डिजिटल इंडिया का नया सुरक्षा कवच : नशा मुक्त भारत के लिए ‘मानस’

मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ नागरिकों का डिजिटल सुरक्षा कवच

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नई दिल्ली: नशीले पदार्थों का दुरुपयोग और उनकी आज केवल किसी एक व्यक्ति की व्यक्तिगत समस्या नहीं रह गई है। यह एक गंभीर सामाजिक और जन-स्वास्थ्य संकट है, जो सीधे तौर पर परिवारों को तबाह करता है, समुदायों में असुरक्षा फैलाता है और राष्ट्र की सार्वजनिक सुरक्षा को चुनौती देता है।

इस बहुआयामी खतरे से निपटने के लिए केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई काफी नहीं थी, इसमें आम जनता की सक्रिय और सुरक्षित भागीदारी अनिवार्य थी। अक्सर नागरिक डर या पहचान उजागर होने के भय से नशीली गतिविधियों की सूचना देने से कतराते थे। इसी खाई को पाटने और नागरिकों को एक सुलभ व पूरी तरह गोपनीय मंच प्रदान करने के लिए सरकार ने 18 जुलाई, 2024 को राष्ट्रीय ‘मानस’ (मादक पदार्थ निषेध आसूचना केन्‍द्र) की शुरुआत की।

भारत में मादक पदार्थों के संकट की वास्तविक स्थिति

वर्ष 2019 में जारी “भारत में मादक पदार्थों के दुरुपयोग की व्यापकता” पर देश की पहली व्यापक रिपोर्ट ने इस समस्या के वास्तविक और डरावने स्वरूप को उजागर किया था:

  • शराब: देश में लगभग 16 करोड़ लोग शराब का सेवन करते हैं, जिनमें से 5.7 करोड़ से अधिक इसकी लत से गंभीर रूप से प्रभावित हैं।
  • भांग (कैनबिस): लगभग 3.1 करोड़ लोग भांग के विभिन्न रूपों का उपयोग करते हैं।
  • ओपिओइड (अफीम ): लगभग 2.26 करोड़ लोग अफीम, हेरोइन या स्मैक जैसे खतरनाक पदार्थों के जाल में फंसे हैं।
  • दवाओं का दुरुपयोग: करीब 1.18 करोड़ लोग डॉक्टर की सलाह के बिना दर्द निवारक और नींद की दवाओं (सेडेटिव) का नशे के रूप में सेवन करते हैं।

‘मानस’ की मुख्य विशेषताएं और कार्यप्रणाली

‘मानस’ प्लेटफॉर्म डिजिटल इंडिया की तकनीकी क्षमता और नशा मुक्त भारत के संकल्प को एक मंच पर लाता है। यह मुख्य रूप से तीन स्तंभों-सूचना, परामर्श और जागरूकता-पर केंद्रित है।

नागरिक इस प्लेटफॉर्म तक चार प्रमुख माध्यमों से पहुँच सकते हैं:

  1. राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर: 1933 (टोल-फ्री और 24×7 उपलब्ध)
  2. वेब पोर्टल: ऑनलाइन शिकायत और जानकारी के लिए
  3. ई-मेल: लिखित सूचनाएं और साक्ष्य भेजने के लिए
  4. उमंग (UMANG) ऐप: मोबाइल के माध्यम से त्वरित पहुंच

‘मानस’ के प्रमुख घटक और जन-सुविधाएं:

  • पूर्ण गोपनीयता: कोई भी नागरिक अपनी पहचान गुप्त रखकर मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध बिक्री या इसकी प्रतिबंधित खेती की जानकारी दे सकता है।
  • एकीकृत परामर्श: नशे की लत से पीड़ित लोगों की मदद के लिए ‘मानस’ पर आने वाली कॉल्स को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की हेल्पलाइन 14446 पर स्थानांतरित किया जाता है, जहाँ उन्हें पेशेवर काउंसलिंग मिलती है।
  • डिजिटल वर्कफ़्लो प्रबंधन: प्राप्त हर सूचना का एक डिजिटल टिकट जनरेट होता है, जिससे संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ डेटा का तेजी से आदान-प्रदान और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित होती है।
  • भविष्य का विस्तार: इस मंच को अधिक समावेशी बनाने के लिए इसमें स्मार्ट IVRS, एआई चैटबॉट और क्षेत्रीय भाषाओं में बहुभाषी सहायता जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को जोड़ा जा रहा है।

कानून प्रवर्तन और तकनीकी समन्वय

मानस’ हेल्पलाइन का तकनीकी और संगठनात्मक नेटवर्क अत्यंत व्यापक है, जो इसके सेवा के दायरे को देश के कोने-कोने तक पहुँचाता है। एजेंसियों के एकीकरण के तहत यह मंच नागरिकों को सीधे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की 30 क्षेत्रीय इकाइयों और सभी 36 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के एक विशाल और एकीकृत नेटवर्क से जोड़ता है। इसके अलावा, इसकी डेटा-संचालित रणनीति के अंतर्गत पोर्टल पर आने वाली सभी डिजिटल सूचनाओं का आधुनिक विश्लेषण किया जाता है, जिससे ड्रग्स तस्करी के पैटर्न और हॉटस्पॉट की पहचान कर भविष्य के लिए सटीक व अग्रिम रणनीतियाँ तैयार की जाती हैं। इस पूरे नशा-विरोधी अभियान में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए MyGov पोर्टल के माध्यम से क्विज़, पोस्टर मेकिंग और रील प्रतियोगिताओं जैसे रचनात्मक व आधुनिक जागरूकता अभियानों का आयोजन कर देश की युवा पीढ़ी को सक्रिय रूप से जोड़ा जा रहा है।

पीड़ित व्यक्ति के प्रति हमारा सामाजिक दायित्व

‘मानस’ समाज को यह संदेश देता है कि नशे की लत से पीड़ित व्यक्ति कोई अपराधी नहीं, बल्कि एक क्रूर दुष्चक्र (आपूर्ति और मांग) का शिकार है। एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमें:

  • उसके साथ सहानुभूति और सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए।
  • उसे नजदीकी सरकारी नशामुक्ति केंद्र में चिकित्सकीय सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
  • उसे थेरेपी और निरंतर परामर्श (काउंसलिंग) के लिए प्रेरित करना चाहिए ताकि वह मुख्यधारा में लौट सके।

निष्कर्ष: डिजिटल और मानवीय संवेदनाओं का संगम

‘मानस’ इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) का उपयोग नागरिक सुरक्षा और सामाजिक कल्याण के लिए किया जा सकता है। यह मंच पारदर्शिता, जवाबदेही और गोपनीयता के साथ काम करते हुए शासन को अधिक उत्तरदायी बनाता है। नागरिकों को मूक दर्शक से सक्रिय रक्षक बनाकर, ‘मानस’ एक सुरक्षित, स्वस्थ और नशा-मुक्त भारत के निर्माण की दिशा में एक क्रांतिकारी और मानवीय कदम साबित हो रहा है।

Meenu Rautela

Meenunewwork@gmail.com

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