नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की ऐतिहासिक जीत के पीछे सबसे बड़ा हाथ राज्य की महिलाओं का रहा। रिकॉर्ड मतदान करने वाली महिलाओं ने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली गठबंधन को भारी बहुमत दिलाया। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं को सीधे लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं ने एंटी-इंकम्बेंसी को दूर कर दिया और महिला वोटरों का भरोसा जीत लिया। सुपौल जिले की बड़वारी पंचायत के कजरा गांव में मुसहर समुदाय की 55 साल की कालो देवी की जिंदगी इन योजनाओं से बदल रही है। उनके परिवार में पति मजदूरी करते हैं और छोटा बेटा बेरोजगार है। दोनों को वृद्धावस्था पेंशन मिलती है, जो पहले 400 रुपये थी और अब जुलाई 2025 से बढ़कर 1100 रुपये हो गई। कालो देवी कहती हैं, पहले घर चलाना मुश्किल था, अब पेंशन से थोड़ी राहत मिली है।
वे जीविका समूह से जुड़ी हैं और हाल ही में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत मिले 10,000 रुपये से तीन बकरियां खरीदीं। उनका छोटा बेटा इनका देखभाल करता है। वे बताती हैं कि अच्छा काम करने पर आगे 2 लाख रुपये तक की मदद मिल सकती है। इसी गांव की 50 साल की उम्दा देवी यादव समाज से हैं। उनके दोनों बेटे बाहर कमाते हैं और पैसा भेजते हैं। उन्हें भी राशन, पेंशन और 10,000 रुपये की मदद मिली। वे कहती हैं, सरकार की योजनाओं से बेटों का पैसा बच जाता है और घर अच्छे से चलता है। 80 साल से ज्यादा उम्र की रामेश्वरी देवी अकेली रहती हैं। उनके पास थोड़ी जमीन है और पेंशन से गुजारा होता है। वे बताती हैं, पेंशन बढ़ने से बड़ी राहत मिली। गांव में ज्यादा खर्च नहीं, लेकिन अब सम्मान से जी सकते हैं।
नीतीश की महिला केंद्रित योजनाएं बनीं जीत की कुंजी
नीतीश कुमार ने दो दशकों में महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर दिया। 2006 से पंचायतों में 50% आरक्षण, शिक्षक भर्ती में महिलाओं के लिए आरक्षण, पुलिस में 35% सीटें और शराबबंदी जैसे कदमों ने महिला वोट बैंक मजबूत किया।
-मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना: जीविका से जुड़ी महिलाओं को स्वरोजगार के लिए पहली किस्त में 10,000 रुपये। सितंबर से अक्टूबर 2025 तक 5 किस्तों में लाखों महिलाओं के खाते में राशि ट्रांसफर हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने भी कई बार इसकी शुरुआत की। अच्छा प्रदर्शन पर 2 लाख तक अतिरिक्त मदद।
-जीविका कार्यक्रम: 11 लाख से ज्यादा स्वयं सहायता समूह, 1.4 करोड़ महिलाएं जुड़ीं। बैंक खाते खुलवाने से लेकर लोन तक सुविधा।
-वृद्धावस्था पेंशन: जुलाई 2025 से 400 से बढ़कर 1100 रुपये।
-मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना: बेटियों के जन्म से ग्रेजुएशन तक 94,100 रुपये तक की मदद। साइकिल के लिए 3000, पोशाक के लिए 600-1500 रुपये। सिविल सेवा पास करने पर 1 लाख तक प्रोत्साहन।
-महिला उद्यमी योजना: उद्यम शुरू करने के लिए 10 लाख तक (5 लाख अनुदान + 5 लाख ब्याज मुक्त लोन)। अब तक हजारों महिलाएं लाभार्थी।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का माध्यम बनी योजनाएं
ये योजनाएं सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का माध्यम बनीं। चुनाव में महिलाओं का मतदान पुरुषों से ज्यादा रहा और उन्होंने एनडीए को भारी समर्थन दिया। विश्लेषक कहते हैं कि इन योजनाओं ने नीतीश के खिलाफ एंटी-इंकम्बेंसी को खत्म कर दिया। बिहार की महिलाएं अब राजनीतिक ताकत बन चुकी हैं। नीतीश की ये पहल न सिर्फ चुनाव जीताई, बल्कि समाज में बदलाव भी लाई। आगे क्या नई योजनाएं आएंगी, यह देखना दिलचस्प होगा। अगर आप भी इन योजनाओं से जुड़ना चाहते हैं, तो जीविका या संबंधित विभाग की वेबसाइट चेक करें।



