पिछले 12 वर्षों में भारत के नेशनल हाईवे नेटवर्क में आया अभूतपूर्व बदलाव; अत्याधुनिक एक्सप्रेसवे, रिकॉर्ड निर्माण गति और पर्यावरण अनुकूल तकनीक से रफ्तार, कनेक्टिविटी और आर्थिक प्रगति को मिले नए पंख।
भारत की सड़कों और परिवहन व्यवस्था का पूरी तरह से कायाकल्प हो रहा है! पिछले बारह वर्षों में देश ने रोड इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में एक ऐसा बदलाव देखा है जिसकी पहले कभी कल्पना भी नहीं की गई थी। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी के कुशल मार्गदर्शन में, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने देश में कनेक्टिविटी के एक नए युग की शुरुआत की है।
यह बुनियादी ढांचा सिर्फ कंक्रीट की सड़कें नहीं हैं, बल्कि यह देश के आर्थिक विकास को मजबूत करने, लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने और करोड़ों नागरिकों की यात्रा को सुगम बनाने वाली ‘विकसित भारत’ की नई जीवन रेखा है।
आइए, इस ऐतिहासिक इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति के हर एक महत्वपूर्ण पहलू और बड़े बदलावों को विस्तार से समझते हैं:
‘भारतमाला परियोजना’: एकीकृत राष्ट्रीय कनेक्टिविटी का महा-संकल्प
हाईवे सेक्टर में देश को एकजुट करने और माल ढुलाई को सुगम बनाने के लिए अक्टूबर 2017 में सरकार द्वारा भारतमाला परियोजना को मंजूरी दी गई थी। यह एक ऐसा फ्लैगशिप प्रोग्राम है जिसने भारत के व्यापार और परिवहन का भूगोल बदल दिया है।
- बड़ा लक्ष्य और बजट: इस महा-परियोजना के तहत ₹5.35 लाख करोड़ के अनुमानित परिव्यय के साथ 34,800 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग गलियारों (National Highway Corridors) को विकसित करने का खाका तैयार किया गया था।
- इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान: इसमें मुख्य रूप से इकोनॉमिक कॉरिडोर, इंटर-कॉरिडोर और फीडर रूट्स, नेशनल कॉरिडोर एफिशिएंसी इम्प्रूवमेंट, बॉर्डर रोड्स, कोस्टल रोड्स, पोर्ट कनेक्टिविटी रोड्स और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण शामिल है।
- शानदार प्रगति (मार्च 2026 तक): योजना के तहत मार्च 2026 तक 26,425 किलोमीटर की परियोजनाओं को अवार्ड (मंजूरी) दिया जा चुका है, जिनमें से 22,590 किलोमीटर सड़कों का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा भी किया जा चुका है।
- प्रभाव: इसने दूर-दराज और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक पहुंच आसान बनाई है, जिससे क्षेत्रीय असंतुलन खत्म हो रहा है और राष्ट्रीय एकता मजबूत हो रही है।
राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का ऐतिहासिक विस्तार और रफ्तार
पिछले एक दशक में नेशनल हाईवे नेटवर्क की लंबाई और उनके बनने की गति में जो तेजी आई है, उसने वैश्विक स्तर पर भारत का मान बढ़ाया है।
1. नेटवर्क में 61% की भारी वृद्धि
साल 2014 में देश के भीतर राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई लगभग 91,287 किलोमीटर थी। सरकार के निरंतर प्रयासों के कारण वित्त वर्ष 2025-26 तक यह नेटवर्क बढ़कर 1,46,572 किलोमीटर से अधिक हो चुका है। यह लगभग 61 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी है, जो देश के कोने-कोने को बड़े आर्थिक केंद्रों से जोड़ती है।
2. निर्माण की तूफानी गति (34 किमी प्रति दिन)
साल 2013-14 में देश में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण की औसत गति केवल 11.6 किलोमीटर प्रति दिन थी। सुव्यवस्थित मंजूरी तंत्र, नीतिगत सुधारों और तकनीकी नवाचारों के बल पर साल 2025 तक यह रफ्तार बढ़कर लगभग 34 किलोमीटर प्रति दिन तक पहुंच गई है।
3. लॉजिस्टिक्स लागत में आई बड़ी कमी
भारतीय प्रबंधन संस्थान बैंगलोर (IIMB) द्वारा किए गए एक विशेष अध्ययन के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्गों के इस अभूतपूर्व विकास से फैक्ट्रियों, सप्लायर्स और ग्राहकों के बीच परिवहन का समय बेहद कम हो गया है। नतीजतन, देश की औसत लॉजिस्टिक्स लागत में भारी गिरावट आई है, जिससे भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन रहे हैं।
देश के गेम-चेंजर एक्सप्रेसवे और इकोनॉमिक कॉरिडोर
देश के अलग-अलग राज्यों में बने आधुनिक और एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे ने यात्रा के समय को आधा कर दिया है। यहाँ कुछ सबसे प्रमुख प्रोजेक्ट्स का पूरा विवरण दिया गया है:
| एक्सप्रेसवे / कॉरिडोर का नाम | लंबाई और कुल लागत | वर्तमान स्थिति और मुख्य प्रभाव |
| दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे | लंबाई: ~1,386 किमी लागत: ~₹1 लाख करोड़ | यह भारत का सबसे लंबा एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे बन रहा है, जो दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मप्र, गुजरात और महाराष्ट्र को जोड़ेगा। इसके कई हिस्से (जैसे दिल्ली-दौसा और वडोदरा-भरूच) पहले ही चालू थे, और हाल ही में 5 जून 2026 को गुजरात के किम-एना (36 किमी) और गंदेवा-एना (27.5 किमी) सेक्शन का भी उद्घाटन किया गया है। |
| दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर | लंबाई: 213 किमी लागत: ₹12,000 करोड़ | 14 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को समर्पित यह कॉरिडोर इंजीनियरिंग का एक चमत्कार है। इसने दिल्ली से देहरादून के सफर को 6 घंटे से घटाकर महज 2.5 घंटे कर दिया है और दूरी भी 235 किमी से घटाकर 213 किमी कर दी है। |
| बेंगलुरु–मैसूर एक्सप्रेसवे | लंबाई: 118 किमी लागत: ~₹8,480 करोड़ | मार्च 2023 में शुरू हुए इस एक्सप्रेसवे ने दोनों प्रमुख शहरों के बीच यात्रा के समय को 3 घंटे से घटाकर सिर्फ 75 मिनट कर दिया है, जिससे दक्षिण भारत में व्यापार और पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा मिला है। |
| द्वारका एक्सप्रेसवे | लंबाई: 29 किमी लागत: ~₹9,000 करोड़ | दिल्ली और गुरुग्राम के बीच शहरी गतिशीलता का यह एक नया बेंचमार्क है। इसका हरियाणा सेक्शन मार्च 2024 और दिल्ली सेक्शन अगस्त 2025 में पूरी तरह चालू हो गया। यह मल्टी-लेवल इंटरचेंज और आधुनिक ट्रैफिक सिस्टम से लैस है। |
| दिल्ली–मेरठ एक्सप्रेसवे | लंबाई: ~82 किमी लागत: ~₹8,346 करोड़ | विभिन्न चरणों में (2018 से 2021 के बीच) पूरा हुआ यह एक्सप्रेसवे दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए वरदान साबित हुआ है, जिसने दिल्ली-मेरठ के भीषण जाम को हमेशा के लिए खत्म कर दिया। |
ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर: विकास के साथ पर्यावरण की भी सुरक्षा
आज का नया भारत बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने के लिए भी प्रतिबद्ध है। इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर है:
- इस कॉरिडोर का 20 किलोमीटर का हिस्सा गणेशपुर से देहरादून के बीच राजाजी नेशनल पार्क और शिवालिक रिजर्व फॉरेस्ट के बेहद संवेदनशील पारिस्थितिकी क्षेत्र से गुजरता है।
- वन्यजीवों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए यहाँ 12 किलोमीटर लंबा एशिया का सबसे बड़ा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर बनाया गया है।
- इसके साथ ही प्रसिद्ध ‘डात-काली’ मंदिर के पास एक 370 मीटर लंबी आधुनिक टनल का निर्माण भी किया गया है, ताकि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना गाड़ियां गुजर सकें। यह प्रोजेक्ट देश में ‘सतत विकास’ (Sustainable Development) का एक बेहतरीन मॉडल बन चुका है।
निष्कर्ष: ‘बारह साल का विश्वास, विकास और जन-कल्याण’
पिछले 12 वर्षों की यह यात्रा केवल सड़कों के चौड़ीकरण की कहानी नहीं है, बल्कि यह देश के नागरिकों के जीवन को सुगम बनाने और भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ताकत देने का एक महा-अभियान है। मजबूत और आधुनिक सड़कों का यह जाल आत्मनिर्भर भारत के सपनों को सच कर रहा है। जैसे-जैसे देश ‘विकसित भारत’ के विज़न की ओर बढ़ रहा है, यह आधुनिक और सुरक्षित हाईवे नेटवर्क आने वाली कई पीढ़ियों के लिए समृद्धि, रोजगार और समावेशी विकास का सबसे मजबूत आधार स्तंभ बना रहेगा।



