यह मेलोडी नहीं, मोदी का जादू है मितवा…

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हरि वर्मा

सियासी पिच हो या सोशल मीडिया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने-आप में एक बड़ा ब्रांड बन चुके हैं। यही कारण है कि उनका जादू देश और दुनिया के सिर चढ़कर बोल रहा है। हाल ही में अपनी पांच देशों की यात्रा के आखिरी पड़ाव के दौरान जब पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को ‘मेलोडी’ टॉफी उपहार में दी, तो महज तीन घंटे के भीतर सोशल मीडिया पर यह ‘मोदी मैजिक’ वीडियो 6 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया।

हर तरफ इसी की चर्चा होती रही। इतना ही नहीं, मेलोडी टॉफी बनाने वाली कंपनी पारले प्रोडक्ट्स का स्टॉक भी सोशल मीडिया पर इस ट्रेंड के बाद 5 फीसदी तक उछलकर ऊपरी सर्किट (5.25 रुपये) पर पहुंच गया। दरअसल, यह चॉकलेटी मेलोडी का नहीं, बल्कि मोदी ब्रांड का जादू है। विरोधी भले ही इसे सियासी नौटंकी बताएं, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल जुदा है।

सियासी पिच से सामाजिक सरोकार तक

पीएम मोदी सियासी पिच पर आक्रामक ‘हेलिकॉप्टर शॉट’ से न केवल विरोधियों को चुनावी मैच में शिकस्त देते रहे हैं, बल्कि अपनी ‘गुगली’ गेंदों से गिल्लियां उड़ाने में भी माहिर हैं। बिहार में गमछा लहराकर गर्दा उड़ाने की बात हो या असम में अंगोछे के जरिए असमिया अस्मिता से जुड़ाव की, हर कोई उनकी इस शैली से वाकिफ है। पश्चिम बंगाल के चुनावों के दौरान उन्होंने झालमुड़ी खाकर विरोधियों को तीखी मिर्ची का अहसास कराया था।

अब इटली की पीएम मेलोनी के साथ मोदी की यह मैत्री वैश्विक चुनौतियों के बीच देश के आर्थिक गलियारों में नई मिठास घोलने जा रही है। मोदी-मेलोनी मुलाकात के दौरान भारत और इटली के बीच 2029 तक 29 बिलियन यूरो के आर्थिक सहयोग का खाका खींचा गया है।

पश्चिम एशिया संकट की इस घड़ी में मोदी पहले ही देशवासियों से तेल की कम खपत, सोने की खरीद टालने, ईंधन की बचत, वर्क फ्रॉम होम और विदेश यात्राओं में कटौती जैसी अपील कर चुके हैं, जिसका स्वतःस्फूर्त असर भी दिखने लगा है। आर्थिक चुनौतियों और ईंधन संकट के बीच यूएई सहित पांच देशों की इस यात्रा में मोदी का पूरा जोर देश की अर्थव्यवस्था को पंख देने, रक्षा सहयोग और रणनीतिक समझौतों को मजबूत करने पर रहा।

मोदी मैजिक का इतिहास

साल 2020 में कोरोना संकट के दौरान जब पीएम मोदी ने ताली-थाली बजाने या दीया जलाने की अपील की थी, तो पूरा देश एक सुर में उनके साथ खड़ा हो गया था। तब भी विरोधियों ने इसका मजाक उड़ाया था, लेकिन मोदी ने उसी दौर में ‘वोकल फॉर लोकल’ का नारा देकर देश को आत्मनिर्भरता की राह पर डाल दिया। इसी का नतीजा है कि खादी का कारोबार बीते 11 वर्षों में 447 फीसदी की भारी वृद्धि के साथ रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया और बुनकरों की स्थिति बदली।

फैशन और ब्रांडिंग के इस दौर में उन्होंने देश का ध्यान हथकरघा (हैंडलूम) की ओर खींचा। आज दिवाली पर चीनी झालरों की जगह कुम्हारों के बनाए दीयों से लाखों गरीब परिवारों के घर रोशन हो रहे हैं। स्टार्टअप और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों से रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भारत तेजी से आत्मनिर्भर हो रहा है। आज करीब 65 फीसदी रक्षा उपकरण देश में ही बन रहे हैं। आकाश और ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों का निर्यात हो रहा है। दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल अब उत्तर प्रदेश के डिफेंस कॉरिडोर में बन रही है। रक्षा मंत्रालय अब 67 फीसदी घरेलू खरीद को बढ़ावा दे रहा है। आज भारत स्टार्टअप की वैश्विक रैंकिंग में तीसरे नंबर पर आ चुका है और देश में यूनिकॉर्न (1 अरब डॉलर से अधिक वैल्यूएशन वाली कंपनियां) की बाढ़ है। देश अब तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर मजबूती से अग्रसर है।

सोशल मीडिया पर भी सिरमौर

पीएम मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार बढ़ रहा है। लोकप्रियता के मामले में उन्होंने दुनिया भर के बड़े-बड़े दिग्गजों को पछाड़ दिया है। इंस्टाग्राम हो या यूट्यूब, मोदी के फॉलोअर्स सबसे ज्यादा हैं। यही कारण है कि जब वह बंगाल में झालमुड़ी खाते हैं, तो सोशल मीडिया पर झालमुड़ी ट्रेंड करने लगती है, और जब मेलोनी से मिलते हैं, तो ‘मेलोडी’ छा जाती है।

मोदी अपने इसी जन-कनेक्ट के बूते सियासी पिच से लेकर वैश्विक मंचों तक छाए हुए हैं। देश में जहां वे सत्ता के शिखर पर हैं, वहीं अपनी कड़ी मेहनत के दम पर राज्यों में भी कमल और सहयोगी दलों (एनडीए) का आधार बढ़ा रहे हैं। देश के राजनीतिक नक्शे से वामपंथ का दायरा सिमट चुका है और सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस देश की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा के सामने अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। क्षेत्रीय क्षत्रपों का प्रभाव भी लगातार घट रहा है।

मोदी देश में ही नहीं, बल्कि दुनिया के जिस भी कोने में जाते हैं, उन्हें वहां का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलता है। विदेश यात्रा से लौटते ही कैबिनेट की बैठक लेना और ताजा वैश्विक संकटों की समीक्षा में जुट जाना, उनकी यही अथक कार्यशैली उन्हें औरों से जुदा करती है। इसीलिए, मोदी शैली के विरोध में चाहे जितने स्वर उठें, लेकिन धरातल का सच यही है कि—”यह मेलोडी नहीं, मोदी का जादू है मितवा…”

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं, यह उनके निजी विचार हैं।)

Shivangi Shukla

Shivangi.shukla95512@gmail.com

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