नई दिल्ली: खान मंत्रालय ने राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (NCMM) के तहत दो और संस्थानों को उत्कृष्टता केंद्र (COE) के रूप में मान्यता दी है। इसमे पहला संस्थान भारतीय विज्ञान संस्थान यानी IISc बैंगलोर है, और दूसरा सेंटर फॉर मैटेरियल्स फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी यानी C-MET हैदराबाद है।
क्रिटिकल मिनरल वैल्यू चेन में R&D को मिलेगा बढ़ावा
इन उत्कृष्टता केंद्रों का उद्देश्य क्रिटिकल मिनरल वैल्यू चेन में अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा देना है, ताकि उन्नत प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा, अंतरिक्ष, स्वच्छ ऊर्जा और गतिशीलता परिवर्तन जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जा सके। प्रत्येक उत्कृष्टता केंद्र हब और स्पोक मॉडल पर काम करेगा, जिसमें कम से कम दो उद्योग और दो शैक्षणिक/आरएंडडी भागीदार शामिल होंगे। वर्तमान में 9 मान्यता प्राप्त उत्कृष्टता केंद्रों के तहत लगभग 90 उद्योग और शैक्षणिक/आरएंडडी संस्थान सहयोग कर रहे हैं।
खान मंत्रालय का कहना है कि ये केंद्र देश में महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षमता को सुदृढ़ और उन्नत करने के लिए नवीन और परिवर्तनकारी अनुसंधान करेंगे।
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अब से पहले 7 संस्थानों को मिली CoE के रूप में मान्यता
31 जुलाई 2025 को परियोजना अनुमोदन एवं सलाहकार समिति (PAAC) की बैठक में राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के तहत CoE के रूप में 7 संस्थानों को मान्यता दी गई थी; इनके नाम हैं- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे, IIT हैदराबाद ,IIT (ISM) धनबाद, IIT रुड़की, CSIR-IMMT भुवनेश्वर, CSIR-NML जमशेदपुर, NFTDC हैदराबाद।

क्रिटिकल मिनरल्स क्या है?
इन तत्वों का उपयोग आधुनिक तकनीकों और उद्योगों में किया जाता है। हालांकि इनकी उपलब्धता सीमित होती है। इन खनिजों की आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा आने से कई उद्योगों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
क्रिटिकल मिनिरल्स के कुछ उदाहरण हैं- इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और बैटरी उद्योग के लिए लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट, अक्षय ऊर्जा के लिए निओडाइमियम, डिस्प्रोसियम (पवन टरबाइन, सोलर पैनल), सेमिकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए सिलिकॉन, गैलियम, जर्मेनियम, रक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए टाइटेनियम, नियोडाइमियम आदि।



