नई दिल्ली: बेंगलुरु (Bengaluru) की चर्च स्ट्रीट और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बिना अनुमति महिलाओं के वीडियो बनाकर इंस्टाग्राम पर पोस्ट करने का मामला सामने आया है। एक युवती ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि एक इंस्टाग्राम अकाउंट उनकी सहमति के बिना उनकी वीडियो रिकॉर्ड कर रहा था और उन्हें सार्वजनिक रूप से पोस्ट कर रहा था। इस पोस्ट के वायरल होने के बाद बेंगलुरु पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। बेंगलुरु साउथ के डीसीपी लोकेश जगलसर ने बताया कि इस मामले में पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए दो सप्ताह पहले प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी।
युवती की आपबीती: यह निजता का हनन है
युवती ने अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, ‘यह व्यक्ति चर्च स्ट्रीट पर ‘मस्ती’ या ‘मनोरंजन’ के नाम पर वीडियो बनाने का दिखावा करता है, लेकिन वास्तव में वह महिलाओं का पीछा करके उनकी बिना अनुमति वीडियो बनाता है। मेरे साथ भी ऐसा हुआ। मुझे यकीन है कि कई अन्य महिलाएं भी इस बात से अनजान हैं कि उनकी वीडियो रिकॉर्ड की गई हैं। मेरा सोशल मीडिया अकाउंट सार्वजनिक होने का मतलब यह नहीं कि कोई भी मेरी वीडियो बिना इजाजत बना सकता है। यह निजता का हनन है और व्यूज या लाइक्स के लिए इस तरह का व्यवहार बिल्कुल गलत है।
युवती ने आगे पुलिस से कार्रवाई की मांग करते हुए लिखा, ‘मैं चाहती हूं कि इस व्यक्ति को जवाबदेह बनाया जाए। मैंने बेंगलुरु पुलिस और साइबर क्राइम सेल को टैग किया है ताकि यह मुद्दा सही अधिकारियों तक पहुंचे। कृपया इस वीडियो को हटाने में मेरी मदद करें। मैंने उस अकाउंट को रिपोर्ट कर दिया है।’ युवती ने यह भी बताया कि इन वीडियो के कारण उन्हें कई आपत्तिजनक और अश्लील संदेश मिल रहे हैं, जिससे उनकी मानसिक स्थिति पर बुरा असर पड़ा है।
सोशल मीडिया पर जन आक्रोश
आरोपी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर कई वीडियो देखे गए, जिनमें महिलाएं सड़कों पर चलते हुए अनजान या हैरान नजर आ रही हैं। कुछ वीडियो में महिलाएं बेखबर हैं कि उनकी रिकॉर्डिंग हो रही है, जबकि कुछ में उन्हें कैमरे की ओर इशारा करते देखा गया। इन वीडियो ने सोशल मीडिया पर व्यापक गुस्सा पैदा किया, और कई यूजर्स ने इसे महिलाओं की निजता पर हमला बताते हुए बेंगलुरु पुलिस से कठोर कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया और जांच शुरू कर दी।
कानून क्या कहता है?
भारत में बिना सहमति के किसी की तस्वीरें या वीडियो बनाना और उन्हें सार्वजनिक करना निजता के अधिकार का उल्लंघन माना जाता है। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354C (वॉयरिज्म) के तहत, बिना अनुमति किसी महिला की निजी तस्वीरें या वीडियो बनाना और उन्हें प्रसारित करना एक दंडनीय अपराध है। पहली बार अपराध करने पर 1 से 3 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है, जबकि दूसरी बार अपराध करने पर सजा 3 से 7 साल तक हो सकती है। इसके अलावा, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 66E के तहत निजता के उल्लंघन के लिए 3 साल तक की सजा या 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
अपराधों का महिलाओं के पहनावे से कोई लेना-देना नहीं
सामाजिक कार्यकर्ता वृंदा अडिगे का कहना है कि इस तरह के अपराधों का महिलाओं के पहनावे से कोई लेना-देना नहीं है।यह धारणा गलत है कि केवल कम कपड़े पहनने वाली महिलाओं को निशाना बनाया जाता है। हर तरह की महिलाएं, चाहे वे पारंपरिक कपड़े पहनें या बुर्का, इस तरह के व्यवहार का शिकार हो रही हैं। यह अपराध निजता पर हमला है और इसका मकसद अक्सर सोशल मीडिया पर व्यूज या डार्क वेब पर लाभ कमाना होता है।” हालांकि, पुलिस को अभी तक इस मामले में डार्क वेब से कोई संबंध नहीं मिला है। कानूनी विशेषज्ञ पूर्णा रविशंकर ने बताया, “हमारी कानूनी व्यवस्था में इस तरह के अपराधों को गंभीरता से लेने में कमी है। सजा की अवधि कम होने के कारण अपराधियों को उचित सबक नहीं मिलता। जन आक्रोश के कारण पुलिस ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई की, लेकिन यह व्यवस्थागत सुधार की जरूरत को दर्शाता है।” उन्होंने मेट्रो क्लिक्स जैसे पिछले मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि जन दबाव के कारण त्वरित कार्रवाई संभव हुई थी।
जागरूकता और सख्ती की जरूरत
यह मामला सोशल मीडिया के दुरुपयोग और महिलाओं की निजता पर बढ़ते खतरे की ओर इशारा करता है। बेंगलुरु पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराधों से निपटने के लिए कानूनों को और सख्त करने और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। महिलाओं को अपनी निजता की रक्षा के लिए सतर्क रहने और ऐसे मामलों को तुरंत रिपोर्ट करने की सलाह दी जा रही है। साथ ही, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी ऐसी सामग्री को हटाने और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए और प्रभावी कदम उठाने होंगे।



