लोक निवास में ओमान के युवा वैज्ञानिकों से संवाद; बोले- वैज्ञानिक सोच, अनुसंधान और नवाचार ही विकसित भारत की असली ताकत

नई दिल्ली। दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) सरदार तरणजीत सिंह संधू ने कहा है कि विकसित भारत के निर्माण में वैज्ञानिक सोच, अनुसंधान और नवाचार की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने युवाओं से अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप करियर चुनने, सामाजिक दबाव से प्रभावित न होने तथा बदलती दुनिया की आवश्यकताओं के अनुसार लगातार नए कौशल सीखते रहने का आह्वान किया। एलजी ने कहा कि असफलता से घबराने की नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर आगे बढ़ने की जरूरत है।
लोक निवास में आयोजित एक विशेष संवाद कार्यक्रम में एलजी ने विज्ञान भारती (विभा) द्वारा आईआईटी गांधीनगर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ‘शास्त्र प्रतिभा प्रतियोगिता’ के विजेता ओमान के छात्र-छात्राओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों के साथ वैज्ञानिक जिज्ञासा, अनुसंधान, नवाचार और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
उपराज्यपाल ने कहा कि भारत तभी वैश्विक स्तर पर विज्ञान और नवाचार का अग्रणी देश बन सकता है, जब नई पीढ़ी में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक सोच और शोध की संस्कृति को मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं में अपार प्रतिभा है और उन्हें सही दिशा, अवसर तथा प्रोत्साहन देकर वैश्विक नेतृत्व के लिए तैयार किया जा सकता है।
रुचि के अनुसार करियर चुनें

सरदार तरणजीत सिंह संधू ने विद्यार्थियों से कहा कि करियर का चयन समाज की अपेक्षाओं या दूसरों के दबाव में नहीं, बल्कि अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में व्यक्ति पूरे मन से काम करता है, उसी क्षेत्र में वह उत्कृष्टता हासिल कर सकता है। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता और निरंतर मेहनत, अनुशासन तथा समर्पण ही सफलता की असली कुंजी हैं।
नए कौशल सीखना समय की सबसे बड़ी जरूरत
उपराज्यपाल ने कहा कि तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में केवल शैक्षणिक डिग्री पर्याप्त नहीं है। आज के दौर में नई तकनीकों को समझना, आधुनिक कौशल विकसित करना और जीवनभर सीखते रहने की मानसिकता ही सफलता का आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों से लगातार स्वयं को अपडेट रखने और बदलते समय के अनुरूप अपनी क्षमताओं का विकास करने की अपील की।
‘असफलता सफलता की पहली सीढ़ी है’

युवा वैज्ञानिकों का उत्साहवर्धन करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि असफलता कभी भी व्यक्ति की अंतिम मंजिल नहीं होती, बल्कि वह सफलता की तैयारी का महत्वपूर्ण चरण होती है। हर चुनौती और हर असफलता व्यक्ति को अधिक मजबूत, परिपक्व और आत्मविश्वासी बनाती है। इसलिए असफलता से डरने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
विज्ञान भारती के प्रयासों की सराहना
उपराज्यपाल ने युवा वैज्ञानिक प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और उन्हें भारत की समृद्ध वैज्ञानिक विरासत से जोड़ने के लिए विज्ञान भारती (विभा) के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और शोध की भावना को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारत की वैज्ञानिक परंपरा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कार्यक्रम के अंत में उपराज्यपाल ने सभी विजेता छात्र-छात्राओं को उनके उज्ज्वल शैक्षणिक और वैज्ञानिक भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं तथा विश्वास व्यक्त किया कि वे भविष्य में विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देकर अपने देश और समाज का नाम रोशन करेंगे।
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