नई दिल्ली। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की अध्यक्षता में दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता तथा मंत्री आशीष सूद और परवेश वर्मा शामिल हुए। बैठक में राजधानी में आपदा प्रबंधन, अग्नि सुरक्षा, अवैध निर्माण और भविष्य की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।
आपदा प्रबंधन पर दिया गया जोर
बैठक में मालवीय नगर जैसी घटनाओं को रोकने के लिए अवैध निर्माण और अग्नि सुरक्षा उल्लंघनों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने पर जोर दिया गया। उपराज्यपाल ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य है, लेकिन कार्रवाई के दौरान आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए।
लापरवाही पर होगा एक्शन
अवैध और असुरक्षित इमारतों के खिलाफ चल रहे अभियानों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए कि नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित कराया जाए। मुख्यमंत्री ने सभी एजेंसियों से आपसी समन्वय के साथ काम करने और कार्रवाई को तेज करने पर बल दिया।अग्नि सुरक्षा से जुड़े मामलों में अधिकारियों की जवाबदेही पर विशेष चर्चा हुई। उपराज्यपाल ने नाराजगी जताते हुए कहा कि फायर विभाग द्वारा अभी तक कोई नोटिस जारी न किया जाना गंभीर लापरवाही है और तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। साथ ही समय पर कार्रवाई रिपोर्ट जमा करने के भी निर्देश दिए गए। बैठक में यह भी कहा गया कि किसी भी अधिकारी की लापरवाही का असर उसकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट पर पड़ेगा। अग्नि सुरक्षा से जुड़े नियमों को और सख्ती से लागू करने पर सहमति बनी, जिसमें बहुमंजिला इमारतों पर अग्नि सुरक्षा उपायों को अनिवार्य करने का प्रस्ताव भी शामिल रहा।
नए फायर स्टेशन की होगी स्थापना
फायर विभाग की क्षमता बढ़ाने के लिए रिक्त पदों पर पूर्व अग्निवीरों की भर्ती और नए फायर स्टेशनों की स्थापना जैसे सुझावों पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए एमसीडी के 311 पोर्टल पर अवैध निर्माण की तस्वीरें अपलोड करने की व्यवस्था को मजबूत करने का प्रस्ताव रखा गया।



