अंडे के पाउडर का यह ‘ऐतिहासिक’ सफर भारत के लिए क्यों है बेहद खास?

अंडे के क्षेत्र में नया कीर्तिमान: ओडिशा से ऑस्ट्रिया भेजा गया 'अंडे' का पहला कमर्शियल पाउडर शिपमेंट

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नई दिल्ली : भारत के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने एक ऐसी सफलता हासिल की है, जिसने भारतीय कृषि-व्यवसाय और वैश्विक व्यापार के नक्शे पर एक अमिट छाप छोड़ दी है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत काम करने वाले एपीडा ने ओडिशा के बलांगीर जिले से ऑस्ट्रिया के लिए ‘ड्राइड होल एग पाउडर’ (सूखे पूरे अंडे के पाउडर) की पहली व्यावसायिक निर्यात खेप को रवाना किया है।

यह कोई साधारण व्यापारिक सौदा नहीं है, बल्कि यह भारतीय पोल्ट्री (कुक्कुट) क्षेत्र और मूल्य संवर्धित (Value-added) खाद्य उत्पादों के इतिहास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह पहली बार है जब ओडिशा के सुदूर और पारंपरिक रूप से पिछड़े माने जाने वाले बलांगीर क्षेत्र से सीधे यूरोपीय संघ (EU) के एक प्रीमियम बाजार को प्रसंस्कृत अंडा उत्पाद भेजा गया है।

एक ऐतिहासिक मील का पत्थर और इसकी अहमियत

इस पूरी खेप को ओवो फार्म प्राइवेट लिमिटेड (OVO Farm Pvt. Ltd.) द्वारा निर्यात किया गया है, जो बलांगीर में स्थित है और एपीडा के साथ एक पंजीकृत निर्यातक है। कुल 22.6 मीट्रिक टन वजन वाले इस पहले शिपमेंट को एपीडा के अध्यक्ष श्री अभिषेक देव (IAS) द्वारा वर्चुअली हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

इस ऐतिहासिक अवसर पर ओडिशा सरकार के मत्स्य पालन और पशु संसाधन विकास (F&ARD) विभाग के आयुक्त-सह-सचिव श्री प्रेम चंद (IAS), और बलांगीर के कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट श्री गौरव शिवाजी इसलवार (IAS) समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधि मौजूद थे।

यह निर्यात भारतीय पोल्ट्री उत्पादों की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है। अब तक भारत बड़े पैमाने पर कच्चे कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए जाना जाता था, लेकिन प्रसंस्कृत और मूल्य संवर्धित उत्पादों (जैसे एग पाउडर) का यूरोपीय संघ जैसे सख्त मानकों वाले देशों में पहुँचना यह साबित करता है कि भारत की खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) क्षमता अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

बलांगीर में अत्याधुनिक एग प्रोसेसिंग फैसिलिटी

इस बड़ी सफलता की नींव साल 2025 में ही रख दी गई थी, जब ओवो फार्म ने बलांगीर में एक अत्याधुनिक अंडा प्रसंस्करण इकाई (State-of-the-art Egg Processing Facility) की स्थापना की थी। इस प्लांट का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय अंडे की वैल्यू चेन को मजबूत करना और निर्यात आधारित विकास को बढ़ावा देना था।

इस संयंत्र में निर्मित सूखे अंडे के उत्पाद राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों का पूरी तरह से पालन करते हैं। यूरोपीय संघ की हाइजीन आवश्यकताएं दुनिया में सबसे कठिन मानी जाती हैं। भारतीय निर्यातक ने इन सभी मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया है:

  • हलाल (HALAL) और कोशर (KOSHER) सर्टिफिकेट: ये प्रमाणपत्र इस उत्पाद को वैश्विक स्तर पर हर प्रकार के उपभोक्ता वर्ग के लिए स्वीकार्य बनाते हैं।
  • EIC मानक: निर्यात निरीक्षण परिषद (Export Inspection Council) के कड़े नियमों का पालन।
  • FSSC 22000 वर्शन 6: वैश्विक खाद्य सुरक्षा प्रणाली का उच्चतम प्रमाणन।

ड्राइड होल एग पाउडर क्या है और इसकी मांग क्यों है?

सूखे पूरे अंडे का पाउडर (Dried Whole Egg Powder) आधुनिक खाद्य उद्योग के लिए एक वरदान की तरह है। इसे तरल अंडों को स्प्रे-ड्राइंग (Spray-drying) तकनीक के माध्यम से सुखाकर तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया में अंडे के पोषक तत्व पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं, लेकिन उसकी नमी खत्म हो जाती है।

इसके मुख्य लाभ और उपयोग:

  1. लंबी शेल्फ लाइफ (Shelf Life): कच्चे अंडों की तुलना में यह पाउडर महीनों तक खराब नहीं होता।
  2. परिवहन में आसानी: इसे लाना-ले जाना बेहद आसान और कम खर्चीला होता है, क्योंकि इसमें टूटने-फूटने का कोई डर नहीं होता।
  3. बहुमुखी उपयोग (Versatility): इसका उपयोग फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री, बेकरी (बिस्कुट, केक), कन्फेक्शनरी (चॉकलेट, मिठाई) और फार्मास्युटिकल (दवा उद्योग) अनुप्रयोगों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

यूरोपीय देशों, विशेष रूप से ऑस्ट्रिया में, बेकरी और औद्योगिक उपयोग के लिए उच्च गुणवत्ता वाले अंडा पाउडर की भारी मांग रहती है। भारत द्वारा इस मांग को पूरा करना देश के निर्यातकों के लिए नए दरवाजे खोलता है।

एपीडा (APEDA) और सरकार की भूमिका

इस पूरी सफलता के पीछे भारत सरकार और एपीडा की वित्तीय सहायता योजनाओं (Financial Assistance Schemes) का बड़ा हाथ रहा है। एपीडा ने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, खाद्य सुरक्षा प्रबंधन प्रणालियों को अपनाने और प्रयोगशाला परीक्षण क्षमताओं को बढ़ाने के लिए निर्यातक को निरंतर सहायता प्रदान की।

सरकार के इन हस्तक्षेपों ने न केवल भारतीय उत्पादों की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार किया है, बल्कि घरेलू कंपनियों को यूरोपीय संघ के सख्त गैर-टैरिफ बाधाओं (Non-tariff barriers) को पार करने में भी सक्षम बनाया है।

भविष्य की राह और ओडिशा के लिए आर्थिक क्रांति

यह सफल निर्यात केवल एक कंपनी की जीत नहीं है, बल्कि यह पूरे ओडिशा के कृषि-प्रसंस्करण पारिस्थितिकी तंत्र (Agro-processing Ecosystem) को बदलने की क्षमता रखता है।

  • निवेश को बढ़ावा: इस सफलता से उत्साहित होकर पोल्ट्री प्रोसेसिंग क्षेत्र में और अधिक निजी निवेश आने की उम्मीद है।
  • रोजगार के अवसर: ओडिशा के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार पैदा होंगे।
  • किसानों को लाभ: स्थानीय स्तर पर अंडों की मांग बढ़ने से पोल्ट्री किसानों को उनके उत्पादों की बेहतर और स्थिर कीमतें मिल सकेंगी।

ऑस्ट्रिया को भेजे गए इस पहले शिपमेंट ने यह साबित कर दिया है कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘ब्रांड इंडिया’ के तहत तैयार खाद्य उत्पाद दुनिया के किसी भी विकसित देश के मानकों से टक्कर ले सकते हैं।

Basant Kumar

kumarbasantjha87@gmail.com

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