नई दिल्ली। हर साल सर्दियों के मौसम में दुनिया के उत्तरी हिस्सों से हजारों प्रवासी पक्षी लंबी दूरी तय कर भारत का रुख करते हैं। जैसे ही यूरोप, मध्य एशिया और साइबेरिया जैसे क्षेत्रों में तापमान गिरता है, झीलें जमने लगती हैं और कीड़े-मकोड़े व अन्य खाद्य स्रोत समाप्त होने लगते हैं। ऐसे हालात में वहां पक्षियों का टिके रहना मुश्किल हो जाता है। भोजन और अनुकूल मौसम की तलाश में ये पक्षी दक्षिण दिशा की ओर उड़ान भरते हैं।
सुरक्षित और आरामदायक वातावरण
भारत प्रवासी पक्षियों के लिए एक आदर्श गंतव्य माना जाता है। यहां का अपेक्षाकृत गर्म मौसम, विस्तृत आर्द्रभूमियां, झीलें, नदियां और पर्याप्त भोजन पक्षियों को सुरक्षित और आरामदायक वातावरण प्रदान करता है। सर्दियों में भी भारत की नदियों और जलाशयों में मछलियां, जलीय कीट और अन्य खाद्य पदार्थ आसानी से उपलब्ध रहते हैं, जिससे पक्षियों को भोजन की कमी नहीं होती।
370 प्रजातियों के प्रवासी पक्षी आते हैं भारत
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में हर साल करीब 370 प्रजातियों के प्रवासी पक्षी आते हैं। इनमें राजहंस प्रमुख हैं, जो सर्दियों में गुजरात के विभिन्न जलाशयों में देखे जाते हैं। वहीं डेमोइसेल क्रेन राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों और तालाबों में बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। इसके अलावा यूरोपीय रोलर जैसी प्रजातियां भी भारत को अपना अस्थायी घर बनाती हैं।
दो हजार पक्षी करते हैं प्रवास
पक्षी विशेषज्ञ बताते हैं कि दुनिया में कुल 2,000 से अधिक ऐसी पक्षी प्रजातियां हैं, जो हर साल मौसम के अनुसार एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करती हैं। भारत की भौगोलिक स्थिति, विविध जलवायु और समृद्ध जैव-विविधता इसे प्रवासी पक्षियों के लिए एक सुरक्षित शीतकालीन आश्रय बनाती है। सर्दियों में भारत की झीलें, नदियां और वेटलैंड्स इन पक्षियों से गुलजार हो जाती हैं।



