नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने शनिवार को केवल उपाधियां नहीं, शिक्षा के साथ चरित्र ही 2047 के भारत को दिशा देगा। उन्हाेंने युवाओं से आह्वान किया कि वे मूल्यों पर आधारित विकसित भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएं। गुप्ता पी.जी.डी.ए.वी. कॉलेज (प्रातः), दिल्ली विश्वविद्यालय के वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह में शनिवार को यह बात कही।
जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब देश की जिम्मेदारी युवाओं पर होगी

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब देश की जिम्मेदारी आज के युवाओं के कंधों पर होगी। उन्होंने कहा, “विकसित भारत केवल उपाधियों से नहीं बन सकता; इसके लिए शिक्षा के साथ-साथ सुदृढ़ चरित्र की भी आवश्यकता है। शिक्षा हमें मार्ग दिखाती है, जबकि चरित्र उस मार्ग पर दृढ़ता से चलने की शक्ति देता है।
पी.जी.डी.ए.वी. कॉलेज महर्षि दयानंद सरस्वती की वैचारिक विरासत का जीवंत प्रतीक है
पी.जी.डी.ए.वी. कॉलेज केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि महर्षि दयानंद सरस्वती की वैचारिक विरासत का जीवंत प्रतीक है, जिनकी ‘मूल्यों की ओर लौटने’ की प्रेरणा आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति के भीतर निहित पूर्णता को अभिव्यक्त करना है, और वास्तविक शिक्षा वही है जो मनुष्य के भीतर के मानव को जागृत करे।

भारत की वैश्विक प्रगति का उल्लेख करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचकर इतिहास रचा है, डिजिटल क्रांति में एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से विश्व को नई दिशा दी है, और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों के माध्यम से अपनी सुरक्षा के प्रति अडिग संकल्प का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों के पीछे वैज्ञानिकों की निष्ठा, सैनिकों का अनुशासन और विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवरों का समर्पण जैसे सुदृढ़ चरित्र का योगदान है।
असफलता से नहीं, बल्कि बेईमानी से डरना चाहिए
छात्रों को प्रेरित करते हुए गुप्ता ने कहा कि उन्हें बड़े सपने देखने चाहिए, लेकिन अपनी जड़ों को मजबूत बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि असफलता से नहीं, बल्कि बेईमानी से डरना चाहिए; असफलता हमें सिखाती है, जबकि बेईमानी जीवनभर साथ रहती है। उन्होंने मातृभाषा, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति गर्व की भावना को भी आवश्यक बताया और कहा कि जो अपनी जड़ों को भूल जाता है, वह स्थिर नहीं रह सकता।
गुप्ता ने यह भी कहा कि दयानंद एंग्लो वैदिक की अवधारणा आधुनिकता और परंपरा के समन्वय का प्रतीक है, और आज की पीढ़ी के पास तकनीकी प्रगति के साथ-साथ सभ्यतागत ज्ञान की धरोहर भी है, जिसे संतुलित रूप से आगे बढ़ाना होगा। कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया। विजेंद्र गुप्ता ने सभी पुरस्कृत छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान केवल शैक्षणिक उपलब्धि का नहीं, बल्कि अनुशासन, परिश्रम और निरंतर प्रयास का प्रतीक है। उन्होंने शिक्षकों के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग को भी छात्रों की सफलता का आधार बताया और विश्वास व्यक्त किया कि ये विद्यार्थी भविष्य में राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।



