दिशा 2.0: हर नागरिक तक न्याय की आसान पहुंच के लिए भारत सरकार का क्रांतिकारी कदम

नई दिल्ली से ग्राउंड रिपोर्ट: 'व्यापार और जीवन की सुगमता' के बाद अब देश में 'नियमानुसार न्याय की सुगमता' सुनिश्चित करने का महाअभियान

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नई दिल्ली, 22 जून 2026: भारत सरकार ने देश के कोने-कोने में, विशेषकर ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए एक युगांतरकारी निर्णय लिया है। केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल ने केंद्रीय क्षेत्र की योजना ‘न्याय तक समग्र पहुंच के लिए अभिनव समाधान तैयार करना (दिशा)’ को ‘दिशा 2.0’ के रूप में पुनर्गठित करके इसे आगामी पांच वर्षों के लिए जारी रखने की ऐतिहासिक मंजूरी दे दी है।

यह योजना 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी हो चुकी है और 31 मार्च, 2031 तक संचालित होगी। यह समयावधि देश के वित्त आयोग के 16वें चक्र के समापन के साथ पूरी तरह मेल खाती है। डिजिटल क्रांति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस दौर में दिशा 2.0 को एक बेहद सुविचारित और रणनीतिक रूप दिया गया है, ताकि देश का कोई भी नागरिक वित्तीय अक्षमता या भौगोलिक दूरी के कारण न्याय पाने से वंचित न रह सके।

बजट और प्रशासनिक संरचना (Financial & Administrative Framework)

दिशा 2.0 केवल एक नीतिगत घोषणा नहीं है, बल्कि इसे जमीन पर उतारने के लिए मजबूत वित्तीय और प्रशासनिक ढांचा तैयार किया गया है।

  • कुल स्वीकृत वित्तीय परिव्यय: इस दूरदर्शी योजना के लिए कुल 255 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट स्वीकृत किया गया है।
  • पूर्ण वित्तपोषण: इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका पूरा खर्च भारत सरकार के सकल बजटीय समर्थन (Gross Budgetary Support) से वहन किया जाएगा। यानी राज्यों पर इसका कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
  • मूल्यांकन और अनुशंसा: इस योजना के पुनर्गठन और इसके विभिन्न पहलुओं का गहन मूल्यांकन विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग के सचिव श्री नीरज वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित स्थायी वित्त समिति की बैठक में किया गया था, जिसके बाद इसे अंतिम रूप दिया गया।

संवैधानिक विज़न और वैश्विक लक्ष्य

दिशा 2.0 भारत के संवैधानिक वादों को हकीकत में बदलने का एक सशक्त माध्यम है। यह योजना सीधे तौर पर निम्नलिखित संवैधानिक और वैश्विक सिद्धांतों से प्रेरित है:

संवैधानिक स्तंभ: यह योजना भारत के संविधान की प्रस्तावना में निहित न्याय के संकल्प और अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) तथा विशेष रूप से अनुच्छेद 39A (निःशुल्क कानूनी सहायता का अधिकार) के अंतर्गत प्रतिपादित “न्याय तक पहुंच” के संवैधानिक जनादेश को पूरा करती है।

  • वैश्विक प्रतिबद्धता (SDG-16): यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 16 (SDG-16) का पुरजोर समर्थन करती है, जो दुनिया भर में शांति, न्याय और मजबूत व जवाबदेह संस्थानों की स्थापना पर केंद्रित है।
  • विकसित भारत @ 2047: दिशा 2.0 सीधे तौर पर वर्ष 2047 तक भारत को एक ‘विकसित राष्ट्र’ बनाने के विज़न को गति देती है।

यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दूरदर्शी संदेश के सर्वथा अनुकूल है, जिसे उन्होंने 8 नवंबर, 2025 को कानूनी सहायता वितरण तंत्र को सुदृढ़ करना विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के सामने रखा था। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा था:

” ‘न्याय की सुगमता’ (Ease of Justice) के बिना ‘व्यापार करने में सुगमता’ (Ease of Doing Business) और ‘जीवन की सुगमता’ (Ease of Living) अधूरी रहेगी।”

दिशा 2.0 के चार मुख्य स्तंभ (The Four Pillars of DISHA 2.0)

इस योजना को अखिल भारतीय स्तर पर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूरी ताकत से लागू किया जाएगा। दिशा 2.0 की सबसे बड़ी ताकत इसके चार मजबूत घटक हैं, जिनमें ‘विधि संजीवनी’ नामक एक बिल्कुल नया डिजिटल और एआई-संचालित घटक शामिल किया गया है

1. टेली-लॉ (वंचितों तक सीधी पहुंच)

यह घटक समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को सीधे कानूनी विशेषज्ञों से जोड़ता है।

  • विशाल नेटवर्क: ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम स्तरीय उद्यमियों (VLEs) द्वारा संचालित 2,50,000 सामान्य सेवा केंद्रों (CSCs) के नेटवर्क के माध्यम से काम करेगा।
  • भौगोलिक विस्तार: यह नेटवर्क देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 784 जिलों को कवर करता है।
  • विशेष फोकस: इसमें देश के 112 आकांक्षी जिले (Aspirational Districts) और 500 आकांक्षी ब्लॉक (Aspirational Blocks) शामिल हैं।
  • न्याय सहायक: आकांक्षी ब्लॉकों में ‘न्याय सहायक’ नियुक्त किए गए हैं, जो घर-घर जाकर लोगों को कानूनी सहायता और परामर्श प्रदान करेंगे।
  • तकनीकी अपग्रेड: इस कार्यक्रम को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए इसमें एडवांस एआई एकीकरण (AI Integration), बहुभाषी पहुंच और डिजिटल प्लेटफॉर्मों का आधुनिक उन्नयन किया जा रहा है।

2. न्याय बंधु (प्रो-बोनो कानूनी सेवाएं) कार्यक्रम

यह कार्यक्रम देश के वकीलों और कानून के छात्रों के भीतर समाज सेवा और मुफ्त कानूनी सहायता की संस्कृति को संस्थागत रूप देने का प्रयास है।

  • पात्रता: यह विधि सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 के अंतर्गत निःशुल्क कानूनी सहायता के हकदार व्यक्तियों को न्यायालय में मुफ्त प्रतिनिधित्व और सलाह दिलाएगा।
  • अधिवक्ताओं और छात्रों की भागीदारी: इसके तहत समाज के प्रति समर्पित ‘निःशुल्क कानूनी अधिवक्ताओं’ (Pro-Bono Advocates) की नियुक्ति की जाएगी।
  • निःशुल्क कानूनी क्लब (PBC): इस योजना का दायरा बढ़ाने के लिए देश के प्रतिष्ठित विधि महाविद्यालयों (Law Colleges) को शामिल करके प्रो-बोनो क्लबों का विस्तार किया जाएगा। साथ ही, डिजिटल माध्यमों से इसका सघन प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

3. कानूनी साक्षरता एवं कानूनी जागरूकता कार्यक्रम

कानून की जानकारी ही सबसे बड़ा बचाव है। इसी सिद्धांत पर काम करते हुए यह घटक बड़े पैमाने पर साक्षरता अभियान चलाता है।

  • साझेदारी का दायरा: यह कार्यक्रम विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs), नागरिक समाज संगठनों (CSOs), विधि विश्वविद्यालयों और मीडिया पार्टनर्स के साथ मिलकर काम करता है।
  • अभियान का तरीका: सरकारी, निजी और सीएसओ (CSO) क्षेत्रों की कार्यान्वयन एजेंसियों को औपचारिक समझौता ज्ञापनों (MoUs) के माध्यम से जोड़ा जाएगा, जो ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से देशव्यापी जागरूकता अभियान चलाएंगे।

4. विधि संजीवनी (The New Game-Changer Component)

दिशा 2.0 का यह सबसे आधुनिक और तकनीकी रूप से उन्नत घटक है। इसका मुख्य उद्देश्य पूरे कार्यक्रम की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और डेटा-आधारित सटीक निर्णय लेना है।

  • एकीकृत डैशबोर्ड: यह एक ऐसा केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो योजना के बाकी तीनों घटकों से आने वाले लाइव डेटा स्ट्रीम को एक ही जगह समेकित (Consolidate) करेगा।
  • न्याय सेतु चैटबॉट: इसके तहत एआई-संचालित (AI-powered) बहुभाषी ‘न्याय सेतु चैटबॉट को एकीकृत किया गया है।
  • भाषिनी का सहयोग: इस चैटबॉट को भारत सरकार के प्रसिद्ध ‘भाषिनी’ (Bhashini) प्लेटफॉर्म के साथ विकसित किया गया है, जो स्थानीय भाषाओं में कानूनी प्रश्नों का तुरंत समाधान करेगा और उन्नत डेटा विश्लेषण व रिपोर्टिंग में मदद करेगा।

पूर्ववर्ती दिशा योजना (2021-26) के शानदार आंकड़े

दिशा 2.0 की नींव पिछले पांच वर्षों (2021-26) की अपार सफलता पर टिकी हुई है। पूर्ववर्ती दिशा योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 250 करोड़ रुपये था और इसे न्याय विभाग द्वारा पूरे देश में सफलतापूर्वक लागू किया गया था। 31 मई, 2026 तक इस योजना ने जो अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किए, वे इस प्रकार हैं:

कार्यक्रम का नामप्रदर्शन और उपलब्धियां (31 मई, 2026 तक)
कुल लाभार्थी2.37 करोड़ से अधिक नागरिकों तक व्यापक पहुंच
टेली-लॉ (Tele-Law)1.13 करोड़ से अधिक मुकदमेबाजी-पूर्व (Pre-litigation) कानूनी सलाह दी गईं
न्याय बंधु (Nyaya Bandhu)31 राज्यों/UTs में 10,681 पंजीकृत प्रो-बोनो अधिवक्ता और 109 प्रो-बोनो क्लब स्थापित
कानूनी साक्षरता (LLLAP)1.24 करोड़ से अधिक लोगों को कानूनी रूप से जागरूक और साक्षर बनाया गया

भावी लक्ष्य: दिशा 2.0 से उम्मीदें

पूर्ववर्ती योजना की सफलता से सीख लेते हुए और एआई (AI) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को समाहित करते हुए, दिशा 2.0 ने आगामी पांच वर्षों के लिए अपने लक्ष्यों को और अधिक केंद्रित और जन-उन्मुख बनाया है। इस नई और उन्नत योजना का सीधा लक्ष्य इसके चारों घटकों के माध्यम से देश के कुल 30 लाख नए विशिष्ट लाभार्थियों तक सीधे पहुंचकर उनके जीवन में न्याय का उजाला फैलाना है।

यह योजना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि भारत सरकार अपने हर नागरिक को, चाहे वह कितना भी गरीब या दूरदराज के इलाके में क्यों न रहता हो, सम्मानजनक जीवन और त्वरित न्याय दिलाने के अपने वादे पर पूरी दृढ़ता के साथ अडिग है।

Meenu Rautela

Meenunewwork@gmail.com

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