नई दिल्ली। मत्स्यिकी, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्यिकी विभाग 21 नवंबर 2025 को सुषमा स्वराज भवन में विश्व मत्स्यिकी दिवस बड़े स्तर पर मना रहा है। इस बार की थीम “भारत की नीली क्रांति: सी-फूड निर्यात में मूल्य-संवर्धन को मजबूत करना”। कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह वर्चुअली करेंगे। उनके साथ राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल और जॉर्ज कुरियन भी मौजूद रहेंगे।
27 देशों के मेहमान आएंगे भारत
इस मेगा आयोजन में देश-विदेश से हजारों लोग शामिल होंगे। लगभग 27 देशों के प्रतिनिधि सीधे दिल्ली पहुंच रहे हैं। यह भारत की ब्लू इकॉनॉमी में बढ़ती वैश्विक साझेदारी को दिखाता है। इसके अलावा इस दौरान कई बड़ी घोषणाएं और लॉन्च होंगे। ऐसे में कार्यक्रम में मत्स्यिकी क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जारी किए जाएंगे। इसमें मत्स्य पालन और जलीय कृषि में ट्रेसेबिलिटी का राष्ट्रीय फ्रेमवर्क–मछली कहां से पकड़ी या पैदा हुई, यह पूरी जानकारी डिजिटल तरीके से रहेगी, समुद्री खेती (मारीकल्चर) के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP), स्मार्ट और एकीकृत बंदरगाहों के लिए दिशा-निर्देश, मछली लैंडिंग सेंटरों के लिए नई गाइडलाइंस, जलाशय मत्स्य पालन प्रबंधन के लिए दिशा-निर्देश और तटीय जलीय कृषि की पूरी गाइडलाइंस का संकलन। ये सभी दस्तावेज मिलकर भारत में जिम्मेदार और टिकाऊ मत्स्य पालन का पूरा खाका तैयार करेंगे।
दो तकनीकी सत्रों में होगी गहन चर्चा
पहला सत्र: “मत्स्य पालन में मूल्य-संवर्धन से विकास को गति”। इसमें नई वैरायटी के प्रोडक्ट, ब्रांडिंग-पैकेजिंग, मानक और प्रमाणन और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर पर बात होगी। दूसरा सत्र में“अंदरूनी राज्यों का निर्यात पोटेंशियल बढ़ाना” खास तौर पर मीठे पानी की मछलियों (रोहू, कतला, पंगास आदि) को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की रणनीति बनेगी।
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निर्यात को दोगुना करने का लक्ष्य पास
भारत आज दुनिया में झींगा निर्यात करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है। सरकार अब वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स (रेडी-टू-ईट, रेडी-टू-कुक, स्मोक्ड फिश आदि) पर जोर दे रही है। ट्रेसेबिलिटी सिस्टम लागू होने से यूरोप, अमेरिका और जापान जैसे सख्त बाजारों में भारतीय सी-फूड को और आसानी से जगह मिलेगी। मत्स्यिकी सचिव डॉ. अभिलक्ष लिक्ही ने कहा कि यह आयोजन सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि लाखों मछुआरों, किसानों और युवा उद्यमियों के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोलेगा। विश्व मत्स्यिकी दिवस पर पूरा देश एक साथ नीली क्रांति को नई ऊंचाई देने का संकल्प लेगा।



