जो कोई नहीं कर सका, क्या उसे चुनाव आयोग की बयानबाजी ने कर दिया?

SIR पर चुनाव आयोग की विपक्ष के प्रति आक्रामकता ने वह प्लेटफार्म तैयार कर दिया, जिस पर पूरा विपक्ष एक साथ खड़ा नजर आ रहा है।

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नई दिल्ली: चुनाव आयोग की प्रेस कांफ्रेंस के बाद विपक्ष में माहौल तेजी से बदला है। हालांकि जब विपक्ष ने चुनाव आयोग से मिलने के लिए संसद से निर्वाचन सदन की ओर मार्च शुरू किया तो उसी वक्त संकेत चला गया था कि इस मामले में समूचा विपक्ष एकजुट है लेकिन रविवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने जिस तरह से राहुल गांधी पर हमला बोला, उसके बाद विपक्ष की एकता और मजबूत होती नजर आ रही है। दिलचस्प ये है कि विपक्ष में जिन पार्टियां या नेताओं के राहुल गांधी से मतभेद थे, वे भी उनके साथ आ खड़ी हुई हैं। यही वजह है कि अब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाअभियोग प्रस्ताव लाने की भी कयास शुरू हो गए हैं। 

मुख्य चुनाव आयुक्त ने  राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा कि अब उनके सामने हलफनामा देने या माफी मांगने के अलावा कोई तीसरा विकल्प नहीं है। उनकी इसी पंक्ति ने विपक्ष को उन्हें घेरने का मौका दिया है। सवाल ये उठा है कि अगर राहुल गांधी से हलफनामा मांगा गया तो फिर पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को क्यों छोड़ा गया ? महत्वपूर्ण ये है कि मुख्य चुनाव आयुक्त की इस बयानबाजी को लेकर सिर्फ विपक्ष में ही नहीं, बल्कि कई ऐसे दलों के नेताओं को भी नाराज कर दिया है, जो अब तक एनडीए या इंडी में से किसी भी गठबंधन में नहीं थे। 

राजनीति पर करीब से नजर रखने वालों का मानना है कि सीईसी की बयानबाजी भले ही राहुल गांधी को कटघरे में खड़े करने के लिए थी, लेकिन इससे राहुल गांधी को उलटा फायदा हुआ है। जबकि बीजेपी को इससे नुकसान होता नजर आया है। हालांकि, बीजेपी लगातार सीईसी के बचाव में है। जानकारों का मानना है कि अगर कुछ दिन इसी तरह का माहौल रहा तो बीजेपी को भी बैकफुट पर आना पड़ सकता है।

राहुल गांधी के लिए ये प्रकरण इसलिए फायदेमंद है कि इससे एक तो वोटरों और खासतौर पर बिहार के वोटरों में ये संदेश गया है कि राहुल गांधी उनके वोटों के लिए लड़ रहे हैं। दूसरे राहुल गांधी एक बार फिर से इस अहम मौके पर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। यही नहीं, जिस तरह से समूचे विपक्ष ने राहुल गांधी का साथ दिया। उससे साफ है कि ये ऐसा मुद्दा बन गया है, जिससे विपक्ष एकजुट हो गया है। जाहिर है कि बिहार में कांग्रेस, आरजेडी गठबंधन इसका फायदा तो उठाएगा ही, साथ ही देश के बाकी हिस्सों में भी विरोधी पार्टियों के लिए बीजेपी को घेरना आसान हो गा। 

 ऐसे में अब बीजेपी की दिक्कत है कि उसे मजबूरी में सीईसी का बचाव करना जरुरी हो गया है। लेकिन अगर ये मामला आगे बढ़ा तो बीजेपी के लिए फिर दूसरी रणनीति पर काम करना पड़ सकता है। उधर, चुनाव आयोग ने उन लोगों की लिस्ट वेबसाइट पर अपलोड कर दी है, जिनके नाम काटे गए हैं। लेकिन ये काम होने के बावजूद बीजेपी खुलकर ये क्लेम नहीं कर पा रही। इसकी वजह ये है कि अगर ऐसा करती है तो जाहिर है कि इसका क्रेडिट भी सुप्रीम कोर्ट और राहुल गांधी को चला जाएगा।

Gulshan Rai Khatri

gulshanraikhatri@gmail.com

गुलशन राय खत्री 35 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता में हैं। दैनिक जागरण और जनसत्ता में रिपोर्टिंग के बाद नवभारत टाइम्स में लगभग 33 साल तक पत्रकारिता की। सिटी रिपोर्टिंग के अलावा नवभारत टाइम्स के नैशनल ब्यूरो में रहते हुए नैशनल बीजेपी, रेलवे, शहरी विकास, रोड ट्रांसपोर्ट जैसे कई मंत्रालयों की रिपोर्टिंग की। बाद में 6 साल नवभारत टाइम्स में मेट्रो एडिटर रहने के बाद रिटायर हुए। अब स्वतंत्र पत्रकारिता कर रहे हैं और न्यूजी इंडिया के लिए भी लिखते हैं।

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