताया कि उन्होंने अपने बच्चे का दाखिला आंगनवाड़ी केंद्र में कराया। इसे एक प्रेरणादायक कदम बताते हुए उन्होंने शिक्षकों से भी ऐसे उदाहरण प्रस्तुत करने की अपील की।
मानदेय बढ़ोतरी और सुविधाओं का ऐलान
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि इस महीने से:
- अनुदेशकों को 17,000 रुपये
- शिक्षामित्रों को 18,000 रुपये
मानदेय दिया जाएगा। साथ ही, शिक्षकों, अनुदेशकों और रसोइयों को 5 लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
अभियान को बनाएं जनभागीदारी का उत्सव
अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘स्कूल चलो अभियान’ को सिर्फ सरकारी कार्यक्रम न मानकर जनआंदोलन बनाया जाए। इसमें सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि और आम नागरिक सभी की भागीदारी जरूरी है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर हर बच्चा शिक्षित होगा, तो उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरा भारत विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।



